यर बाजार गिरने पर क्या करें? निवेश के 3 मंत्र जानें

यर बाजार गिरने पर क्या करें? निवेश के 3 मंत्र जानें

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October 11, 2026

Stock Market Investment Tips : शेयर मार्केट में गिरावट देखकर क्या आप भी निवेश रोकने या पैसा निकालने के बारे में सोचते हैं? अगर हां, तो निवेश का फैसला जल्दबाजी में न लें। ICICI Prudential AMC के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर शंकरन नरेन के मुताबिक, ऐसे समय में निवेशकों को एसेट एलोकेशन, बाजार के विपरीत अवसरों की तलाश और लंबे समय तक निवेश बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। इन तीन बातों से निवेश की रणनीति बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। मार्केट में तेजी और गिरावट दोनों आती हैं, इसलिए सिर्फ हाल के उतार-चढ़ाव को देखकर फैसला लेना नुकसानदेह हो सकता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जरूरत और जोखिम उठाने की क्षमता को समझना जरूरी है। 

यर बाजार गिरने पर SIP बंद करनी चाहिए या निवेश जारी रखना चाहिए? जानें इन्वेस्टमेंट ऑफिसर की सलाह और निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखें। 

शेयर मार्केट में पूरा पैसा लगाना कितना सही? 

शेयर बाजार लंबे समय में संपत्ति बनाने का एक जरिया हो सकता है, लेकिन इसमें लगातार तेजी बनी रहे, यह जरूरी नहीं है। कई बार बाजार लंबे समय तक दबाव में रहता है। ऐसे में अगर आपका पूरा पैसा शेयरों में लगा है, तो गिरावट का असर आपके निवेश पर ज्यादा पड़ सकता है। शंकरन नरेन का जोर इसी वजह से एसेट एलोकेशन पर है। इसका मतलब है कि निवेश का पूरा पैसा एक ही जगह लगाने के बजाय उसे अलग-अलग विकल्पों में बांटा जाए। निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार, इक्विटी यानी शेयरों, डेट यानी निश्चित आय वाले साधनों और दूसरे एसेट क्लास में निवेश कर सकते हैं। इससे किसी एक विकल्प पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि, इससे नुकसान का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। 

एसेट एलोकेशन से कैसे घट सकता है जोखिम? 

एसेट एलोकेशन का मकसद निवेश में संतुलन बनाए रखना है। उदाहरण के लिए, अगर शेयर बाजार में गिरावट आती है, तो निवेश के दूसरे हिस्से पोर्टफोलियो पर पड़ने वाले असर को कुछ हद तक कम कर सकते हैं। हालांकि, हर निवेश विकल्प का प्रदर्शन अलग होता है और नुकसान की संभावना बनी रहती है। निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से हाइब्रिड फंड या एसेट एलोकेशन आधारित रणनीतियों पर भी विचार कर सकते हैं। इन विकल्पों में अलग-अलग तरह की संपत्तियों में निवेश करने की सुविधा मिल सकती है, लेकिन निवेश का अनुपात सभी के लिए एक जैसा नहीं होना चाहिए। अगर आपको जल्द पैसे की जरूरत है, तो आपकी रणनीति उस व्यक्ति से अलग होगी जो लंबे समय के लक्ष्य के लिए निवेश कर रहा है। इसलिए निवेश का बंटवारा अपने लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार करें। 

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गिरते बाजार में कहां मिल सकते हैं निवेश के मौके? 

बाजार में गिरावट के दौरान कई शेयरों और सेक्टरों के दाम नीचे आ जाते हैं, लेकिन हर गिरते शेयर को खरीदना सही फैसला नहीं होता। किसी कंपनी का शेयर कमजोर प्रदर्शन कर रहा है, तो उसके पीछे कारोबार की खराब स्थिति भी हो सकती है। शंकरन नरेन के मुताबिक, निवेशकों को उन कंपनियों और सेक्टरों पर भी नजर रखनी चाहिए, जिनका प्रदर्शन कुछ समय से कमजोर रहा है। इस रणनीति को कॉन्ट्रेरियन इन्वेस्टिंग कहा जाता है। इसमें ऐसे निवेश विकल्प तलाशे जाते हैं, जिनकी मौजूदा कीमत उनकी लंबी अवधि की संभावनाओं को पूरी तरह नहीं दिखाती, लेकिन निवेश से पहले कंपनी का कारोबार, वित्तीय स्थिति, शेयर का मूल्यांकन और भविष्य की संभावनाएं जांचना जरूरी है। केवल कीमत गिरने के कारण निवेश न करें। 

SIP बंद करें या गिरावट में निवेश जारी रखें? 

बाजार में गिरावट आते ही कई निवेशक अपनी SIP रोकने या निवेश बेचने के बारे में सोचने लगते हैं। लेकिन छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव के आधार पर अपनी पूरी योजना बदलना सही नहीं हो सकता। शंकरन नरेन का कहना है कि निवेशकों को बाजार की चाल देखकर जल्दबाजी में अपनी रणनीति से बाहर नहीं निकलना चाहिए। बाजार में तेजी और गिरावट उसके सामान्य चक्र का हिस्सा हैं। गिरावट के बाद सुधार आ सकता है, लेकिन यह कब होगा, इसका सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। घबराकर निवेश बेचने से बाजार में संभावित सुधार का फायदा छूट सकता है। फिर भी SIP जारी रखने का फैसला अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को देखकर ही करें। अगर आपकी आर्थिक स्थिति या पैसों की जरूरत बदल गई है, तो निवेश योजना की समीक्षा करना जरूरी है। 

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SIF और कॉन्ट्रेरियन फंड में निवेश से पहले क्या जानें? 

निवेशकों के पास कॉन्ट्रेरियन फंड और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) जैसे विकल्प भी हैं। कॉन्ट्रेरियन फंड उन कंपनियों या सेक्टरों में अवसर तलाशते हैं, जिनका प्रदर्शन हाल में कमजोर रहा है, लेकिन जिनमें आगे सुधार की संभावना दिखती है। SIF में फंड मैनेजर कुछ विशेष और अपेक्षाकृत जटिल निवेश रणनीतियां अपना सकते हैं। हालांकि, ज्यादा लचीलापन मिलने का मतलब कम जोखिम नहीं है। निवेश से पहले योजना के नियम, फीस, जोखिम और निकासी की शर्तें जरूर समझें। 

DISCLAIMER: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति, जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय सलाहकार की राय पर विचार करें। 

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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