OpenAI Tools 2026: OpenAI ने वैज्ञानिकों के लिए एक नया AI टूल लॉन्च किया है, जिसका नाम Prism है। यह एक फ्री ऑनलाइन वर्कस्पेस है, जिसे खास तौर पर रिसर्च पेपर लिखने और एडिट करने के लिए बनाया गया है। कंपनी ने इसकी घोषणा 27 जनवरी को की है। Prism में OpenAI का लेटेस्ट मॉडल GPT-5.2 लगा है, जो लिखने, सुधार करने और टीम के साथ मिलकर काम करने में मदद करता है। आसान भाषा में समझें तो यह साइंटिस्ट्स के लिए एक ‘AI रिसर्च असिस्टेंट’ जैसा है।
वैज्ञानिकों के लिए खुशखबरी! OpenAI का Prism टूल अब रिसर्च पेपर तैयार करने का तरीका बदल सकता है। GPT-5.2 की मदद से यह ड्राफ्टिंग, एडिटिंग और सहयोग को तेज और आसान बनाता है।
रिसर्च का बिखरा काम अब एक ही जगह
अब तक वैज्ञानिकों को पेपर तैयार करने के लिए कई टूल्स का सहारा लेना पड़ता था। बार-बार टूल बदलने से समय भी जाता है और ध्यान भी भटकता है। Prism इस समस्या का हल देने की कोशिश करता है। यह cloud पर काम करता है और LaTeX को सपोर्ट करता है, जो साइंटिफिक पेपर्स और मैथ फॉर्मूलों के लिए स्टैंडर्ड फॉर्मेट है। यानी अब टेक्स्ट, इक्वेशन और रेफरेंस सब एक ही प्लेटफॉर्म पर मैनेज हो सकते हैं।
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Prism असल में करता क्या है?
Prism के अंदर यूजर सीधे GPT-5.2 से चैट कर सकते हैं। AI पूरे डॉक्यूमेंट को देख सकता है। आप उससे नए आइडिया पर चर्चा कर सकते हैं, हाइपोथीसिस पर सवाल पूछ सकते हैं या किसी पैराग्राफ को बेहतर बनाने के लिए कह सकते हैं।
यह टूल पेपर के हिस्से ड्राफ्ट कर सकता है, तर्कों को साफ कर सकता है और पूरे कॉन्टेक्स्ट के हिसाब से सुझाव देता है। इसमें एक खास फीचर यह है कि अगर आप व्हाइटबोर्ड पर बनी इक्वेशन या हाथ से लिखा डायग्राम की फोटो अपलोड करेंगे, तो Prism उसे साफ-सुथरे LaTeX कोड में बदल देता है।
टीमवर्क हुआ आसान
Prism में टीम के साथ काम करना भी आसान है। इसमें अनलिमिटेड को-ऑथर्स जोड़े जा सकते हैं और इसके लिए कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं है। सभी लोग रियल-टाइम में एडिट कर सकते हैं और बदलाव तुरंत दिखाई देते हैं। अब ईमेल से अलग-अलग वर्जन भेजने की जरूरत कम पड़ती है। OpenAI ने यह प्लेटफॉर्म Crixet नाम की कंपनी को खरीदकर तैयार किया और उसमें AI फीचर्स जोड़े।
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OpenAI को क्यों लगता है यह बड़ा बदलाव है
कंपनी का कहना है कि AI पहले ही मैथ, बायोलॉजी और मेडिकल रिसर्च जैसे क्षेत्रों में मदद कर रहा है, लेकिन रोजमर्रा का लिखने-संपादित करने वाला काम अब भी पुराने तरीके से होता है। OpenAI का मानना है कि जैसे AI ने कोडिंग की दुनिया बदल दी, वैसे ही अब साइंस रिसर्च का तरीका भी बदल सकता है।
