4 अक्टूबर को जारी Kyoto Vision में AI, Data और Advanced Laboratories तक बेहतर पहुंच पर जोर दिया गया, जानें किन 17 देशों ने इसका समर्थन किया।
Kyoto Vision 17 Countries : अमेरिका समेत 17 देशों ने Kyoto Vision for a Golden Age of Science नाम की एक नीति घोषणा का समर्थन किया है। इसका मकसद वैज्ञानिक रिसर्च को तेज करना, वैज्ञानिक सुविधाओं तक ज्यादा लोगों की पहुंच बढ़ाना और युवा शोधकर्ताओं को बेहतर अवसर देना है। यह घोषणा 4 अक्टूबर को Kyoto में हुई मंत्रीस्तरीय बैठक के बाद जारी की गई। यह बैठक Science and Technology in Society Forum के साथ हुई थी। इस योजना में विज्ञान के लिए ‘Super Intelligence’ का इस्तेमाल करने की बात भी कही गई है। हालांकि, यह कोई फंडिंग योजना नहीं है। इसे देशों के बीच विज्ञान को लेकर एक साझा दिशा के रूप में देखा जा रहा है। इसमें कोई अनिवार्य लक्ष्य, तय बजट या काम पूरा करने की साझा समयसीमा नहीं है।
रिसर्च को मजबूत करने पर जोर
Kyoto Vision में तीन मुख्य बातों पर ध्यान दिया गया है। पहली बात, देशों ने Research Institutions और Funding Systems को बेहतर बनाने का सुझाव दिया है। इसमें Metascience को भी शामिल किया गया है। आसान भाषा में कहें तो Metascience का मतलब यह समझना है कि विज्ञान का काम कैसे होता है, रिसर्च को पैसा कैसे मिलता है और उसकी सफलता को किस तरह मापा जाता है।
दूसरी बात, वैज्ञानिकों को AI, Data, Computing Power और Specialised Facilities तक बेहतर पहुंच देने पर जोर है। इससे नई खोजों की रफ्तार बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, दस्तावेज में यह साफ नहीं किया गया कि ‘Super Intelligence’ से क्या मतलब है और इसकी सुरक्षा और पहुंच के नियम कैसे होंगे।
Nations endorsing the Kyoto Vision for a New Golden Age of Science
🇦🇷 Argentina
🇧🇬 Bulgaria
🇨🇱 Chile
🇨🇾 Cyprus
🇩🇪 Germany
🇬🇷 Greece
🇮🇩 Indonesia
🇮🇹 Italy
🇯🇵 Japan
🇰🇿 Kazakhstan
🇰🇷 Korea
🇳🇿 New Zealand
🇵🇱 Poland
🇸🇬 Singapore
🇦🇪 UAE
🇬🇧 UK
🇺🇸USAhttps://t.co/Wwvz1GLAVL pic.twitter.com/gwZhvEYpCR— White House OSTP 47 (@WHOSTP47) October 4, 2026
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युवा वैज्ञानिकों को मिलेगा समर्थन
तीसरे हिस्से में वैज्ञानिक प्रतिभा को बढ़ावा देने की बात है। इसके तहत प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, शुरुआती करियर वाले रिसर्चर के लिए सपोर्ट, डॉक्टरल प्रोग्राम, फेलोशिप और यूनिवर्सिटी, सरकार तथा इंडस्ट्री के बीच पार्टनरशिप बढ़ाने का सुझाव दिया गया है।
इन 17 देशों ने किया समर्थन
White House के अनुसार, इस योजना का समर्थन अर्जेंटीना, बुल्गारिया, चिली, साइप्रस, जर्मनी, ग्रीस, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कजाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, पोलैंड, सिंगापुर, UAE, UK और US ने किया है। इस पहल को अमेरिकी विज्ञान सलाहकार माइकल क्रैट्सियोस ने पेश किया है।
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AI रिसर्च के लिए क्यों अहम?
इस घोषणा से पता चलता है कि AI, बड़े डेटा सेट और एडवांस्ड लेबोरेटरीज को वैज्ञानिक रिसर्च की जरूरी सुविधाओं का हिस्सा माना जा रहा है। छोटे संस्थानों के लिए इन संसाधनों का खर्च उठाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में साझा पहुंच से ज्यादा शोधकर्ताओं को नई तकनीकों का इस्तेमाल करने का मौका मिल सकता है। हालांकि, अभी खर्च बांटने, सेंसेटिव डेटा की सुरक्षा और रिसर्ट एक्सेस के नियमों को लेकर कई सवाल साफ नहीं हैं। AI से मिलने वाले नतीजों का तेजी से चिकित्सा, उद्योग और सार्वजनिक नीति में इस्तेमाल होने पर मानकों को बनाए रखने के लिए कठोरता, पारदर्शिता और पुनरुत्पादकता बनाए रखना भी जरूरी होगा।
