donald trump renames ai super intelligence artificial intelligence hindi news

AI का नाम बदलकर ‘Super Intelligence’ क्यों कर रहे ट्रंप?

8 mins read
2 views
October 2, 2026

Trump Super Intelligence : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय एजेंसियों को AI के बजाय ‘Super Intelligence’ शब्द इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। यह फैसला टेक कंपनियों के साथ उनकी सरकार की बढ़ती साझेदारी के बीच आया है। White House में हुए एक लंच के दौरान टेक कंपनियों के प्रमुखों ने स्वैच्छिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। बैठक में डेटा सेंटर बढ़ाने और AI सुरक्षा पर भी चर्चा हुई।

अमेरिका में AI का नाम बदलकर ‘Super Intelligence’ करने की तैयारी, जानें ट्रंप के फैसले, 73% लोगों की चिंता और टेक कंपनियों के सुरक्षा।

AI से ‘Super Intelligence’ नाम क्यों?

ट्रंप का कहना है कि ‘Artificial’ शब्द तकनीक को कुछ हद तक नकली दिखाता है। उनके मुताबिक ‘super’ शब्द इसकी क्षमता को बेहतर तरीके से दिखाता है। उन्होंने पहले सार्वजनिक तौर पर इस बदलाव की बात कही और बाद में संघीय एजेंसियों के लिए नया शब्द अपनाने का निर्देश दिया। हालांकि, ‘Super Intelligence’ यहां तकनीकी अर्थ में Artificial Superintelligence नहीं है। शोधकर्ता Artificial Superintelligence का इस्तेमाल ऐसी काल्पनिक मशीन के लिए करते हैं, जो हर क्षेत्र में इंसानों की सबसे बेहतर क्षमता से आगे निकल जाए। अभी प्रशासन का नया नाम मौजूदा AI तकनीक के लिए ही इस्तेमाल होगा। यह बदलाव अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा के संदेश से भी जुड़ा है।

AI सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

नए नाम के साथ AI सुरक्षा पर बहस भी तेज है। Reuters और Ipsos के 17 से 20 सितंबर के सर्वे में 73% लोगों ने कहा कि AI कंपनियों ने गंभीर नुकसान रोकने के लिए पर्याप्त काम नहीं किया है। ट्रंप प्रशासन विकास की रफ्तार धीमी करने वाले उपायों का विरोध करता रहा है। ऐसे में ‘Super Intelligence’ नाम तकनीक को ज्यादा सकारात्मक तरीके से पेश करने का प्रयास माना जा रहा है। बैठक में OpenAI के ग्रेग ब्रॉकमैन, Anthropic के डारियो अमोदेई, Meta के मार्क जुकरबर्ग, Google के सुंदर पिचाई और Nvidia के जेन्सेन हुआंग शामिल हुए। एलन मस्क, Microsoft के सत्य नडेला और AMD की लीसा सू भी मौजूद थे।

READ MORE: AI Tutor और Virtual Classroom से बदलेगी पढ़ाई की दुनिया

कंपनियों ने क्या सुरक्षा वादा किया?

ट्रंप ने कंपनियों के समझौते को ‘लगभग संविधान जैसा’ बताया है। उन्होंने AI सुरक्षा की निगरानी के लिए 10 सदस्यों का बोर्ड बनाने का सुझाव भी दिया। जुकरबर्ग ने कहा कि कंपनियां मजबूत आंतरिक नियंत्रण बनाएंगी। समझौते में स्वतंत्र ऑडिट, आंतरिक निगरानी और बोर्ड स्तर की निगरानी शामिल है। इसका मकसद AI सिस्टम को अनधिकृत तरीके से हैकिंग या तकनीकी ढांचे तक पहुंचने से रोकना है।

READ MORE: Anthropic का Claude Opus 5 लॉन्च, Coding में मचाई हलचल

समझौता कानून नहीं, स्वैच्छिक पहल

यह समझौता स्वैच्छिक है और इसे कानूनी बाध्यता के बजाय ‘नैतिक रूप से बाध्यकारी’ बताया गया है। यह मौजूदा कानून, नियामकों या सरकारी कार्रवाई की जगह नहीं लेता। सरकार ने डेटा सेंटर निर्माण तेज करने की बात भी जोड़ी है। कंपनियों को बिजली की मांग, लागत और स्थानीय समुदायों की चिंताओं पर काम करना होगा। अभी नाम बदलने से सरकारी संदेश जरूर बदलेगा, लेकिन AI सुरक्षा, प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही पर बहस जारी रहेगी।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

Don't Miss