एआई ' Mythos' के खिलाफ भारत ने खोला मोर्चा, क्या खतरे में है देश का बैंकिंग सिस्टम?

एआई ‘ Mythos’ के खिलाफ भारत ने खोला मोर्चा, क्या खतरे में है देश का बैंकिंग सिस्टम?

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April 29, 2026

IT Ministry on Mythos AI: Anthropic के नए और शक्तिशाली एआई मॉडल Mythos ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। भारत ने अब इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका और एंथ्रोपिक के सामने अपनी बात रखी है। दरअसल,  भारत की चिंता इस बात को लेकर है कि इस ताकतवर तकनीक का एक्सेस केवल चुनिंदा पश्चिमी कंपनियों तक सिमटा हुआ है। ऐसे में यह भविष्य में भारत के डिजिटल ढांचें के लिए खतरा बन सकता है।

सावधान! आ गया है सबसे खतरनाक AI मॉडल मिथोस‘, निर्मला सीतारमण ने बताया इसे नेशनल सिक्योरिटी के लिए चुनौती।

साइबर सुरक्षा की नई चुनौती

​बता दें कि यह सॉफ्टवेयर में मौजूद उन जीरो-डे  खामियों को खोजने और उनका फायदा उठाने में सक्षम है।  जिसकी जानाकारी खुद डेवलपर्स को भी पता नहीं होता। भारत के लिए यह सबसे बड़ी चिंता का विषय है।  क्योंकि यदि बैंकिंग, टेलीकॉम और बिजली ग्रिड जैसे महत्वपूर्ण नेटवर्क इन कमियों के कारण असुरक्षित रह गए तो आगे चलकर घातक हो सकते हैं।  इसलिए केंद्र सरकार अब ऐसा काम कर रहा है,जिससे भारतीय कंपनियों को इसका एक्सेस मिले और वे अपने सिस्टम को सुरक्षित भी रख सकें।

वित्त और आईटी मंत्रालय की जुगलबंदी

​हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पुष्टि की कि इस मुद्दे को सरकार के उच्चतम स्तर पर उठाया गया है। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रमुख साइबर एजेंसियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद, सरकार अब एंथ्रोपिक और अमेरिकी प्रशासन के साथ सीधे संवाद में है। सीतारमण कहना है कि मिथोस के कारण आने वाली साइबर चुनौतियां अभूतपूर्व होंगी और भारत इसे हल्के में नहीं ले सकता।

प्रोजेक्ट ग्लास विंग और भारत की अनदेखी

​फिलहाल, एंथ्रोपिक ने मिथोस को सार्वजनिक नहीं किया है। इसे ‘प्रोजेक्ट ग्लास विंग’ के तहत करीब 40 वैश्विक कंपनियों को परीक्षण के लिए दिया गया है। इनमें एक भी भारतीय कंपनी को शामिल नहीं किया है। इस भेदभावपूर्ण पहुंच ने भारतीय नीति निर्माताओं के लिए चिंता की लकीरें खींच दी हैं। जानकारों का कहना है कि भारत को तुरंत इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने की मांग करनी चाहिए, ताकि हम तकनीक की इस दौड़ में पीछे न छूट जाएं।

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सुरक्षा और जोखिम का संतुलन

​इसके जानकार मानते हैं कि मिथोस जैसी एआई तकनीक एक दोधारी तलवार है। जहां एक ओर सुरक्षा एजेंसियां इसका उपयोग खामियों को ढूंढने और ठीक करने  के लिए कर सकती हैं तो वहीं हैकर्स इसका उपयोग विनाशकारी हमले करने के लिए भी कर सकते हैं। इसी डबल स्टैंडर्स के कारण भारत सरकार ने CERT-In और NCIIPC जैसी एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है और संवेदनशील प्रणालियों की समीक्षा तेज कर दी है।

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एआई का अनियंत्रित विस्तार

​भारत की चिंता केवल मिथोस तक सीमित नहीं है। सरकार को डर है कि आने वाले समय में अन्य एआई कंपनियां भी बिना किसी पूर्व सूचना के ऐसे शक्तिशाली मॉडल पेश कर सकती हैं। हाल ही में आई रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ अनाधिकृत यूजर्स ने निजी ऑनलाइन मंचों पर मिथोस का एक्सेस प्राप्त कर लिया था। जिससे यह साबित होता है कि ऐसी शक्तिशाली तकनीक को नियंत्रित करना या कैद में रखना लगभग असंभव है।

Rahul Ray

मैं एनेलिटिक्स इनसाइट के लिए टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिप्टोकरेंसी, साइबर सिक्योरिटी, गैजेट्स, मोबाइल ऐप्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म को कवर करता हूं। मुझे
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