India Sarvam AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं जहां एआई की ने अपना प्रभाव न छोड़ा हो। हर तरह एआई की ही चर्चाएं चल रही है। ऐसे समय में भारत के सामने बड़ा सवाल खड़ा है कि क्या भारत सिर्फ विदेशी एआई तकनीक का उपयोग करेगा या खुद अपनी तकनीक का इजात करेगा? इसी मुद्दे को लेकर SarvamAI के सह-संस्थापक Pratyush Kumar ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अब सिर्फ एआई का उपभोक्ता बनकर नहीं रह सकता। तो आइए जानते है उनके इस बयान के मायने और आगे की प्लानिंग।
भारत में जल्द ट्रिलियन-पैरामीटर एआई मॉडल तैयार करने की चल रही तैयारी…क्या इस देश की एआई क्षमता को मिलेगी बूस्ट?
विदेशी तकनीक पर निर्भरता का खतरा
बता दे कि भारत लंबे समय से विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करता आया है। सोशल मीडिया से लेकर क्लाउड तक कई तकनीकें बाहर से आईं। भारत ने उनका इस्तेमाल तो किया। लेकिन तकनीक का मालिक नहीं बन पाया। दूसरे देश अपने तकनीक के जरिए भारत से खबरों रूपए कमा ले रहे हैं लेकिन भारत उपभोक्त रहते हुए अपना तकनीक इजात नहीं कर पा रहा है। अब एआई के दौर में भी वही खतरा दिख रहा है। इसपर प्रत्युष कुमार का कहना है कि भारत को यह गलती दोबारा नहीं दोहरानी चाहिए।
Sarvam AI की बड़ी तैयारी
दरअसल, Sarvam AI अब बड़ा एआई मॉडल तैयार करने की योजना बना रही है। कंपनी अगले नौ महीनों में ट्रिलियन-पैरामीटर एआई मॉडल ट्रेन करना चाहती है। यह भारत के लिए बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कंपनी का दावा है कि उसने पहले ही इसका प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट दिखा दिया है। यानी भारत अपने दम पर बड़े एआई सिस्टम बना सकता है। हालांकि बड़े एआई मॉडल बनाना आसान नहीं है। इसके लिए भारी कंप्यूटिंग पावर चाहिए। हजारों GPU और बड़े डेटा सेंटर की भी जरूरत होती है। भारत को इस दिशा में तेजी से काम करना होगा।
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एआई की भूमिका चैटबॉट से बड़ी
एआई को लोग सिर्फ चैटबॉट समझते हैं। लेकिन इसकी भूमिका कहीं इससे बड़ी है। एआई अब उद्योगों में पहुंच रहा है। धीरे-धीरे सरकारी कामकाज में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है। विज्ञान और रिसर्च में भी एआई का काफी तेजगति से उपयोग होने लगा है। उत्पादन के क्षेत्र में भी इसके उपयोग कर अपनेआप में बदलाव करने लगा है। जिस तरह से इसकी रफ्तार बढ़ रही है उससे लगता है आनेवाले समय में एआई पूरी अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन सकता है।
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रिसर्च टैलेंट पर भी फोकस जरूरी
एआई की असली ताकत रिसर्च में होती है। दुनिया की बड़ी कंपनियां लगातार टैलेंट हायर कर रही हैं। भारत के पास प्रतिभा की कमी नहीं है। लेकिन बेहतर रिसर्च माहौल बनाना जरूरी है। विश्वविद्यालयों और इंडस्ट्री को साथ काम करना होगा। कुमार ने एआई नीति को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि भारत के पास अभी साफ दिशा नहीं दिखती। एआई के लिए लंबी रणनीति बनानी होगी। सरकार को निवेश बढ़ाना होगा। निजी कंपनियों को भी आगे आना होगा।
अगर भारत एआई तकनीक को सही तरीके से इस्तेमाल और नए- नए तकनीक की खोज पर ध्यान देता है तो यह सिर्फ तकनीक नहीं, आर्थिक ताकत बन सकता है। क्योंकि भारत के पास बड़ा बाजार है और युवा टैलेंट भी है।
