Artificial Intelligence News: Anthropic के नए प्रयोग में Claude ने 15 में से 14 प्रोटीन लक्ष्यों के लिए सफल प्रोटीन बाइंडर डिजाइन किए। बाहरी शोधकर्ताओं ने इन डिजाइन को लैब में बनाकर जांचा। कंपनी का कहना है कि इस काम से ड्रग रिसर्च का समय और मेहनत काफी घट सकती है।
Claude AI ने 1,320 प्रोटीन डिजाइन किए और 354 बाइंडर की पुष्टि हुई, जानिए AI ने प्रोटीन रिसर्च में कितना बेहतर प्रदर्शन किया और इसकी सीमाएं क्या हैं।
Claude ने डिजाइन किए 1,320 प्रोटीन
Anthropic ने Claude Opus 4.8 और Mythos Preview को इस प्रयोग में लगाया। दोनों मॉडल को 15 अलग-अलग लक्ष्यों के लिए 30-30 प्रोटीन बाइंडर डिजाइन करने को कहा गया। मॉडल ने कुल 1,320 डिजाइन तैयार किए। इनमें से 354 बाइंडर की 14 लक्ष्यों के साथ बाइंडिंग की पुष्टि हुई। खास बात यह रही कि शुरुआती निर्देश देने के बाद इंसानी मदद काफी कम थी। Claude ने खुद संभावित बाइंडिंग साइट चुनी। फिर प्रोटीन की संरचना और सीक्वेंस तैयार किए। इसके बाद उसने डिजाइन में सुधार किया और विशेषज्ञ प्रोटीन-डिजाइन मॉडल से उम्मीदवारों की जांच की। Anthropic ने यह प्रयोग Adaptyv Bio और Twist Bioscience के साथ किया। इन कंपनियों के शोधकर्ताओं ने Claude के डिजाइन को स्वतंत्र रूप से तैयार किया और लैब में उनकी जांच की।
Claude की सफलता सामान्य दर से ज्यादा रही
सभी लक्ष्यों पर एक साथ काम करने पर Opus 4.8 की हिट रेट 22.6% रही। Mythos Preview ने 26.7% हिट रेट हासिल की। जब Mythos Preview ने हर लक्ष्य पर अलग-अलग सत्र में काम किया, तो इसकी कुल हिट रेट बढ़कर 35.1% हो गई। Anthropic के मुताबिक, आज के सामान्य प्रोटीन-डिजाइन अभियानों में हिट रेट करीब 10-15% रहती है। एक खास टेस्ट में Claude ने बेहतर प्रदर्शन किया। RBX1 नाम के लक्ष्य पर Mythos Preview की सिंगल-टारगेट हिट रेट 40% रही। इसकी तुलना में संबंधित प्रतियोगिता में दूसरे प्रतिभागियों की हिट रेट सिर्फ 3.7% थी। Claude के सबसे अच्छे डिजाइन ने उस प्रतियोगिता के विजेता डिजाइन से भी मजबूत बाइंडिंग दिखाई।
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हर प्रोटीन लक्ष्य पर सफलता नहीं मिली
AI का प्रदर्शन हर जगह एक जैसा नहीं रहा। Anthropic के मुताबिक, Claude को maltose-binding protein यानी MBP पर खास दिक्कत हुई। इस लक्ष्य के लिए तैयार किए गए 90 डिजाइन में से किसी की बाइंडिंग की पुष्टि नहीं हुई। हालांकि, एक डिजाइन में कमजोर लेकिन बार-बार दिखाई देने वाला बाइंडिंग सिग्नल मिला। BBF-14 पर भी सफलता सीमित रही। यह एक ऐसे β-barrel आकार वाले प्रोटीन का लक्ष्य था, जो प्रकृति में मौजूद नहीं है। Anthropic ने साफ किया कि मजबूत प्रोटीन बाइंडर बनाना सिर्फ शुरुआती कदम है। इससे सीधे कोई दवा तैयार नहीं हो जाती। आगे कई और जांच और विकास की जरूरत होती है।
Claude ने केमिकल डेटा भी तेजी से जांचा
Anthropic ने Claude को NMR और LC-MS डेटा पर भी परखा। वैज्ञानिक इन तकनीकों का इस्तेमाल किसी पदार्थ की संरचना और शुद्धता जांचने के लिए करते हैं। कंपनी ने बताया कि Claude ने कच्ची लैब फाइलों से NMR डेटा को 23 मिनट और LC-MS डेटा को 19 मिनट में प्रोसेस किया। इसके नतीजे लैब की जांच से काफी करीब रहे। Claude ने शुद्धता 96.4% बताई, जबकि लैब के विश्लेषण में यह आंकड़ा 96.33% था।
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AI से तेज हो सकती है दवा रिसर्च
Anthropic का मानना है कि ऐसे AI सिस्टम वैज्ञानिक रिसर्च में लगने वाला समय, विशेषज्ञता और लागत कम कर सकते हैं। अभी कंपनी Claude की क्षमताओं को अलग-अलग दवा तकनीकों के साथ जोड़कर पूरी ड्रग-डेवलपमेंट प्रक्रिया में इस्तेमाल करने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि, कंपनी ने जैविक रिसर्च के संभावित गलत इस्तेमाल का जोखिम भी माना है। इसी वजह से प्रोटीन डिजाइन जैसी क्षमताएं फिलहाल आम यूजर्स के लिए खुली नहीं हैं। Anthropic इन्हें सुरक्षित तरीके से सीमित और भरोसेमंद एक्सेस प्रोग्राम के जरिए उपलब्ध कराने पर काम कर रही है।
