Microgrid data center: AI तकनीक के युग में बिजली खपत भी एक बहुत बड़ा मुद्दा बन गया। टेक कंपनियां AI Data Cente निर्माण करना तो चाहती है। लेकिन भारी बिजली की खपत चिंता का विषय बना हुआ है। कई कंपनियां इन समस्याओं के निदान के लिए प्रयास भी कर रहे हैं। इसी बीच एक राहत देनेबाली खबर आयरलैंड आई है। आयरलैंड में एक नया डेटा सेंटर शुरू किया गया है। जो पारंपरिक पॉवरग्रिड पर निर्भर नहीं है। यह स्वंय Microgrid सिस्टम से चलता है।
AI के रफ्तार के बीच बिजली की बढ़ती मांग से निपटने के लिए बनाए जा रहे हैं माइक्रोग्रिड डेटा सेंटर…खुद बिजली करेंगी पैदा…जानिए कैसे करती है काम।
माइक्रोग्रिड क्या है और कैसे काम करता है
बता दें कि इस प्रोजेक्ट को ऊर्जा समाधान कंपनी AVK और Pure Data Centres ने मिलकर तैयार किया है। जिसका उद्देश्य है डेटा सेंटरों को स्थिर और अधिक से अधिक मात्रा में बिजली देना है। यह एक माइक्रोग्रिड एक छोटा और स्वतंत्र बिजली नेटवर्क होता है। इसकी खासियत है कि यह स्थानीय स्तर पर बिजली पैदा कर सकता है। जरूरत पड़ने पर बिजली स्टोर भी कर सकता है। अगर मुख्य बिजली ग्रिड में समस्या आ जाए तो भी माइक्रोग्रिड काम करता रहता है। इससे डेटा सेंटरों को 24 घंटे बिजली मिलती रहती है।
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AI डेटा सेंटर में क्यों खपत होते हैं ज्यादा बिजली
Artificial Intelligence तकनीक को चलाने के लिए भारी कंप्यूटिंग पावर चाहिए। हजारों सर्वर लगातार काम करते हैं। इन सर्वरों से काफी गर्मी पैदा होती है। उन्हें ठंडा रखने के लिए भी ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है। अगर ठंडा नहीं रखा गया तो चिप खराब हो सकती है। इसी कारण डेटा सेंटरों की बिजली खपत तेजी से बढ़ रही है।
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बिजली ग्रिड पर बढ़ता दबाव
अब एआई तकनीक को हर देश अपनाना चाहता है। यूरोप भी इस रेस में शामिल हो चुका है। लेकिन बिजली की खपत यहां भी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। यूरोप के कई देशों में बिजली ग्रिड पहले से दबाव में है। ऐसे में माइक्रोग्रिड इस समस्या का समाधान के लिए संजीवनी बनकर उभर रहा है। इससे कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से बिजली खुद पैदा कर सकती हैं।
वहीं, ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों की माने तो आनेवाले समय में AI और तेज रफ्तार से बढ़ेगा। डेटा सेंटरों की संख्या भी बढ़ेगी। ऐसे में माइक्रोग्रिड आधारित बिजली व्यवस्था का रोल काफी महत्वपूर्ण हो जाएगा।
