AI vs IIT: क्या AI के आने के बाद IIT Bombay जैसी संस्थाओं की अहमियत कम हो गई है? अभी यही सवाल सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र और Anahad के सह-संस्थापक एवं CEO शिखर अग्रवाल ने इस बहस पर अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि IIT की सबसे बड़ी ताकत उसकी डिग्री नहीं, बल्कि वहां का माहौल और प्रतिभाशाली लोगों का साथ है।
क्या AI के आने से IIT की अहमियत कम हो गई है? IIT Bombay के पूर्व छात्र शिखर अग्रवाल ने इस सवाल पर अपनी राय साझा की है।
IIT को लेकर क्या बोले शिखर अग्रवाल?
शिखर अग्रवाल ने LinkedIn पर लिखा कि IIT बॉम्बे छोड़े उन्हें 5 साल हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने अपना स्टार्टअप भी खड़ा किया। फिर भी लोग उनसे अक्सर पूछते हैं कि क्या IIT सच में उतना फायदेमंद है या सिर्फ एक हाइप बन चुका है। उन्होंने कहा कि AI के दौर में यह सवाल और ज्यादा अहम हो गया है। आज लगभग हर जानकारी कुछ ही सेकंड में मिल जाती है। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि बड़ी डिग्रियों की अहमियत पहले जैसी नहीं रही, लेकिन शिखर का मानना है कि IIT की असली ताकत जानकारी नहीं, बल्कि वहां मिलने वाला माहौल है।
गोल्डफिश का उदाहरण देकर समझाई बात
अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने गोल्डफिश का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक अगर गोल्डफिश छोटे बर्तन में रहे तो उसका आकार 2 से 3 इंच तक ही बढ़ता है। बड़े एक्वेरियम में वह 3 से 4 इंच तक पहुंचती है, जबकि तालाब में वही मछली 5 से 6 इंच तक बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि इंसान के साथ भी यही होता है। उसका विकास उस माहौल पर निर्भर करता है, जहां वह सीखता और काम करता है। शिखर के शब्दों में, उनके लिए IIT Bombay वही ‘तालाब’ था, जिसने उनकी सोच को बड़ा बनाया।
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डिग्री नहीं, माहौल बना सबसे बड़ी पूंजी
शिखर अग्रवाल ने बताया कि उन्हें सबसे बड़ा फायदा दीवार पर लगी डिग्री से नहीं मिला। असली सीख उन 4 वर्षों में मिली, जब वे प्रतिभाशाली और महत्वाकांक्षी छात्रों के बीच रहे। उनका कहना है कि जब आसपास ऐसे लोग हों जो लगातार कुछ नया करने की कोशिश कर रहे हों, तो आपकी सोच भी अपने आप बड़ी होने लगती है। यही माहौल व्यक्ति को बेहतर बनने की प्रेरणा देता है। उन्होंने 2021 में IIT बॉम्बे से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने Anahad की शुरुआत की और आज उसके CEO हैं।
AI जानकारी दे सकता है, माहौल नहीं
शिखर का मानना है कि AI ने IIT जैसे संस्थानों की अहमियत कम नहीं की, बल्कि उनकी असली ताकत को और स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि AI हर सवाल का जवाब दे सकता है, लेकिन ऐसा माहौल नहीं बना सकता जहां लोग एक-दूसरे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।इसी वजह से उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई। कुछ लोग उनकी बात से सहमत दिखे, जबकि कुछ का मानना है कि AI के दौर में कौशल सबसे ज्यादा मायने रखता है।
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शिखर अग्रवाल का मानना है कि जानकारी आज सभी के पास है, लेकिन सही माहौल अब भी सबसे बड़ी पूंजी है। उनका संदेश साफ है कि सीखने वाले लोगों का साथ किसी भी तकनीक से ज्यादा असर डाल सकता है।
