AI डीपफेक पर नया बिल, गलती पर भारी सजा तय

AI डीपफेक पर नया बिल, गलती पर भारी सजा तय

8 mins read
6 views
August 13, 2026

AI Deepfake Bill: क्या कोई आपकी आवाज, चेहरा या शक्ल की हूबहू नकल बनाकर उसे इंटरनेट पर चला सकता है? अब इस पर रोक लगाने की तैयारी है। BJP सांसद बैजयंत पांडा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल से व्यक्तित्व और रूप-रंग की सुरक्षा संबंधी विधेयक 2026 का प्रस्ताव रखा है। यह बिल लोकसभा में पेश किया जाना है और इसका मकसद AI से बने डीपफेक के गलत इस्तेमाल से लोगों की पहचान और प्रतिष्ठा बचाना है।

AI से बनी फर्जी फोटो, वीडियो और आवाज पर रोक के लिए नया बिल आया, जानिए प्लेटफॉर्म, दोषियों और पीड़ितों के लिए क्या नियम प्रस्तावित हैं।

AI डीपफेक बिल में क्या है खास?

प्रस्ताव के मुताबिक, किसी व्यक्ति की वास्तविक जैसी AI नकल बनाने, प्रकाशित करने या फैलाने के लिए पहले उसकी स्पष्ट अनुमति जरूरी होगी। नियम तब लागू होगा, जब कंटेट लोगों को यह विश्वास दिला सकती हो कि संबंधित व्यक्ति ने वास्तव में कुछ कहा, किया या किसी चीज का समर्थन किया है। बिल में सहमति को स्वतंत्र, पूरी जानकारी के साथ और स्पष्ट अनुमति माना गया है। इसे सत्यापित किए जा सकने वाले रूप में दर्ज करना होगा।

प्रस्ताव में इन चीजों की AI नकल शामिल होगी:

  • चेहरा
  • आवाज
  • शारीरिक रूप-रंग
  • पहचान से जुड़ी दूसरी खास विशेषताएं

यह रोक व्यावसायिक और गैर-व्यावसायिक, दोनों तरह के इस्तेमाल पर लागू होगी।

READ MORE:  Anthropic ने Riot से की 9 अरब की AI कंप्यूटिंग डील

प्लेटफॉर्म को 24 घंटे में हटाना होगा कंटेंट

अगर किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को उल्लंघन करने वाली AI कंटेट की जानकारी या शिकायत मिलती है, तो उसे 24 घंटे के भीतर कंटेंट हटाना या उसकी पहुंच बंद करनी होगी। एडल्ट रूप से स्पष्ट AI कंटेट के मामले में यह समय सीमा घटकर 12 घंटे करने का प्रस्ताव है। प्लेटफॉर्म को ऐसी शिकायतों के लिए अलग शिकायत व्यवस्था भी रखनी होगी। बिल में कहा गया है कि AI का इस्तेमाल किसी की नकल करने, लोगों को गुमराह करने, धोखाधड़ी और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए बढ़ रहा है।

दोषी को 3 साल जेल, 10 लाख जुर्माना

अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर AI नकल का इस्तेमाल किसी की पहचान की नकल, धोखाधड़ी, धोखा देने या अश्लील सामग्री के लिए करता है, तो उस पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है। प्रस्ताव में 3 साल तक की जेल, 10 लाख तक जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। पीड़ित अलग से अदालत में जाकर कंटेंट हटाने, रोक लगाने और प्रतिष्ठा या गरिमा को हुए नुकसान का मुआवजा भी मांग सकता है।

READ MORE: Spotify ने AI कलाकारों के लिए शुरू किया नया पहचान बैज

खबर, पैरोडी और व्यंग्य को मिलेगी छूट

बिल में वास्तविक खबरों, सार्वजनिक मामलों और जनहित से जुड़ी रिपोर्टिंग को अपवाद दिया गया है। शर्त यह है कि सामग्री तथ्यात्मक हो और AI नकल का इस्तेमाल लोगों को गुमराह करने के लिए न किया जाए। पैरोडी, व्यंग्य, कैरिकेचर और कलात्मक अभिव्यक्ति को भी सुरक्षा मिलेगी, अगर कंटेट साफ तौर पर गैर-वास्तविक हो और गंभीर नुकसान न पहुंचाए।

मृत व्यक्ति की पहचान को भी मृत्यु के बाद 10 साल तक सुरक्षा देने का प्रस्ताव है। इस दौरान AI नकल के लिए कानूनी वारिस या अधिकृत प्रतिनिधि की सहमति जरूरी होगी। अगर बिल आगे बढ़ता है, तो AI डीपफेक के इस्तेमाल को लेकर भारत में पहली बार पहचान और आवाज की सुरक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार हो सकता है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

Don't Miss