Amazon Prime Video: क्या आपने भी बिना विज्ञापन वाला Prime Video खरीदकर बाद में Ads देखे हैं? Amazon अब इसी तरह के एक बड़े विवाद में फंस गया है। ऑस्ट्रेलिया की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था ने Amazon Prime Video Ads मामले में कंपनी को अदालत में घसीट दिया है। आरोप है कि कंपनी ने पहले से भुगतान कर चुके ग्राहकों को विज्ञापन दिखाए और Ads हटाने के लिए अलग से पैसे मांगे।
Amazon Prime Video Ads विवाद ने नया मोड़ ले लिया, ऑस्ट्रेलिया के नियामक ने कंपनी पर लाखों ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे लेने का आरोप लगाया है।
Amazon Prime Video Ads विवाद क्या है?
ऑस्ट्रेलियन कॉम्पिटिशन एंड कंज्यूमर कमीशन (ACCC) का कहना है कि 2024 में Amazon ने Prime Video पर विज्ञापन शुरू कर दिए। इससे पहले यह सेवा पूरी तरह विज्ञापन मुक्त थी। जिन ग्राहकों ने पहले ही A$79 देकर सालभर का Prime सब्सक्रिप्शन लिया था, उन्हें अचानक विज्ञापनों वाला कंटेंट दिखने लगा। अगर कोई बिना Ads के वीडियो देखना चाहता था, तो उसे हर महीने अतिरिक्त A$2.99 चुकाने के लिए कहा गया। नियामक के अनुसार, उस समय 8.5 लाख से ज्यादा वार्षिक ग्राहक पहले ही पूरे साल की फीस जमा कर चुके थे।
Amazon पर क्या-क्या आरोप लगे हैं?
ACCC का आरोप है कि Amazon ने अपने कॉन्ट्रैक्ट में ऐसी 5 शर्तें शामिल की थीं, जिनके आधार पर कंपनी बिना ग्राहकों की सहमति के सेवा में बड़े बदलाव कर सकती थी।
आरोपों के मुख्य बिंदु:
- 10 लाख से ज्यादा वार्षिक Prime सदस्य प्रभावित हुए।
- मामला 1 नवंबर 2023 से 18 अगस्त 2025 के बीच के ग्राहकों से जुड़ा है।
- ग्राहकों को न कोई रिफंड मिला और न ही उचित मुआवजा दिया गया।
- नियामक का दावा है कि Amazon ने अनुचित अनुबंध शर्तों का इस्तेमाल किया।
ACCC का कहना है कि कंपनी ने पहले से खरीदी गई सेवा की शर्तें बदल दीं, जिससे उपभोक्ताओं के अधिकार प्रभावित हुए।
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Amazon ने क्या जवाब दिया?
Amazon Australia ने कहा है कि वह अदालत में दायर मामले की विस्तार से समीक्षा कर रही है। कंपनी का दावा है कि उसने जांच के दौरान नियामक एजेंसी के साथ पूरा सहयोग किया है। हालांकि, ACCC अदालत से Amazon पर आर्थिक जुर्माना, ग्राहकों को मुआवजा, कानूनी खर्च और अन्य जरूरी आदेश जारी करने की मांग कर रही है।
Prime Video यूजर्स पर क्या असर पड़ सकता है?
Prime Video 2018 से ऑस्ट्रेलिया में उपलब्ध है और यह Amazon Prime सदस्यता का हिस्सा है। इसमें वीडियो स्ट्रीमिंग के साथ तेज़ डिलीवरी और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। अगर अदालत ACCC के पक्ष में फैसला देती है, तो Amazon को अपनी सब्सक्रिप्शन नीति बदलनी पड़ सकती है। इसका असर भविष्य में दूसरे देशों की डिजिटल सब्सक्रिप्शन सेवाओं पर भी देखने को मिल सकता है।
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Amazon Prime Video Ads विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल चुका है। अदालत का फैसला सिर्फ Amazon ही नहीं, बल्कि पूरी डिजिटल सब्सक्रिप्शन इंडस्ट्री के लिए अहम साबित हो सकता है। अब सभी की नजर इस मामले के अगले चरण पर टिकी है।
