Apple CCI India: भारत में Apple के खिलाफ चल रही एंटीट्रस्ट जांच में एक अहम मोड़ आया है। कंपनी ने अब Competition Commission of India (CCI) को भारत से जुड़ा अपना वित्तीय डेटा देने पर सहमति जताई है। यह फैसला लंबे समय से चल रही जांच को तेज कर सकता है और यह तय करने में मदद करेगा कि Apple के App Store नियम प्रतिस्पर्धा कानूनों का उल्लंघन करते हैं या नहीं।
Apple ने भारत के CCI को वित्तीय डेटा देने पर सहमति दी, जानिए App Store जांच, एंटीट्रस्ट केस और इस फैसले का पूरा असर।
कई महीनों से चल रही थी टकराव की स्थिति
Apple पिछले कई महीनों से वित्तीय जानकारी साझा करने से बच रहा था। कंपनी ने भारत के नए Competition Act पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह नियम वैश्विक टर्नओवर के आधार पर भारी जुर्माना लगा सकता है। Apple का तर्क था कि इस तरह के नियम उसे बहुत बड़े वित्तीय जोखिम में डाल सकते हैं। 21 मई की सुनवाई में Apple ने जून के अंत तक डेटा देने के लिए अंतिम समयसीमा मांगी थी। एक गोपनीय CCI आदेश के अनुसार, जिसे Reuters ने देखा, आयोग ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया।
अदालत के आदेश के बाद बदला रुख
Apple ने पहले कहा था कि यह पूरा केस तब तक रोका जाना चाहिए जब तक अदालतें नए Competition Act की वैधता पर फैसला न दें। लेकिन CCI ने इस मांग को खारिज कर दिया। स्थिति तब बदली जब दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले महीने Apple को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। इसके बाद कंपनी को अपना रुख बदलना पड़ा और अब वह वित्तीय डेटा देने पर तैयार हो गई है।
App Store नीतियों पर गंभीर आरोप
यह पूरा मामला 2021 में शुरू हुआ था, जब Match Group (Tinder की मालिक) और Alliance of Digital India Foundation (ADIF) ने Apple के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। आरोप था कि Apple अपने App Store में डेवलपर्स के साथ असमान व्यवहार करता है और प्रतिस्पर्धा को सीमित करता है।
2024 में जांच के बाद CCI ने शुरुआती निष्कर्ष में कहा कि Apple ने iPhone ऐप वितरण में अपनी मजबूत बाजार स्थिति का गलत इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट के अनुसार, डेवलपर्स को Apple के इन-ऐप पेमेंट सिस्टम का ही उपयोग करना पड़ता है और वे थर्ड-पार्टी पेमेंट विकल्प नहीं जोड़ सकते।
CCI ने App Store को “unavoidable trading partner” बताया, यानी ऐसा प्लेटफॉर्म जिसके बिना डेवलपर्स iPhone यूजर्स तक नहीं पहुंच सकते।
READ MORE: iPhone यूजर्स ध्यान दें, Apple ने App Store से हटाए ये ऐप्स
भारतीय स्टार्टअप्स की मांग
ADIF और अन्य स्टार्टअप समूहों ने CCI से अपील की है कि इस मामले में और देरी न की जाए। उनका कहना है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और ऐसे मामलों का जल्दी समाधान जरूरी है ताकि बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
भारत Apple के लिए क्यों अहम है
भारत Apple के लिए तेजी से बढ़ता हुआ बाजार बन चुका है। पांच साल पहले जहां iPhone की हिस्सेदारी लगभग 2% थी, अब यह बढ़कर करीब 9% तक पहुंच गई है। इसके साथ ही भारत Apple के लिए एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब भी बनता जा रहा है, क्योंकि कंपनी चीन पर निर्भरता कम कर रही है।
Google केस से तुलना
यह मामला Google के खिलाफ CCI की कार्रवाई जैसा भी माना जा रहा है। 2022 में Google पर 113 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया गया था, क्योंकि उसने अपने ऐप पेमेंट नियमों में बाजार शक्ति का गलत इस्तेमाल किया था।
READ MORE: App Store विवाद: Sam Altman ने मस्क को दिया करारा जवाब
Apple द्वारा भारत का वित्तीय डेटा CCI को देने का फैसला इस जांच में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे App Store की नीतियों और प्रतिस्पर्धा नियमों को लेकर अंतिम निर्णय जल्द आने की उम्मीद बढ़ गई है, जिसका असर भारत के पूरे डिजिटल बाजार पर पड़ सकता है।
