Taiwan vs India Stock Market: दुनिया की अर्थव्यवस्था अब तकनीक आधारित व्यवस्था में ढलती हुई दिखाई दे रही है। पहले जहां निवेशक बैंकिंग, उद्योग और तेल आदि पर निवेश करते थे। वहीं, निवेशक अब तकनीक पर निवेश करने करना बेहतर समझ रहे हैं। यह बदलाव विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने के बाद से दिखाई दे रही है। पूरी दुनियां की नजर अब इसी पर टिकी है। जिसमें एशिया के भारत और ताइवान दो बाजार महत्वपर्ण दिशा तय कर रही है।
एआई निवेश की वैश्विक दौड़ में ताइवान को बड़ा फायदा मिला है। जानिए क्यों भारत फिलहाल पीछे छूटता दिख रहा है और आगे क्या संभावनाएं हैं।
भारत से आगे निकला ताइवान
कुछ साल पहले तक भारत सबसे बढ़ता निवेश बाजार के तौर माना जाता था। इस बीच करोड़ों निवेशक शेयर बाजार के साथ जुड़ना मुनासिब समझा। विदेशी निवेशकों का भरोसा भी काफी मजबूत दिखाई दे रहा था। लेकिन अब समय के साथ यह स्वरूप बदलती हुई दिखाई दे रही है। अब ताइवान ने कुल शेयर बाजार मूल्य के मामले में पीछे छोड़ दिया है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों की मानें तो ताइवान का कुल स्टॉक मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 4.95 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं, भारत करीब 4.92 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया है। जबकि भारत का अर्थव्यवस्था ताइवान से कई गुना बड़ी है। फिर भी निवेशकों की नजर ताइवान पर है। क्योंकि AI से जुड़ी कंपनियां मजबूत स्थिति में हैं।
एआई ने क्यों बढ़ाई चिप कंपनियों की ताकत
दरअसल, AI की पूरी दुनिया सेमीकंडक्टर चिप्स पर टिकी हुई है। डेटा सेंटर, ऑटोमेशन और एआई मॉडल सभी को हाई-परफॉर्मेंस चिप्स की जरूरत होती है। चिप निर्माण मामले में ताइवान की पकड़ काफी मजबूत हो गई है। यही वजह है कि ताइवान निवेशकों की पहली पहली पसंद बन गई है। बता दें कि ताइवान की सबसे बड़ी ताकत है TSMC। यह दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माता कंपनी है। AI की बढ़ती मांग के बीच इस कंपनी के शेयरों में जबरदस्त उछाल आया। इसका सीधा असर पूरे ताइवानी शेयर बाजार पर पड़ा। यह Nvidia, Apple, AMD और Qualcomm जैसे दिग्गज कंपनियों के लिए चिप्स का निर्माण करती है।
ताइवान शेयर बाजार में टेक कंपनियों का दबदबा
दुनियांभर में एआई का दिन-प्रतिदिन बढ़ते प्रभाव के कारण टीएसएससी की कमाई और बाजार मूल्य भी तेजी से ऊपर गया। ताइवान के शेयर बाजार की खास बात यह है कि वहां टेक्नोलॉजी कंपनियों का दबदबा काफी बड़ा है। वैश्विक निवेशक इस समय उन्हीं देशों पर ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं जो एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और चिप निर्माण से जुड़े हुए हैं।
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भारत का बाजार किन सेक्टरों पर टिका है
दूसरी ओर भारत का शेयर बाजार अधिकतर बैंकिंग, उपभोक्ता खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू मांग पर आधारित है। भारत एआई हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर निर्माण में अभी शुरुआती चरण में है। भारत पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, कंपनियों की कमाई में सुस्ती, रुपये की कमजोरी और महंगे वैल्यूएशन ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क किया
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भविष्य में भारत के लिए क्या हैं संभावनाएं
जानकारों की मानें तो भारत की लंबी अवधि की विकास कहानी अभी भी मजबूत बनी हुई है। देश में डिजिटल इकोनॉमी बढ़ रही है। डेटा सेंटर सेमीकंडक्टर के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। लेकिन निवेशक वहां निवेश करना पसंद कर रहे हैं जहां से तुरंत फायदा हो। जिसका प्रभाव भारत के बाजारों पर पड़ा है।
आने वाले वर्षों में अगर भारत मजबूत सेमीकंडक्टर तंत्र को तैयार कर लेता है और एआई आधारित वैश्विक कंपनियां खड़ी करता है, तो यह मुकाबला बड़ा दिलचस्प हो सकता है।
