AI accelerator: दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव लगातार बढता जा रहा है। टेक कंपनियों के बीच इसे अपनाने की होड़ मची हुई है। हर तरफ इसके खूबियां की चर्चाएं हो रही है। लेकिन इसके साथ एक बड़ी समस्या भी सामने आ रही है। वो है भारी मात्रा में बिजली की खपत। अधिक गर्मी। क्योंकि एआई सर्वर और डेटा सेंटर में बड़े पैमाने पर ऊर्जा की खपत हो रही है। इससे उत्पन्न होनेवाली गर्मी चिंता का विषय बना हुआ है। इसे ठंडा रखने के लिए अरबों रूपए खर्च किए जा रहे हैं। इसी चुनौती को देखते हुए University of Tokyo के वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है जो भविष्य के कंप्यूटर और स्मार्टफोन की तस्वीर बदल सकती है।
नई चुंबकीय स्वीच तकनीक एआई हार्डवेयर की दुनिया में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे कम गर्मी पैदा करते हुए हाई-स्पीड प्रोसेसिंग करेगा।
वर्तमान चिप्स से अलग है यह तकनीक
कहा यह जा रहा है कि अधिकांश प्रोसेसर सिलिकॉन आधारित होते हैं। इसका जब डेट प्रोसेसिंग के दौरान इस्तेमाल किया जाता है तो काफी गर्मी पैदा होती है। इन समस्याओं को देखते हुए जापानी वैज्ञानिकों ने एक ऐसा स्पिन्ट्रॉनिक डिवाइस तैयार किया है। जो इलेक्ट्रॉन्स को तो चार्ज करता हीं है। लेकिन उसके स्पिन का भी उपयोग करता है। जिसके कारण यह तकनीक कम ऊर्जा में कहीं ज्यादा तेजी से काम कर सकती है।
पलक झपकने से भी तेज़ डेटा प्रोसेसिंग
रफ्तार की तो बात ही जुदा है। इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी अविश्वसनीय गति है। रिसर्चर का कहना है कि यह डिवाइस वर्तमान में आए एक्सीलरेटर की तुलना में लगभग 1000 गुना तेज़ मैग्नेटिक स्विचिंग कर सकता है। जहां सामान्य प्रोसेसर नैनोसेकंड स्तर पर काम करते हैं। वहीं यह नई प्रणाली पिकोसेकंड में प्रतिक्रिया देती है। एक पिकोसेकंड, एक सेकंड का एक ट्रिलियनवां हिस्सा होता है। अब इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि इसकी काम करने की रफ्तार कितनी हो सकती है।
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गर्मी कम, बैटरी लाइफ ज्यादा
एआई के आने के बाद बिजली खपत बढ़ गई है। क्योंकि एआई आधारित डिवाइस स्मार्टफोन, लैपटॉप और क्लाउड सर्वर में लगातार बिजली की खपत हो रही है। तेज प्रोसेसिंग के कारण बैटरी अधिक खत्म हो रही है। चलते- चलते मशीनें गर्म हो रही है। लेकिन नई तकनीक में प्रतिरोधी गर्मी कम पैदा होती है। जिससे भविष्य में ऐसे डिवाइस बन सकते हैं जो कम चार्ज में ज्यादा समय तक काम करें। इस रिसर्च में वैज्ञानिकों की माने तो मैंगनीज और टिन के विशेष मिश्रण Mn3Sn का उपयोग किया। शोध टीम ने 40-पिकोसेकंड का इलेक्ट्रिकल पल्स भेजकर इसकी मैग्नेटिक स्टेट को सफलतापूर्वक बदला और वह भी बहुत कम ऊर्जा खर्च करके।
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क्वांटम कंप्यूटिंग को मिल सकती है नई रफ्तार
शोध से जुड़े प्रोफेसर Tomo Nakatsuji ने कहा कि भविष्य में ऐसा संभव हो सकता है कि जो डेटा आज डाउनलोड होने में एक घंटा लेता है, उसे केवल एक सेकंड में प्रोसेस किया जा सके। हालांकि, वैज्ञानिकों स्पष्ट किया है कि सिर्फ मैग्नेटिक स्विचिंग स्पीड बढ़ने का मतलब यह नहीं कि पूरा कंप्यूटर 1000 गुना तेज़ हो जाएगा। किसी भी कंप्यूटर की वास्तविक क्षमता हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, मेमोरी और डेटा ट्रांसफर आदि पर भी निर्भर करता है।
