Energy Independence India: DME (Dimethyl Ether) एक सिंथेटिक फ्यूल है, जो देखने और इस्तेमाल करने में LPG जैसा ही होता है। इसे लिक्विड फॉर्म में स्टोर किया जा सकता है और बाद में गैस की तरह किचन में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एक ‘फ्यूचर-रेडी’ क्लीन फ्यूल है क्योंकि यह कम प्रदूषण पैदा करता है और पर्यावरण के लिए सुरक्षित माना जाता है।
DME एक साफ और नया फ्यूल है, जो LPG की तरह काम करता है और कचरे व पराली से बनकर पर्यावरण को फायदा पहुंचाता है।
DME कैसे बनता है?
DME की सबसे खास बात यह है कि इसे कचरे, कृषि अवशेष, बायोमास और इंडस्ट्रियल उत्सर्जन से तैयार किया जा सकता है। इसका मतलब है कि जो चीजें आमतौर पर बेकार मानी जाती हैं, उनसे एक उपयोगी और साफ ईंधन बनाया जा सकता है। इससे कचरे की समस्या भी कम होती है और ऊर्जा उत्पादन भी होता है।
LPG की जगह DME क्यों बन सकता है बेहतर विकल्प?
DME का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मौजूदा LPG सिस्टम के साथ आसानी से काम कर सकता है। यानी इसके लिए घरों में गैस स्टोव, पाइपलाइन या सिलेंडर बदलने की जरूरत नहीं होगी। लोग इसे उसी तरह इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे अभी LPG का उपयोग करते हैं। परफॉर्मेंस के मामले में भी DME लगभग LPG जैसा ही है, इसलिए यूजर्स को ज्यादा फर्क महसूस नहीं होगा।
पर्यावरण के लिए क्यों है बेहतर?
DME को LPG के मुकाबले ज्यादा साफ ईंधन माना जाता है। यह जलने पर बहुत कम कालिख और जहरीला धुआं छोड़ता है। इससे किचन साफ रहता है और हवा में प्रदूषण भी कम होता है। बर्तन भी ज्यादा साफ रहते हैं क्योंकि उन पर काली परत नहीं जमती। साथ ही, यह कचरे और पराली से बनने के कारण पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करता है।
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भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत अभी LPG के लिए बड़े पैमाने पर इंपोर्ट पर निर्भर है। इससे कीमतें और सप्लाई दोनों पर असर पड़ता है। DME को देश में ही कोयला, बायोमास और अन्य संसाधनों से बनाया जा सकता है। इससे आयात कम होगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। यह भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकता है।
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धीरे-धीरे अपनाने की योजना
विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में DME को LPG के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। मौजूदा सिलेंडर में लगभग 20% तक DME ब्लेंड किया जा सकता है और इसके लिए किसी भी उपकरण में बदलाव की जरूरत नहीं होगी। इससे लोग बिना किसी परेशानी के धीरे-धीरे इस नए फ्यूल को अपना सकते हैं।
