Anthropic Mythos White House AI

व्हाइट हाउस में AI की एंट्री: Mythos ने तोड़ा विरोध का घेरा

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April 20, 2026

Anthropic Mythos White House AI: कुछ हप्ते पहले तक जो कंपनी अमेरिकी सरकार की नजर में खतरनाक मानी जा रही थी। वहीं, अब सत्ता के सबसे महत्वपूर्ण चर्चा का केंद्र बन गई है। एआई कंपनी Anthropic का व्हाइट हाउस में प्रवेश तकनीक और राजनीति के बदलते समीकरण का नतीजा है।

Anthropic के Mythos AI ने साइबर सुरक्षा में बड़ा बदलाव लाया है, जिसके कारण व्हाइट हाउस तक कंपनी की पहुंच बन गई है।

चुपचाप हुई मुलाकात से अचनाक बदलाव

कंपनी के सीईओ Dario Amodei ने वेस्ट विंग में चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स और ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट से मुलाकात की है। व्हाइट हाउस ने बातचीत को प्रोडक्टिव और कंस्ट्रक्टिव कहा। एंथ्रोपिक ने भी यही कहा बता दें की हालही में ट्रंप प्रशासन ने Anthropic को सप्लाई चेन के लिए खतरा बताया था और सरकारी कामकाज से दूर रखने की बात कही थी। लेकिन एक फेडरल कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह रूख नरम पड़ा है। अदालत ने गैर –सैन्य एजेंसियों के साथ कंपनी के काम करने का रास्ता खुला रखा है।

इस बदलाव का कारण Mythos

इस पूरे बदलाव के पीछे का सबसे बड़ा कारण Mythos को बताया जा रहा है। क्योंकि यह साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक ताकतवर टूल् के रूप में उभरा है। सरकारी एजेंसिया अब इसे ऐसे काम करते देख रहे हैं जो इससे पहले अन्य तकनीक में संभव नहीं थे। इसकी एडवांस रीजनिंग क्षमता ने खतरनाक कमजोरियों को खोजने में माहिर बना दिया है। टेस्टिंग के दौरान ही इसने हजारों गंभीर बग्स खोज निकाले। यहां तक दशकों पुरान सॉप्टवेयर खामियों को भी पकड़ लिया।

सीमित दायरें में रखने का फैसला

इस ताकतवर तकनीक आम जनता के बीच रिलीज करने के बजाय सीमित दायरे में खपने फैसला लिया है। प्रोजेक्ट ग्लासविग के तहत इसे कुछ गिनेचुने कंपनियों और संगठनों को दिया गया है। जिसमें AWS, Apple, Google, Microsoft, Nvidia जैसे कंपनियां शामिल हैं। इस मॉडल का इस्तेमाल अटैकिंग तरीके से, कंट्रोल्ड तरीके से किया जा रहा है: किसी और के पता लगाने से पहले कमज़ोरियों का पता लगाना।

सरकारी एजेंसियों की बढी इच्छा

अमेरिकी सरकार भी इस पहल को काफी करीब से देख रही है। मीडिया रिपोर्ट की माने तो  इंटेलिजेंस एजेंसियां ​​और साइबर सिक्योरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी पहले से ही Mythos की टेस्टिंग कर रही हैं। ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है। ट्रेजरी और दूसरी सरकारी एजेंसियों ने ग्लासविंग लिस्ट में शामिल होने में दिलचस्पी दिखाई है।

डबल एज तकनीक की चुनौती

Axios की एक अलग रिपोर्ट में, एक चिंता यह जताई गई है कि Mythos और दूसरे लेटेस्ट एआई टूल्स हैकर्स को यूएस  फाइनेंशियल सिस्टम में सेंध लगाने की इजाज़त दे सकते हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियां और सरकारी एजेंसियां ​​गलत लोगों के पहुंचने से पहले अपने साइबर डिफेंस को मजबूत करने के लिए मिथोस का इस्तेमाल कर सकती हैं। यह डुअल-यूज टेंशन अब सीधे तौर पर एक पॉलिटिकल प्रॉब्लम बन गई है।

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सरकार के भीतर भी मतभेद

इस मुद्दे पर सरकार के भीतर भी मतभेद दिख रही है। जहां सिविल एजेंसियां इसे अपनाने के पक्ष में हैं तो वहीं रक्षा विभाग अब भी सतर्क है। लेकिन गजब की बात यह है कि रक्षा विभाग अन्य कार्यों में एंथ्रोपिक के एआई मॉडल का इस्तेमाल कर रही है। कहा यह जा रहा है कि यह जिम्मेदारी सूसी को इसलिए सौंपा गया ताकि वह डारियो की बात सुन सके,। यह पता लगा सके कि क्या बकवास है और आगे का रास्ता बनाना शुरू कर सके। वहीं, DOD ने मिथोस पर कोई कमेंट नहीं किया है, लेकिन ईरान के साथ युद्ध में एंथ्रोपिक के क्लाउड मॉडल्स का इस्तेमाल करना जारी रखा है।

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राजनीति रणनीति भी तेज

एंथ्रोपिक ने भी राजनीतिक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के संकेत दिए हैं। कंपनी ने हाल ही में एक प्रमुक लॉबिंग फर्म को नियुक्त किया है। जो सरकारी ठेकों और नीतियों को प्रभावित करने में मदद करेगी। हालांकि आगे का रास्ता अभी साफ नहीं दिखाई दे रही है। कोर्ट में मामले चल रहे हैं। रक्षा विभाग का भी रूख सख्त बना हुआ है। लेकिन व्हाइट हाउस स्तर पर बातचीत जारी है।

Rahul Ray

मैं एनेलिटिक्स इनसाइट के लिए टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिप्टोकरेंसी, साइबर सिक्योरिटी, गैजेट्स, मोबाइल ऐप्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म को कवर करता हूं। मुझे
मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। हिन्द पोस्ट हिन्दी मैगज़ीन, ईटीवी भारत और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य करते हुए प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाई है। दिल्ली और बिहार के विभिन्न जिलों में न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड स्टोरीज़, कंटेंट प्लानिंग, कॉपी एडिटिंग एवं कंटेंट एडिटिंग से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभालने का अनुभव है। मैंने भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार से डिग्री प्राप्त की है। पाठक केंद्रित कंटेंट तैयार करना मेरी कार्यशैली में शामिल रही है।

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