India AI funding growth: भारत का Artificial Intelligence सेक्टर 2025 में ग्रोथ के मामले में काफी अच्छा रहा है। फंडिंग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। लेकिन हैरान करनेवाली बात यह है कि स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से नहीं बढ़ी। निवेशकों ने कुछ गिनेचुने कंपनियों पर ज्यादा भरोसा दिखाते हुए बड़े निवेश किए।
भारत में डेटा तो ज्यादा है लेकिन स्टोरेज कम, AI इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर नए निवेश की शुरुआत।
छोटी संख्या बड़े निवेश की नीति
एक रिपोर्ट की माने तो 2025 में AI Startups में निवेश 277 प्रतिशत बढ़कर करीब 2.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं 2024 में यह आंकड़ा सिर्फ 0.9 अरब डॉलर था। औसत डील साइज भी 2.6 गुना बढ़कर 15 मिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया। यह स्थिति बता रही है कि निवेशक अब शुरुआती प्रयोगों से आगे बढ़कर पक्के बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों पर निवेश करना मुनासिब समझ रहे हैं।
डील्स बढ़ीं लेकिन रफ्तार धीमी
हालांकि कुल डील्स की संख्या में केवल मामूली बढ़ोतरी हुई। जो करीब 3 प्रतिशत तक रही। इन आंकड़ों से साफ है कि बाजार में नए स्टार्टअप्स की बाढ़ नहीं आई है। पहले से मौजूद कंपनियों को ही ज्यादा फंडिंग मिल रही है। भारत का AI की बात करें तो यह अमेरिका से काफी अलग दिशा में आगे बढ़ रहा है। जहां अमेरिका में निवेश बड़े AI मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित है। वहीं भारत में एप्लिकेशन-लेयर स्टार्टअप्स पर ध्यान दिया जा रहा है। जैसे एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर, फिनटेक, हेल्थकेयर और लॉजिस्टिक्स आदि।
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कम लागत में जल्दी मुनाफा का फॉर्मूला
भारत में लगभग 80 प्रतिशत निवेश ऐसे स्टार्टअप्स में जा रहा है जो सीधे ग्राहकों के लिए समाधान तैयार करते हैं। इन कंपनियों को बड़े Data Center या भारी कंप्यूटिंग की जरूरत नहीं होती। इससे जल्द आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं और निवेशकों के लिए खतरा भी कम बनाती है। इसके इतर फाउंडेशन AI और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश अभी भी सीमित है। करीब 10 प्रतिशत के आसपास है। इसकी एक बड़ी वजह देश में बड़े स्तर के कंप्यूटिंग संसाधनों और लेट-स्टेज फंडिंग की कमी मानी जा रही है।
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OpenAI –Google जैसी कंपनियां दे रही विस्तार
भारत का AI स्टार्टअप अभी भी शुरुआती चरण में है। करीब 71 प्रतिशत स्टार्टअप्स सीड स्टेज पर हैं। वहीं बहुत कम कंपनियां है जो Series C या उससे आगे पहुंच पाई हैं। पूंजी की कमी अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। भारत तेजी से AI टेक्नोलॉजी का बड़ा उपभोक्ता बाजार बनता जा रहा है। एआई का डिमांड लगातार बढ़ता जा रहा है। OpenAI और Google जैसी कंपनियां भारत में अपने विस्तार को प्राथमिकता दे रही हैं।
डेटा बहुत, स्टोरेज कम और निवेश की होड़
भारत दुनिया के करीब 20 प्रतिशत डेटा का उत्पादन करता है, लेकिन ग्लोबल डेटा स्टोरेज क्षमता में उसकी हिस्सेदारी 3 प्रतिशत से भी कम है। यही कारण है कि देश में नए डेटा सेंटर बनाने की होड़ शुरू हो गई है, जिसमें ग्लोबल कंपनियों के साथ-साथ भारतीय समूह भी निवेश कर रहे हैं। बेंगलुरू अब भी भारत का सबसे बड़ा AI हब बना हुआ है, जहां पिछले एक दशक में 4 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश हुआ है।
इस साफ है कि भारत एआई यूजर का हब बनता जा रहा है जिससे भारत न सिर्फ AI का बड़ा बाजार बनेगा बल्कि इनोवेशन का भी केंद्र बन सकता है।
