India censorship on X: भारत ने चर्चित Social Media प्लेटफॉर्म X पर एकबार फिर कई अकाउंट्स को रोक दिया गया है। इनमें पैरोडी अकाउंट्स भी हैं। कुछ एक्टिविस्ट और आलोचक भी इसकी पाबंदी में आए हैं। हलांकि X ने इसके पीछे कानूनी मांग का कारण बताया है। इसके बाद अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस तेज हो गई है। तो आइए जानते हैं क्या पूरा मामला।
X पर किन अकाउंट्स को भारत में किया गया ब्लॉक और क्यों मचा बवाल? आखिर क्यों सरकार को उठाना पड़ा यह बड़ा कदम…जानिए विस्तार से।
सरकारी निगरानी के बीच बढ़ी संवेदनशीलता
बता दें कि यह मामला ऐसे वक्त में सामने आया है, जब ऑनलाइन कंटेंट पर सरकारी निगरानी पहले से चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट की माने तो आईटी मंत्रालय कंटेंट हटाने की शक्तियों का दायरा बढ़ सकता है। इसी बीच X पर कार्रवाई हो गई है। जिससे यह मामला और ज्यादा संवेदनशील बन गई है। लोग इसे सिर्फ तकनीकी कदम नहीं मान रहे। इसे डिजिटल स्पेस पर बढ़ते दबाव से जोड़कर देख रहे है।
व्यंग्य और आलोचना वाले खाते निशाने पर
रोक लगाए गए अकाउंट्स में कई जानेमाने नाम शामिल हैं। इनमें से कुछ अकाउंट्स राजनीतिक व्यंग्य के लिए जाने जाते थे। मनीष आरजे का भी नाम शामिल है। कुछ अकाउंट्स सरकार और व्यवस्था पर आलोचना के लिए जाने जाते थे। यही वजह है कि यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। सवाल यह है कि क्या व्यंग्य और आलोचना भी अब खतरा से खाली नहीं में हैं।
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नोटिस में नहीं मिल रही पूरी जानकारी
वहीं, बात करें नोटिस की तो इसमें पूरी जानकारी साफ-साफ नहीं मिलने की बात सामने आ रही है। कहा यह जा रहा है कि जब यूजर्स इन अकाउंट्स को खोलने की कोशिश करते हैं, तो एक सामान्य नोटिस दिखता है। उसमें लिखा आता है कि अकाउंट भारत में कानूनी मांग के जवाब में रोका गया है। लेकिन इससे पूरी तस्वीर साफ नहीं होती। न आदेश का विवरण दिखता है। न यह बताया जाता है कि आपत्ति किस बात पर है। जिससे संशय की स्थिति बनी हुई है।
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धारा 69A पर फिर उठे सवाल
कार्रवाई IT Act की धारा 69A के तहत होने की बात कही जा रही है। यह धारा सरकार को कुछ परिस्थितियों में कंटेंट ब्लॉक करने की शक्ति देती है। इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे आधार होते हैं। लेकिन विवाद तब बढ़ता है, जब ऐसे प्रावधान आलोचनात्मक या व्यंग्यात्मक कंटेंट तक पहुंच जाते हैं। कई संगठनों ने भी इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि बढ़ती रोक चिंता की बात है। खासकर तब, जब कारण साफ न बताया जाए।
IFF ने भी उठाए सवाल
Internet freedom foundation ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताया है। संगठन का कहना है कि Facebook, X और इंस्टाग्राम पर ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं। इनमें व्यंग्य, आलोचना और राजनीतिक टिप्पणी प्रभावित हो रही है। विपक्षी नेताओं और कई यूजर्स ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में व्यंग्य और आलोचना की जगह होनी चाहिए।
सरकार के इस कार्रवाई से यह सवाल उठने लगा है कि क्या सोशल मीडिया मंच खुला रहेगा। या फिर उस पर नियंत्रण और बढ़ेगा?
