Anthropic CEO statement: अमेरिका में Artificial Intelligence को लेकर एक बड़ा नैतिक और राजनीतिक टकराव सामने आया है। AI स्टार्टअप Anthropic ने सरकार को साफ कह दिया है कि वह किसी दबाव या धमकी के आगे झुककर अपनी तकनीक को बिना शर्त अमेरिकी रक्षा तंत्र के हवाले नहीं करेगा। कंपनी के सीईओ Dario Amodei का बयान अब टेक इंडस्ट्री और वॉशिंगटन दोनों में चर्चा का केंद्र बन गया है।
पेंटागन और एंथ्रोपिक के बीच बढ़ते तनाव ने AI के सैन्य इस्तेमाल पर नई बहस छेड़ दी है। जानिए क्यों CEO ने धमकियों को ठुकराया।
अंतरात्मा बनाम आदेश
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वॉशिंगटन की ओर से कंपनी को अल्टीमेटम दिया गया था कि वह तय समयसीमा तक अमेरिकी डिफेंस के लिए अपनी तकनीक के इस्तेमाल पर बिना शर्त सहमति दे। लेकिन Amodei ने सार्वजनिक रूप से कहा कि किसी भी तरह की धमकी उनके फैसले को प्रभावित नहीं कर सकती।
रेड लाइन कहाँ खींची गई?
अमोदेई ने स्पष्ट किया कि National Security के दायरे में सीमित और जिम्मेदार उपयोग एक बात है। लेकिन नागरिकों की बड़े पैमाने पर निगरानी या पूरी तरह स्वायत्त घातक हथियारों में AI का इस्तेमाल दूसरी बात। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि टेक कंपनियों की भी जिम्मेदारी है कि वे यह तय करें कि उनकी तकनीक कहाँ और किस सीमा तक इस्तेमाल होगी।
READ MORE– अब चैट में दिखेगी आपकी लाइव लोकेशन! Google Messages में नया फीचर
भरोसे का सवाल
उनका कहना है कि AI मॉडल अभी इतने परिपक्व नहीं हैं कि घातक सिस्टम में लगाया जा सके। अमोदेई का मानना है कि जल्दबाजी में ऐसे निर्णय भविष्य में गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसले न सिर्फ आम नागरिकों के लिए, बल्कि खुद रक्षा तंत्र के लिए भी खतरा है।
पेंटागन का सख्त रुख
इस हफ्ते की शुरुआत में Pentagon मुख्यालय में हुई बैठक के बाद रक्षा विभाग ने कंपनी को तय समय शुक्रवार शाम 5:01 बजे तक जवाब देने का निर्देश दिया। चेतावनी दी गई कि अगर कंपनी ने सहयोग नहीं किया तो Defense Production Act के तहत कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि कानून सरकार को राष्ट्रीय आपात स्थितियों में निजी कंपनियों से सहयोग लेने का अधिकार देता है।
READ MORE– यूरोप में Tesla की मुश्किलें बढ़ीं, BYD ने पकड़ ली रफ्तार
सप्लाई चेन रिस्क की धमकी
रिपोर्ट्स की माने तो पेंटागन ने सप्लाई चेन रिस्क का टैग लगाने की भी बात कही है। जो आम तौर पर प्रतिद्वंद्वी देशों की फर्मों के लिए इस्तेमाल होता है। ऐसा लेबल लगने पर अमेरिकी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स और प्रतिष्ठा पर गहरा असर पड़ सकता है। एक ओर जहां AI को सामरिक रक्षा ढांचे में शामिल करने की योजना पर गंभीर विचार चल रही तो वहीं कंपनी की नैतिक चिंताएँ और बढ़ गई हैं।
प्रतिस्पर्धा का दबाव
इसी बीच, Elon Musk के AI सिस्टम को क्लासिफाइड उपयोग की मंजूरी मिल चुकी है और OpenAI और Google जैसी कंपनियों को भी समान क्लियरेंस मिलने की संभावना जताई गई है। Anthropic का रुख फिलहाल साफ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरी है, लेकिन लोकतांत्रिक सिद्धांतों और मानव नियंत्रण की कीमत पर नहीं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नैतिक रुख अपनाने वाली कंपनियां सरकारी अनुबंधों की दौड़ में पीछे रह जाएंगी?
