Space Computing: अंतरिक्ष में Data Center स्थापित करने की होड़ के बीच Sophia Space ने 10 मिलियन डॉलर की सीड फंडिंग जुटाने की बात सामने आ रही है। जिसका उद्देश्य है ऐसा स्पेस कंप्यूटर तैयार करना जो बिना भारी कूलिंग सिस्टम के भी प्रभावी ढंग से काम कर सके। जैसे-जैसे एआई और हाई-परफॉर्मेंस चिप्स को कक्षा में भेजने की तैयारी हो रही है। ऐसे में कूलिंग सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती बनकर आ रही है। इसी को मद्देनजर रखते हुए कंपनी ने यह कदम उठाया है।
Sophia Space ने 10 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाकर अंतरिक्ष में पैसिव कूलिंग वाले डेटा सेंटर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। जानिए क्या है इसकी खास तकनीक।
स्पेस में ठंड, लेकिन गर्मी दूर करना मुश्किल
कुछ दिन पहले ही अर्निंग कॉल में Jensen Huang ने कहा था कि अंतरिक्ष ठंडा जरूर है, लेकिन वहां हवा का प्रवाह नहीं होता, इसलिए गर्मी केवल कंडक्शन से ही बाहर निकल सकती है। यही वजह है कि धरती पर इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक कूलिंग तकनीकें अंतरिक्ष में कारगर नहीं हैं। ऐसे में Sophia Space का यह कदम काफी महत्वपूर्ण हो जाने जा रही है।
चल रही है ऑर्बिट टेस्ट की तैयारी
Alpha Funds, KDDI Green Partners Fund और Unlock Venture Partners जैसे निवेशकों के सहयोग से कंपनी पहले जमीन पर अपनी पैसिव कूलिंग तकनीक को साबित करेगी। इसके बाद Apex Space से सैटेलाइट बस लेकर 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक इसे कक्षा में परीक्षण करने की योजना पर काम कर रही है।
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वर्तमान सोच से अलग मॉडल
जहां SpaceX, Google और Starcloud बड़े रेडिएटर आधारित डिजाइन पर विचार कर रहे हैं। वहीं Sophia Space ने पतली और लचीली संरचना अपनाई है। यह अवधारणा California Institute of Technology के 100 मिलियन डॉलर के सोलर पावर प्रोजेक्ट से प्रेरित है। कैलटेक द्वारा संचालित Jet Propulsion Laboratory से जुड़े विशेषज्ञों ने इसी डिजाइन को स्पेस कंप्यूटिंग के लिए उपयुक्त माना। इसी दिशा में Aetherflux भी काम कर रही है।
क्या है TILES मॉड्यूलर सर्वर रैक
Nvidia की पार्टनर Sophia Space ने TILES नामक मॉड्यूलर सर्वर रैक विकसित किए हैं। 1 मीटर × 1 मीटर के ये पैनल सोलर एनर्जी से संचालित होते हैं। कुछ सेंटीमीटर मोटे हैं। प्रोसेसर सीधे पैसिव हीट स्प्रेडर से जुड़े रहते हैं, जिससे एक्टिव कूलिंग की जरूरत खत्म हो जाती है। कंपनी का दावा है कि उत्पन्न ऊर्जा का करीब 92 प्रतिशत हिस्सा कंप्यूटिंग में उपयोग हो सकेगा, बशर्ते एक उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम लोड संतुलन बनाए रखे।
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2030 का विजन और बाजार
Sophia की योजना 2030 के दशक तक हजारों TILES को जोड़कर 50 मीटर × 50 मीटर का ढांचा तैयार करने की है। जो 1 मेगावाट कंप्यूटिंग पावर देगा। जिनमें United States Department of Defense भारी निवेश कर रहा है और उन्नत कम्युनिकेशन नेटवर्क को उपलब्ध कराना चाहती है।
Sophia Space दावा डेटा की बर्बादी रुकेगी
दरअसल, कक्षा में मौजूद सेंसर हर कुछ मिनट में विशाल डेटा तैयार करते हैं, लेकिन ऑनबोर्ड प्रोसेसिंग की कमी से अधिकांश डेटा नष्ट हो जाता है। Sophia Space का मानना है कि अगर कंप्यूटिंग सीधे अंतरिक्ष में हो सके, तो डेटा की बर्बादी रुकेगी और रियल-टाइम निर्णय संभव होंगे।
