भारत में SIM-Binding लाने को WhatsApp ने मांगा समय

भारत में SIM-Binding लाने को WhatsApp ने मांगा समय

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April 30, 2026

WhatsApp SIM Binding: भारत में बढ़ते साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए अब सरकार और टेक कंपनियां मिलकर बड़ा कदम उठा रही हैं। WhatsApp ने SIM-बाइंडिंग लागू करने पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। यह जानकारी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने 30 मार्च को SC में दी गई अपनी रिपोर्ट में साझा की। सरकार चाहती है कि कॉलिंग और मैसेजिंग ऐप्स को ज्यादा सुरक्षित बनाया जाए, ताकि डिजिटल फ्रॉड को रोका जा सके।

SIM-बाइंडिंग क्या है?

SIM-बाइंडिंग का मतलब है कि आपका ऐप अकाउंट उसी वेरिफाइड SIM कार्ड से जुड़ा रहेगा, जिससे वह नंबर रजिस्टर किया गया है। मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति बार-बार नंबर, फोन या लॉगिन बदलता है, तो उसके लिए उसी अकाउंट का गलत इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा। इससे ठगों की चाल पर काफी हद तक रोक लग सकती है।

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सरकार क्यों ला रही है यह नियम?

दूरसंचार विभाग ने 2025 को एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें VoIP आधारित ऐप्स जैसे WhatsApp, Telegram, Signal और Arattai को SIM-बाइंडिंग लागू करने को कहा गया था। सरकार की चिंता यह है कि अपराधी बार-बार नए नंबर और अकाउंट बनाकर फ्रॉड करते रहते हैं। SIM-बाइंडिंग इस चक्र को धीमा करने में मदद करेगी।

मामला चर्चा में क्यों आया?

यह मुद्दा तब सुर्खियों में आया जब हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपति ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर बताया कि वे ‘डिजिटल अरेस्ट स्कैम’ का शिकार हो गए। इस स्कैम में अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और डराकर पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। दंपति ने 1.05 करोड़ रुपये गंवा दिए। गृह मंत्रालय के अनुसार, 2024 में भारत में ऐसे स्कैम से 1,935 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो पिछले साल से 471% ज्यादा है।

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WhatsApp का क्या कहना है?

12 मार्च को इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी के सामने WhatsApp ने बताया कि SIM-बाइंडिंग पर काम चल रहा है। इसमें तकनीकी इंटीग्रेशन और टेस्टिंग शामिल है। कंपनी का कहना है कि इसे पूरी तरह लागू करने में करीब 4 से 6 महीने लग सकते हैं, ताकि आम यूजर्स को कोई परेशानी न हो।

यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?

आम यूजर्स के लिए यह बदलाव फायदेमंद होगा। इससे उनकी सुरक्षा बढ़ेगी और फ्रॉड का खतरा कम होगा। WhatsApp पहले से ही संदिग्ध डिवाइस को पहचानने और ब्लॉक करने पर काम कर रहा है। साथ ही, कंपनी जरूरत के अनुसार सरकार के साथ जरूरी जानकारी साझा करेगी, लेकिन यूजर्स की प्राइवेसी का भी ध्यान रखा जाएगा।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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