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देसी सुपरकम्प्यूटर से बदलेगा भारत का भविष्य!

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December 13, 2025

India Supercomputer 2030: भारत में टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। अब सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत का बिल्कुल देसी सुपरकम्प्यूटर तैयार हो जाए। यह जानकारी सुपरकम्प्यूटिंग इंडिया सम्मेलन 2025 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के हेड अमितेश कुमार सिन्हा ने दी है। उन्होंने बताया कि 2030 में हमारा पूरा सुपरकम्प्यूटर सिस्टम भारत में ही बना होगा और 2032 से ये सुपरकम्प्यूटर बाजार में भी मिलना शुरू हो जाएंगे।

भारत 2030 तक अपना पूरी तरह देसी सुपरकम्प्यूटर बनाने की तैयारी में है। सरकार के मुताबिक, इससे मौसम, दवाइयों, रक्षा और टेक्नोलॉजी के कई क्षेत्रों में बड़ा फायदा मिलेगा।

अभी के सुपरकम्प्यूटर में भी भारत की बड़ी हिस्सेदारी

अमितेश सिन्हा के अनुसार, आज भारत में इस्तेमाल होने वाले सुपरकम्प्यूटरों में 50% से ज्यादा पार्ट्स भारत में ही बनते हैं। आने वाले सालों में यह हिस्सा बढ़कर 70% से भी ज्यादा हो जाएगा। सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट बनाने के लिए नई योजना शुरू की है। ISM के तहत भारत में चिप बनाने, पैकिंग और बड़ी फैक्ट्रियां लगाने के करीब 10 बड़े प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं। इन सभी प्रोजेक्ट्स की मदद से भारत भविष्य में पूरी तरह अपना सुपरकम्प्यूटर खुद डिजाइन और तैयार कर सकेगा।

किस-किस सेक्टर को मिलेगी सबसे ज्यादा मदद?

जब भारत का अपना सुपरकम्प्यूटर तैयार हो जाएगा, तब इसके फायदे कई क्षेत्रों में देखने को मिलेंगे

  • मौसम की सटीक भविष्यवाणी आसान होगी
  • नई दवाइयां और वैक्सीन तेजी से बनाई जा सकेंगी
  • मिसाइल और लड़ाकू विमान जैसे हथियार और भी सुरक्षित और तेज बन सकेंगे
  • बिजली, पानी और ट्रैफिक की प्लानिंग बेहतर तरीके से की जा सकेगी
  • देश में हाई-टेक नौकरियों के नए मौके तैयार होंगे
  • भारत पूरी तरह टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेगा

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AI और चिप टेक्नोलॉजी पर भी जोर

सरकार सुपरकम्प्यूटिंग के साथ-साथ AI चिप और सुपरकम्प्यूटिंग चिप बनाने पर भी काम कर रही है। रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए कॉलेजों और स्टार्टअप्स को 38,000 से ज्यादा GPU दिए गए हैं। ISM प्रमुख ने बताया कि भारत में सेमीकंडक्टर, क्वांटम और AI टेक्नोलॉजी एक-दूसरे की मदद से आगे बढ़ना चाहती हैं।

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भारत तकनीक को दुनिया के साथ साझा करने के लिए भी तैयार है, ताकि सभी देशों को इससे फायदा मिल सके। अमितेश सिन्हा ने कहा कि पिछले 10 सालों में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने की क्षमता 6 गुना बढ़ चुकी है और आने वाले सालों में यह और भी तेज गति से बढ़ने वाली है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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क्रिप्टो बाजार में बड़ा फेरबदल, मजबूत कंपनियां होंगी आगे

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क्रिप्टो इंडस्ट्री तेजी से बदल रही, बड़े प्लेटफॉर्म लगातार मजबूत हो रहे हैं, जबकि कई छोटे प्रोजेक्ट्स और एक्सचेंज बंद होने या विलय की राह पर हैं।  Crypto Consolidation: क्या Crypto Market अब सिर्फ बड़े खिलाड़ियों तक सिमटता जा रहा है? आज सामने आई नई रिपोर्ट यही संकेत दे रही है। निवेशक अब सिर्फ उन प्रोजेक्ट्स में पैसा लगा रहे हैं, जो मजबूत कमाई और टिकाऊ कारोबार दिखा रहे हैं। इसका असर यह है कि कई छोटे क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स और एक्सचेंज अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।  Crypto Market में कुछ प्रोजेक्ट्स का बढ़ा दबदबा ARK Invest के रिसर्च एनालिस्ट लोरेन्जो वैलेंटे के मुताबिक, बाजार में पूंजी का बड़ा हिस्सा अब चुनिंदा प्लेटफॉर्म तक सीमित हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार Hyperliquid और Pump.fun मिलकर पूरे क्रिप्टो एप्लिकेशन सेक्टर की करीब 67% आय पर कब्जा किए हुए हैं। वहीं Ethena को जोड़ने पर शीर्ष 3 प्रोजेक्ट्स की हिस्सेदारी लगभग 80% तक पहुंच जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अब सिर्फ उन्हीं प्लेटफॉर्म को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत है और जो लगातार कमाई कर रहे हैं।  https://x.com/LorenzoARK/status/2082153304574791868?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2082153304574791868%7Ctwgr%5Ed5e22289d325c68fc759eccbe6bda2265b85ff3d%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.cointribune.com%2Fen%2Fthe-crypto-industry-is-entering-a-new-era-of-consolidation%2F    छोटे एक्सचेंज पर बढ़ा संकट बदलते माहौल का असर क्रिप्टो एक्सचेंजों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। BitMEX ने सितंबर में अपना एक्सचेंज बंद करने का फैसला लिया है। वहीं BitMart ने 26 अगस्त से ट्रेडिंग सेवाएं बंद करने और जनवरी 2027 तक पूरी तरह कारोबार खत्म करने की घोषणा की है। दूसरी ओर कुछ बड़ी कंपनियां विस्तार में जुटी हैं। Bybit ने इंडोनेशिया की स्थानीय कंपनी NOBI में बहुमत हिस्सेदारी खरीदकर अपनी मौजूदगी मजबूत की है।  READ MORE: CLARITY Act पर न्यूयॉर्क AG का हमला, सीनेट को दी चेतावनी  बाजार में बढ़ सकते हैं अधिग्रहण और विलय
iPhone क्यों है खास? जानिए इसके 5 सुरक्षा फीचर्स

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