Trump Tech Energy Pledge: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले सप्ताह व्हाइट हाउस में बड़ी टेक कंपनियों के नेताओं से मिलेंगे। इस बैठक में कंपनियों से यह वादा लेने की कोशिश होगी कि वे अपने डेटा सेंटर की बिजली का खर्च खुद उठाएंगी।
डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में टेक कंपनियों से मिलकर डेटा सेंटर की बिजली खर्च की गारंटी लेंगे, जानें इससे कितना होगा बिजली की बढ़ती कीमतों पर असर।
ट्रंप किस-किस से करेंगे मुलाकत
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप 4 मार्च को Amazon, Meta, Microsoft, and Alphabet के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा OpenAI, Oracle, और एलोन मस्क की xAI जैसी कंपनियों को भी आमंत्रित किया गया है।
प्रशासन का मानना है कि सार्वजनिक वादे उपभोक्ताओं में भरोसा बढ़ाएंगे और यह दिखाएंगे कि तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर, जो AI के विकास के लिए जरूरी हैं, पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे और बिजली की कीमतें नहीं बढ़ाएंगे। हालांकि, ये वादे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होंगे।
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ट्रंप का यह कदम कितना फायदेमंद साबित होगा?
ट्रंप का यह कदम बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने और उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश का हिस्सा है। इससे अमेरिकी नागरिक चिंतित हैं कि डेटा सेंटर की बढ़ती संख्या के कारण उन्हें ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। इन सेंटर्स के लैंड और पानी के उपयोग और बैकअप के लिए डीजल जनरेटर का इस्तेमाल भी आलोचना का कारण है। हालांकि, ट्रंप ने 2024 के अभियान में बिजली की कीमतें आधी करने का वादा किया था, लेकिन वास्तविकता में औद्योगिक गतिविधियों, डेटा सेंटर और घरों में इलेक्ट्रिक वाहन, कुकिंग और हीटिंग की बढ़ती मांग से बिजली की कीमतें बढ़ी हैं। दिसंबर में अमेरिका में औसत रिटेल बिजली मूल्य 17.24 सेंट प्रति किलोवॉट-घंटा था, जो पिछले साल की तुलना में 6% ज्यादा है।
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट
Microsoft के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ ने कहा कि कंपनी प्रशासन की कोशिशों की सराहना करती है कि डेटा सेंटर बिजली की कीमतें बढ़ाने का कारण न बनें। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि टेक कंपनियों के गैर-बाध्यकारी वादे बिजली की कीमतों को रोक नहीं सकते।
क्लाइमेट पावर के वरिष्ठ सलाहकार जेसी ली ने कहा कि प्रशासन को खाली वादे देने की बजाय नई बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी पूर्वी तट पर ऑफशोर विंड फार्म्स को रोकने और नवीकरणीय ऊर्जा प्रोत्साहनों को खत्म करने की कोशिश की है।
