Micron India Plant: अमेरिका की चिप कंपनी Micron Technology ने गुजरात के साणंद में भारत की पहली कमर्शियल सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट फैसिलिटी की शुरुआत कर दी है। यह प्लांट भारत के सेमीकंडक्टर सपने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। अब भारत की जमीन पर बड़े स्तर पर चिप से जुड़ा व्यावसायिक काम शुरू हो गया है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के बीच माइक्रोन ने साणंद में बड़ा कदम उठाया है। 5 लाख वर्ग फुट क्लीनरूम वाला यह प्लांट 2035 तक भारत को वैश्विक चिप हब बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।
2.75 अरब डॉलर का बड़ा निवेश
साणंद प्लांट में Micron और उसके सरकारी साझेदारों ने मिलकर 2.75 अरब डॉलर का निवेश किया है। यह यूनिट पहले ही कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर चुकी है। यहां Micron के ग्लोबल नेटवर्क से आने वाले एडवांस DRAM और NAND वेफर्स को असेंबल और टेस्ट कर तैयार मेमोरी और स्टोरेज प्रोडक्ट में बदला जाएगा। ये प्रोडक्ट भारत और विदेश दोनों बाजारों में सप्लाई होंगे।
दुनिया के बड़े क्लीनरूम में शामिल होगा प्लांट
यह प्लांट ISO 9001:2015 प्रमाणित है। जब यह पूरी क्षमता से काम करेगा, तब यहां 5 लाख वर्ग फुट से ज्यादा का क्लीनरूम स्पेस होगा। यह दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-फ्लोर सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट क्लीनरूम में गिना जाएगा। कंपनी को उम्मीद है कि 2026 में यहां करोड़ों चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग होगी। 2027 तक उत्पादन बढ़ाकर सैकड़ों मिलियन यूनिट तक ले जाने का लक्ष्य है।
उद्घाटन के दौरान Micron ने भारत में बने पहले मेमोरी मॉड्यूल की खेप Dell Technologies को सौंपी। ये मॉड्यूल भारत में बनने वाले लैपटॉप में लगाए जाएंगे और घरेलू बाजार में बिकेंगे। इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी।
Micron के चेयरमैन, प्रेसिडेंट और CEO संजय मेहरोत्रा ने कहा कि यह प्लांट कंपनी के ग्लोबल असेंबली और टेस्ट नेटवर्क को मजबूत करेगा। खासतौर पर AI के बढ़ते इस्तेमाल से मेमोरी और स्टोरेज की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसे पूरा करने में यह सुविधा मदद करेगी। उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद रहे।
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पर्यावरण और स्किल पर खास ध्यान
साणंद प्लांट को LEED गोल्ड मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है। यहां पानी बचाने वाली तकनीक का उपयोग किया गया है और लिक्विड डिस्चार्ज को शून्य रखने का लक्ष्य है। कंपनी का कहना है कि वह भारत में विस्तार करते समय पर्यावरण का पूरा ध्यान रख रही है। Micron देश के विश्वविद्यालयों और ट्रेनिंग संस्थानों के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार कर रही है। कंपनी वर्कफोर्स ट्रेनिंग और भविष्य में विस्तार पर भी निवेश करेगी।
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2035 तक भारत का बड़ा लक्ष्य
केंद्र सरकार ने बजट 2026–27 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 1,000 करोड़ रुपये दिए हैं। इसका फोकस सेमीकंडक्टर उपकरण, मटेरियल और भारतीय बौद्धिक संपदा पर रहेगा।
