5G Hackathon winner

DoT ने लॉन्च किया 5G Hackathon, वीनर को मिलेंगे 5 लाख

7 mins read
1.5K views
March 17, 2025

DoT ने 5G तकनीक में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए 5G इनोवेशन हैकाथॉन 2025 की घोषणा की है। यह एक छह महीने लंबी प्रतियोगिता होगी।

5G Hackathon: DoT ने 5G तकनीक में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए 5G इनोवेशन हैकाथॉन 2025 की घोषणा की है। यह एक छह महीने लंबी प्रतियोगिता होगी, जिसका मकसद 5G-आधारित अत्याधुनिक समाधान विकसित करना है। यह प्रतियोगिता उन छात्रों, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स के लिए एक शानदार मौका है, जो 5G टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर समाज और उद्योग की प्रमुख चुनौतियों का समाधान निकालना चाहते हैं।

प्रतिभागियों को मिलेंगे ये खास लाभ

इस हैकाथॉन में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों को कई फायदे मिलेंगे, जैसे –

  • मेंटरशिप: इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से मार्गदर्शन मिलेगा।
  • फंडिंग अवसर: अपने इनोवेटिव आइडियाज को साकार करने के लिए आर्थिक सहायता।
  • एक्सेस टू 100+ 5G लैब्स: वास्तविक प्रोजेक्ट पर काम करने और उसे स्केलेबल तकनीक में बदलने का मौका।

किन क्षेत्रों में इनोवेशन की जरूरत?

यह प्रतियोगिता कई महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों पर केंद्रित होगी, जिनमें शामिल हैं

  • AI-आधारित नेटवर्क मेंटेनेंस – 5G नेटवर्क को स्मार्ट तरीके से मैनेज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग।
  • IoT समाधान – इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित स्मार्ट डिवाइसेज़ और एप्लिकेशन।
  • 5G ब्रॉडकास्टिंग – उच्च गुणवत्ता वाले कंटेंट को तेजी से और अधिक कुशलता से डिलीवर करने की तकनीक।
  • स्मार्ट हेल्थ और कृषि – 5G का उपयोग करके टेलीमेडिसिन और स्मार्ट फार्मिंग को सशक्त बनाना।
  • औद्योगिक स्वचालन – फैक्ट्रियों और अन्य औद्योगिक सेटअप्स में ऑटोमेशन तकनीकों को लागू करना।
  • नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (NTN), D2M और V2X संचार – 5G आधारित सैटेलाइट कम्युनिकेशन, डायरेक्ट-टू-मोबाइल (D2M) और व्हीकल-टू-एवरीथिंग (V2X) तकनीकों का विकास।
  • क्वांटम कम्युनिकेशन – डेटा को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए अगली पीढ़ी की एन्क्रिप्शन तकनीकों पर काम करना।

पुरस्कार और मान्यता

  • प्रथम स्थान: 5,00,000 रुपये
  • द्वितीय स्थान: 3,00,000 रुपये
  • तृतीय स्थान: 1,50,000 रुपये

इसके अलावा, बेस्ट आइडिया और इनोवेटिव आइडिया के लिए 50,000 रुपये का स्पेशल प्राइजृ दिया जाएगा। बेस्ट 5G यूज केस के लिए 10 डिवाइस और एक प्रमाण पत्र। साथ ही, किसी उभरते संस्थान को बेस्ट प्राइज करने के लिए विशेष उल्लेख भी दिया जाएगा।

मुख्य तिथिया

  • प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि: 15 मार्च – 15 अप्रैल 2025
  • चमत्कार की घोषणा: 1 अक्टूबर 2025

1.5 करोड़ रुपये के बजट से समर्थित इस हैकाथॉन का लक्ष्य 50 से अधिक स्केलेबल 5G प्रोटोटाइप विकसित करना, 25 से अधिक पेटेंट प्राप्त करना और उद्योग-अकादमिक-सरकारी सहयोग को मजबूत करना है। 5G इनोवेशन हैकाथॉन 2025 भारत को 5G-संचालित समाधानों में वैश्विक नेता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो नवाचार और तकनीकी क्रांति को

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

Taj Mahal news
Previous Story

AI ने दिखाया Taj Mahal का अनोखा नजारा, हैरान कर देगा Video

Elon Musk
Next Story

Grok AI ने बताया ‘लड़की आपसे अटैच है या नहीं’, वायरल हो रहे ये सवाल

Latest from Latest news

Crypto DAO में 8.2M डॉलर की सेंध, BNB Chain का सुरक्षा बग बेनकाब

Crypto DAO में 8.2M डॉलर की सेंध, BNB Chain का सुरक्षा बग बेनकाब

Crypto DAO exploit ने BNB Chain की सुरक्षा पर फिर खड़े किए सवाल, जानें कैसे बिना जीरो डे या प्राइवेट की चोरी के करोड़ों डॉलर की सेंध लगी। Blockchain Security: क्या करोड़ों डॉलर की क्रिप्टो चोरी के लिए किसी बेहद खतरनाक हैकर या नई तकनीक की जरूरत होती है? Crypto DAO Exploit ने इसका जवाब चौंकाने वाले तरीके से दिया। 28 जुलाई 2026 को BNB Chain पर Crypto DAO से जुड़े Pro Token में हमला हुआ और करीब 8.2 मिलियन डॉलर का USDT एक हमलावर वॉलेट में पहुंच गया।  साइबर सिक्योरिटी फर्म Blockaid ने इस सक्रिय हमले की जानकारी दी। हमलावर ने किसी नए जीरो डे या चोरी की गई प्राइवेट की का सहारा नहीं लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसी वॉल्ट फंक्शन खुली थी, जिसे कोई भी व्यक्ति कॉल कर सकता था। यही Access-Control की कमी हमले की सबसे बड़ी वजह बनी।  Crypto DAO Exploit में कैसे हुआ हमला?  हमले के बाद करीब 8.2 मिलियन डॉलर का USDT exploiter wallet 0x427671b2C8e91034A91FE698F9B7259b2345F45D में ट्रांसफर हुआ। इसके अलावा तीन जुड़े रिसीविंग एड्रेस में भी रकम पहुंची। इन तीन पतों पर करीब 2.68 मिलियन डॉलर, 2.69 मिलियन डॉलर और 2.78 मिलियन डॉलर की रकम रखी गई। DeFiLlama ने भी इस घटना को उसी दिन Protocol Logic (Solidity)
Apple Lease EMI मिस हुई तो iPhone लॉक होगा? जानें सच

Apple Lease EMI मिस हुई तो iPhone लॉक होगा? जानें सच

क्या EMI नहीं भरने पर iPhone के ऐप्स बंद हो जाएंगे? Apple ने Restricted Mode की खबरों को खारिज किया  Apple Upgrade: क्या iPhone की EMI नहीं भरने पर आपका फोन लॉक हो जाएगा? इस सवाल पर Apple ने अब बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। कंपनी ने साफ कहा है कि Apple Upgrade Program के तहत भुगतान चूकने पर डिवाइस के फीचर्स को सीमित करने वाला कोई Restricted Mode नहीं होगा।   Apple के इस बयान से उन अटकलों पर विराम लग गया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि EMI नहीं भरने पर iPhone, iPad, Mac या Apple Watch का इस्तेमाल सीमित किया जा सकता है। कंपनी के मुताबिक, ऐसे मामलों को मौजूदा फाइनेंसिंग और लीज खत्म करने की नीतियों के तहत संभाला जाएगा।  Apple Upgrade Program में Restricted Mode की चर्चा क्यों हुई?  हाल ही में iOS 27 बीटा में एक फीचर को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी। इसमें App Managed Feature देखा गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह फीचर फाइनेंसिंग पार्टनर्स को डिवाइस की स्थिति की समय-समय पर जांच करने की सुविधा दे सकता है। इसके बाद ऐसी अटकलें तेज हो गईं कि Apple भुगतान नहीं करने वाले ग्राहकों के डिवाइस पर Restricted Mode लागू कर सकता है। इस मोड में कथित तौर पर सिर्फ Phone, Settings, Clock, Wallet और App
भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ का खतरा, तेल खरीदना पड़ेगा भारी

भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ का खतरा, तेल खरीदना पड़ेगा भारी

अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों का बिल आगे बढ़ा, जानें भारत क्यों निशाने पर है और 100% संभावित टैरिफ का क्या असर पड़ सकता है।  India-US Tariff: अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा एक बड़ा बिल सीनेट में आगे बढ़ गया है। मंगलवार को हुए प्रक्रियात्मक मतदान में बिल के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 12 सांसदों ने विरोध किया। इसमें रूस की ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले कुछ बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन इस प्रस्तावित व्यवस्था की सबसे बड़ी जद में आ सकते हैं। हालांकि, अभी यह बिल कानून नहीं बना है।  US Russia Sanctions Bill में भारत क्यों आया निशाने पर?  इस प्रस्ताव का मकसद रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव डालना है। बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के सामान पर भारी टैरिफ लगाने की शक्ति देगा, जो रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार हैं या रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। ताजा समझौते के मुताबिक, संभावित टैरिफ का दायरा रूसी कच्चे तेल या गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले प्रमुख देशों तक सीमित किया गया है। भारत और चीन इस सूची में महत्वपूर्ण देश माने जा रहे हैं।  भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि रूसी कच्चा तेल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर अमेरिकी कानून के तहत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर नया दबाव बन सकता है।  READ MORE: हैदराबाद के टॉप 10 AI स्टार्टअप्स 2026   भारत पहले से झेल रहा 50% टैरिफ का दबाव  भारत पहले ही अमेरिकी टैरिफ को लेकर दबाव में है। आपके दिए विवरण के मुताबिक, अगस्त 2025 में अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाए जाने के बाद कुल अमेरिकी टैरिफ बोझ 50% तक पहुंच गया था। अब नया प्रतिबंध विधेयक सामने आने से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को लेकर चिंता बढ़ सकती है। हालांकि, प्रस्तावित कानून में राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंध या टैरिफ से छूट देने का अधिकार भी दिया गया है।  रूस से तेल खरीद पर क्या होगा असर?  भारत के लिए रूसी तेल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरों के लिए एक अहम विकल्प रहा है। अगर अमेरिका इस बिल को कानून का रूप देता है और भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है। अमेरिका जाने वाले भारतीय सामान की लागत बढ़ सकती है और कई उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिबंधों के समर्थकों का तर्क है कि इससे रूस की ऊर्जा आय घटेगी और यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद पर दबाव पड़ेगा।  READ MORE: सेंसेक्स

Don't Miss