Australian Startups : ऑस्ट्रेलियाई हेल्थ-टेक कंपनी Harrison.ai अब इसी सवाल के बीच खड़ी है। करीब एक साल पहले सरकार ने कंपनी में 32 मिलियन डॉलर लगाए थे। अब कंपनी ऑस्ट्रेलिया में कर्मचारियों की छंटनी कर रही है और अमेरिका में नया कारोबार शुरू कर रही है। Harrison.ai की स्थापना 2018 में भाइयों एंगस ट्रान और दिमित्री ट्रान ने की थी। कंपनी ऐसे AI उपकरण बनाती है, जो डॉक्टरों को मेडिकल स्कैन और खासकर रेडियोलॉजी इमेज समझने में मदद करते हैं। कंपनी के मुताबिक, उसकी तकनीक अब करीब 3,500 डॉक्टरों और अन्य चिकित्सकीय पेशेवरों द्वारा 1,000 से ज्यादा जगहों पर इस्तेमाल हो रही है।
सरकार ने 32 मिलियन डॉलर लगाए, अब बदली रणनीति
Harrison.ai की 2025 की फंडिंग के दौरान कंपनी का मूल्य करीब 400 मिलियन डॉलर आंका गया था। इस दौर में ऑस्ट्रेलिया की National Reconstruction Fund Corporation ने 32 मिलियन डॉलर का निवेश किया। सरकार का मकसद कंपनी को ऑस्ट्रेलिया से ग्लोबल बाजार तक पहुंचाने में मदद करना था। कंपनी के निवेशकों में I-MED, Sonic Healthcare और वेंचर कैपिटल फर्म Blackbird जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं, लेकिन अब कंपनी के घर यानी ऑस्ट्रेलिया में तस्वीर बदल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में कर्मचारियों को बताया गया कि कुछ पद खत्म किए जाएंगे। अप्रैल में कर्मचारियों को भेजे गए आंतरिक दस्तावेज में सलाह-मशविरा प्रक्रिया की जानकारी दी गई थी। इसके बाद कम से कम दो कर्मचारियों ने LinkedIn पर बताया कि उनकी नौकरियां चली गईं।
AI एजेंट संभालेंगे कर्मचारी, काम करने का तरीका बदला
कंपनी के बदलाव की वजह सिर्फ खर्च कम करना नहीं है। Harrison.ai अपने काम करने के तरीके को भी बदल रही है। कंपनी अब ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रही है, जिसमें कर्मचारी तेजी से खुद काम करने वाले AI एजेंटों की पूरी टीम संभालेंगे। यानी कर्मचारी सिर्फ अपना पारंपरिक काम नहीं करेंगे। उन्हें AI सिस्टम की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। कंपनी के नेतृत्व के मुताबिक, इस बदलाव के कारण कुछ कर्मचारियों ने खुद भी नौकरी छोड़ने का फैसला किया। वजह यह थी कि वे काम करने का ज्यादा पारंपरिक तरीका पसंद करते थे। National Reconstruction Fund Corporation ने भी नौकरियों में कटौती की बात स्वीकार की है। उसका कहना है कि कंपनी अब उत्पाद तैयार करने के दौर से निकलकर उसके व्यावसायीकरण और अंतरराष्ट्रीय विस्तार की तरफ बढ़ रही है।
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अमेरिका में Frontier Radiology से नई शुरुआत
Harrison.ai का अगला बड़ा दांव अमेरिका है। कंपनी वहां Frontier Radiology नाम से AI आधारित टेलीरेडियोलॉजी सेवा शुरू कर रही है। इस कारोबार में अमेरिकी रेडियोलॉजिस्ट मरीजों के स्कैन देखेंगे। वे Harrison.ai की AI तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। Frontier खुद को एक स्वतंत्र मेडिकल प्रैक्टिस बताती है, लेकिन उसका Harrison.ai के साथ करीबी कारोबारी संबंध है। Harrison.ai उसे प्रशासनिक, संचालन और तकनीकी सहायता देती है। यही मॉडल अब कुछ सवाल भी खड़े कर रहा है।
Frontier की भर्ती सामग्री में एक भुगतान कैलकुलेटर का इस्तेमाल होता है। इसमें Harrison.ai की AI तकनीक से डॉक्टरों की उत्पादकता बढ़ने का अनुमान शामिल है। मॉडल मानता है कि AI इस्तेमाल करने से डॉक्टर 30% ज्यादा उत्पादक हो सकते हैं। इसके बाद AI की मदद से किए गए अतिरिक्त काम के आधार पर बोनस भी जुड़ता है। सवाल यह है कि अगर डॉक्टर को AI की सलाह गलत लगे, तो क्या वह उसे आसानी से चुनौती दे पाएगा? यही संभावित हितों के टकराव की सबसे बड़ी चिंता है।
मेडिकल डेटा को लेकर पहले भी उठे सवाल
Harrison.ai पहले भी मेडिकल डेटा के इस्तेमाल को लेकर जांच के दायरे में आ चुकी है। कंपनी के AI सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए I-MED से मिले लाखों मेडिकल स्कैन इस्तेमाल हुए थे। I-MED ने कहा था कि इन स्कैन को पर्याप्त तरीके से पहचान-मुक्त किया गया था। मरीजों को सीधे इसकी सूचना नहीं दी गई थी और उनकी अलग से सहमति भी नहीं ली गई थी। ऑस्ट्रेलिया के गोपनीयता नियामक ने बाद में जांच की। उसने माना कि डेटा को पर्याप्त रूप से पहचान-मुक्त किया गया था और जांच बंद कर दी। बाद में सरकारी दस्तावेजों से यह भी सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल स्कैन को AI प्रशिक्षण में इस्तेमाल करने को लेकर स्वास्थ्य मंत्री के कार्यालय को चिंताओं से अवगत कराया था।
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अब असली परीक्षा ऑस्ट्रेलिया की AI नीति की
Harrison.ai अब साफ तौर पर ग्लोबल हेल्थकेयर कंपनी बनने की दिशा में बढ़ रही है। कंपनी के संभावित ASX लिस्टिंग की तैयारी के संकेत भी मिले हैं, लेकिन ताजा घटनाक्रम ऑस्ट्रेलिया की AI नीति के सामने बड़ा सवाल रखता है। अगर सरकार किसी घरेलू AI कंपनी में सार्वजनिक पैसा लगाती है, तो उससे देश को क्या हासिल होना चाहिए? सवाल सिर्फ 32 मिलियन डॉलर के निवेश का नहीं है। मुद्दा ऑस्ट्रेलियाई नौकरियों, मरीजों के मेडिकल डेटा और देश के आर्थिक फायदे का भी है।
