Startup Day 2026: 16 जनवरी को मनाए गए स्टार्टअप डे इंडिया के मौके पर देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम ने अपने सफर पर एक नजर डाली। कभी जहां भारतीय स्टार्टअप्स की पहचान सिर्फ ऐप्स, प्लेटफॉर्म और तेज ग्रोथ से होती थी। वहीं, अब तस्वीर काफी बदल चुकी है। आज स्टार्टअप्स का फोकस केवल मुनाफे पर नहीं बल्कि हेल्थकेयर, शिक्षा, सस्टेनेबिलिटी और डीप टेक जैसी असल समस्याओं को हल करने पर है।
उद्योग जगत के लोगों का मानना है कि यह बदलाव मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकार की सहयोग नीतियों, आसान फंडिंग और पहले से ज्यादा जागरूक ग्राहकों की वजह से आया है। अब भारतीय स्टार्टअप्स शॉर्टकट ग्रोथ की बजाय भरोसा, स्थिरता और लंबे समय तक असर डालने वाले मॉडल अपनाने लगे हैं।
स्टार्टअप डे इंडिया 2026 पर जानिए कैसे भारतीय स्टार्टअप्स अब सिर्फ टेक और ग्रोथ नहीं, बल्कि हेल्थकेयर, शिक्षा और सस्टेनेबिलिटी जैसे असली मुद्दों पर काम कर रहे हैं।
उद्देश्य-आधारित स्टार्टअप्स का बढ़ता प्रभाव
Awshad की को-फाउंडर और CMO का कहना है कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब ज्यादा परिपक्व हो गया है। उनके अनुसार, आज के स्टार्टअप्स केवल नई टेक्नोलॉजी के आकर्षण से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की समस्याओं को हल करने की सोच से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय उपभोक्ताओं में वेलनेस, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और साइंस-बेस्ड वैकल्पिक इलाज जैसे मेडिकल कैनाबिस को लेकर रुचि तेजी से बढ़ रही है।
यह इस बात का संकेत है कि लोग अब अपनी सेहत को लेकर ज्यादा समझदारी से फैसले ले रहे हैं। ऋचा जग्गी का मानना है कि भविष्य में वही स्टार्टअप्स टिक पाएंगे जो सस्टेनेबिलिटी, पारदर्शिता और लॉन्ग-टर्म इम्पैक्ट पर ध्यान देंगे, न कि केवल जल्दी ग्रोथ दिखाने पर।
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लंबे समय तक चलने वाली कंपनियों पर जोर
Rocket Health के CEO और फाउंडर अभिनीत कुमार ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम अब ऐसे बिजनेस खड़े करने की दिशा में बढ़ रहा है जो स्थानीय जरूरतों को समझते हुए ग्लोबल स्तर पर अपनी पहचान बना सकें। उनके मुताबिक, देश में ऐसे फाउंडर्स की संख्या बढ़ रही है जो समझदारी और स्केलेबल आइडियाज पर काम कर रहे हैं।
अभिनीत कुमार ने यह भी कहा कि अब स्टार्टअप्स को जरूरत से ज्यादा प्रयोग और जल्दबाजी से बचना चाहिए। असली मौका उन कंपनियों के पास है जिनकी नींव मजबूत हो और जो लंबे समय तक समस्याओं का समाधान दे सकें। उन्होंने हेल्थकेयर, एजुकेशन, क्लाइमेट, मैन्युफैक्चरिंग और डीप टेक को भारत की भविष्य की अर्थव्यवस्था और इनोवेशन की रीढ़ बताया।
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कंप्यूटिंग के भविष्य में भारत की भूमिका
इन बदलावों के साथ-साथ भारत की भूमिका ग्लोबल कंप्यूटिंग इकोसिस्टम में भी चर्चा का विषय बन रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब ध्यान सिर्फ सिलिकॉन वैली मॉडल पर नहीं, बल्कि देश में विकसित फुल स्टैक और स्वदेशी इनोवेशन पर है।
