Rare Earth Magnets: भारत में टेक और ऑटो सेक्टर के लिए बड़ी खबर है। केंद्रीय खनन मंत्री ने बताया कि भारत इस साल के अंत तक रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स का उत्पादन शुरू करेगा। इस पहल में निजी कंपनियों के साथ मिलकर देश की स्थानीय निर्माण क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
भारत इस साल के अंत तक रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स का उत्पादन शुरू करेगा। इससे टेक और ऑटो इंडस्ट्री में स्थानीय निर्माण क्षमता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
रेयर अर्थ मैग्नेट्स का महत्व
सरकार ने नवंबर में 73 अरब रुपये की योजना को मंजूरी दी थी। ये मैग्नेट्स इलेक्ट्रिक कारों, एयरोस्पेस, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उद्योगों में इस्तेमाल होते हैं।
आयात पर निर्भरता कम करना
भारत अब तक अपनी जरूरत का ज्यादातर हिस्सा आयात से पूरा करता है। चीन के पास इस तरह के मैग्नेट्स की 90% प्रोसेसिंग पर कंट्रोल है। पिछले साल चीन ने शिपमेंट रोक दी थी, जिससे ऑटो कंपनियों को आपूर्ति में दिक्कतें हुईं। अब भारत इस सप्लाई चेन की कमी को दूर करने की कोशिश कर रहा है।
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देश में उत्पादन बढ़ाने की योजना
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भारत के पास 6.9 मिलियन टन रेयर अर्थ के भंडार हैं, जो दुनिया में तीसरे स्थान पर हैं। अभी केवल थोड़ी मात्रा में खनन होता है क्योंकि निजी कंपनियों का निवेश कम है। नई नीति इसे बढ़ावा देगी। खनन मंत्रालय और एक सरकारी संस्था ने परमानेंट मैग्नेट्स बनाने की तकनीक विकसित की है।
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मंत्री किशन रेड्डी ने बताया कि चार महत्वपूर्ण खनिज प्रोसेसिंग प्लांट्स विभिन्न राज्यों में बनाए जाएंगे। यह कदम समय पर उठाया जा रहा है क्योंकि भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स की खपत 2030 तक दोगुनी होने की उम्मीद है।
