Water Cleaning Robot: तकनीक अब केवल इंसानों की सुख- सुविधा का माध्यम नहीं रह गया है। यह तो प्रकृति की रक्षा में भी सक्रिय भूमिका निभाने लगी है। जिस दौर में नदियां, तालाब और झीलें प्रदूषण से जूझ रही हैं, उसी समय Robotics एक नया समाधान लेकर सामने आई है। यानी अब नदियों और तालाबों की सफाई के लिए सिर्फ इंसानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। Artificial Intelligence से लैस रोबोट इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए तैयार हैं। साउथ कोरिया की कंपनी Ecopeace द्वारा विकसित ऑटोनॉमस रोबोट जल प्रदूषण से निपटने की दिशा में एक नई और प्रभावी तकनीकी पहल मानी जा रही है।
अब नदियों, तालाबों की साफ-सफाई के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं, नदियों और तालाबों की सफाई के लिए रोबोट मैदान में उतर चुके हैं, जानिए कैसे काम करती है यह तकनीक।
आनेवाले दिनों में रोबोट बनेगा सफाईकर्मी
अब तक Robot को मनोरंजन, किचन और इंडस्ट्रियल कामों के लिए जानी जाती थी लेकिन अब रोबोट इससे एक कदम से बढ़ते हुए अब रोबोट पर्यावरण संरक्षण में उतर चुके हैं। Ecopeace का यह इनोवेशन बताता है कि आने वाले समय में रोबोट हमारी नदियों और तालाबों के सफाईकर्मी बन सकते हैं।
पानी में उतरते ही शुरू कर देता है काम
इन रोबोट्स को Ecobot नाम दिया गया है। यह पूरी तरह ऑटोनॉमस हैं। इन्हें बार-बार इंसानी निर्देशों की जरूरत नहीं होती। पानी में उतारते ही ये लगातार सफाई शुरू कर देते हैं। इनका मुख्य काम पानी में जमी काई, चिकनाई और तैरती गंदगी को हटाना है, जिससे जल की गुणवत्ता सुधर सके।
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माइक्रोफिल्टर से सफाई की राह आसान
रिपोर्ट के मुताबिक Ecobot में स्टेनलेस स्टील से बने खास माइक्रोफिल्टर लगाए गए हैं, जो बेहद बारीक गंदगी को भी छान लेते हैं। सबसे खास बात यह है कि सफाई करते-करते जब रोबोट खुद गंदे हो जाते हैं, तो वे अपने फिल्टर और सतह को खुद साफ कर लेते हैं। इससे लंबे समय तक बिना रुके काम करना संभव हो पाता है।
काई क्यों है सबसे बड़ा खतरा?
पानी में फैलने वाली काई देखने में भले ही सामान्य लगे, लेकिन यही water pollution की बड़ी वजह बनती है। काई ऑक्सीजन को कम कर देती है। जिससे मछलियों और दूसरे जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ जाता है। Ecopeace के रोबोट खास तौर पर इसी समस्या पर फोकस करते हैं, क्योंकि पारंपरिक तरीके काई को पूरी तरह हटाने में असफल साबित हो रहे हैं।
जहां एआई बनता है फैसले का दिमाग
इन रोबोट्स की असली ताकत है इनमें लगा Artificial Intelligence सिस्टम। सेंसर पानी की गंदगी, तापमान और काई के स्तर से जुड़ा डेटा इकट्ठा करते हैं। यह डेटा AI सिस्टम तक पहुंचता है, जो तय करता है कि सफाई किस हिस्से में, कितनी मात्रा में और किस तरह किया जाए।
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फिलहाल सिंगापुर और यूएई इस्तेमाल
Ecobot को सबसे पहले सिंगापुर और यूएई में इस्तेमाल किया जाना है। जहां जल संरक्षण पहले से ही प्राथमिकता में शामिल है। उम्मीद की जा रही है कि इन देशों में सफलता मिलने के बाद दुनिया के अन्य हिस्सों में भी जल प्रदूषण से निपटने के लिए ऐसे रोबोट अपनाए जाएंगे। भारत में भी गंगा- सहित कई नदियों की सफाई में कारगर सिद्ध हो सकता है।
भविष्य में नदियों का निगरानी करेगा रोबोट
यह तकनीक भविष्य में मौजूदा मैनुअल वाटर क्लीनिंग सिस्टम, केमिकल ट्रीटमेंट और सीमित मशीनों की जगह ले सकती है, जो बड़े जल स्रोतों में प्रभावी साबित नहीं हो पाते। और सबसे बड़ी बात यह तकनीक न केवल पानी बचाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का आधार भी सुरक्षित रखेगी।
