कनाडा में TikTok ऑफिस बंद के आदेश, सामने आई ये वजह

6 mins read
1.3K views
November 7, 2024

कनाडा ने देश में TikTok के सभी कंपनियों को बंद करने का आदेश दिया है। हालांकि, यह कहा गया है कि सरकार कनाडाई लोगों की शॉर्ट-वीडियो ऐप तक पहुंच या कंटेंट बनाने में उनकी रुचि में बाधा नहीं डाल रही है।

TikTok : कनाडा ने बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए चीनी TikTok के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। बता दें कि कनाडा ने देश में TikTok के सभी कंपनियों को बंद करने का आदेश दिया है। हालांकि, यह कहा गया है कि सरकार कनाडाई लोगों की शॉर्ट-वीडियो ऐप तक पहुंच या कंटेंट बनाने में उनकी रुचि में बाधा नहीं डाल रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों को दूर करने के लिए की गई कार्रवाई

मंत्री फ्रेंकोइस-फिलिप शैम्पेन ने एक बयान में कहा है कि सरकार TikTok टेक्नोलॉजी कनाडा इंक के माध्यम से कनाडा में बाइटडांस लिमिटेड के संचालन से संबंधित राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों को दूर करने के लिए यह कार्रवाई कर रही है। यह निर्णय टेस्ट के दौरान इक्ट्ठा की गई जानकारी, सबूत और कनाडा की सुरक्षा, खुफिया समुदाय और अन्य सरकारी भागीदारों से सलाह के आधार पर किया गया था।

ByteDance TikTok की चीनी मूल कंपनी

ओटावा ने पिछले साल कनाडा में निवेश और अपने कारोबार का विस्तार करने की TikTok की योजनाओं की टेस्ट शुरू की थी। ByteDance TikTok की चीनी मूल कंपनी है। कनाडा के कानून के तहत, सरकार विदेशी निवेश से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित जोखिमों की समीक्षा कर सकती है। कानून सरकार को ऐसे निवेशों का विवरण सार्वजनिक करने से रोकता है।

इस पर TikTok ने कहा कि वह इस आदेश को कोर्ट में चुनौती देगा। कंपनी के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ‘कनाडा में TikTok के दफ़्तर बंद करना और सैकड़ों अच्छी तनख्वाह वाली स्थानीय नौकरियाँ खत्म करना किसी के हित में नहीं है। आज का शटडाउन आदेश बस यही करेगा।’

खतरे का हवाला देते हुए यह कदम उठाया गया

दरअसल, कनाडा में सरकारी डिवाइस पर TikTok ऐप को प्रतिबंधित कर दिया गया है। गोपनीयता और सुरक्षा के लिए अस्वीकार्य स्तर के खतरे का हवाला देते हुए यह कदम उठाया गया था। TikTok और ByteDance ने राष्ट्रपति जो बिडेन द्वारा हस्ताक्षरित एक कानून को रोकने के लिए मई में एक अमेरिकी संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया था। 24 अप्रैल को हस्ताक्षरित कानून ByteDance को TikTok बेचने या प्रतिबंध का सामना करने के लिए 19 जनवरी तक का समय देता है।

Ragini Sinha

5 साल के अनुभव के साथ मैंने मीडिया जगत में कंटेट राइटर, सीनियर कंटेंट राइटर, मीडिया एनालिस्ट और प्रोग्राम प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया है। बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव को मैंने कवर किया है। अपने काम को लेकर मुझे पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। काम को जल्दी सीखने की कला मुझे औरों से अलग बनाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Previous Story

इन टिप्स को फॉलो कर पाएं Google Pay से फूल रिफंड

Next Story

अब बच्चे नहीं चलाएंगे सोशल मीडिया, सरकार करने जा रही बैन

Latest from Latest news

technology

भारत ग्लोबल साउथ देशों के लिए टेक्नोलॉजी साझा करने में आगे

India Open Source Platforms:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वैश्विक संसदीय मंच पर भारत की टेक्नोलॉजी साझा करने की पहल को रेखांकित किया। दिल्ली में 28वें कॉन्फ्रेंस ऑफ स्पीकर्स एंड प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स ऑफ कॉमनवेल्थ 2026 के उद्घाटन अवसर पर मोदी ने कहा कि भारत ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहा है, जिन्हें ग्लोबल साउथ के देश अपनाकर अपने सिस्टम में लागू कर सकते हैं।  भारत ग्लोबल साउथ देशों के लिए टेक्नोलॉजी साझा कर रहा है, प्रधानमंत्री मोदी ने CSPOC 2026 में ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटल नवाचारों को साझा करने की पहल की जानकारी दी। भारत की ओपन सोर्स पहल  मोदी ने कहा कि अब भारत की टेक्नोलॉजी विकास रणनीति केवल देश के भीतर सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य यह है कि भारत में बने नवाचार ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि हमारे नवाचार पूरे ग्लोबल साउथ और कॉमनवेल्थ देशों के लिए लाभकारी हों। इसके लिए हम ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहे हैं, ताकि अन्य देश भी भारत जैसे सिस्टम विकसित कर सकें।  पिछले कुछ सालों में भारत ने पहचान, पेमेंट और प्रशासन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर डिजिटल सिस्टम बनाए हैं। कई छोटे देशों के लिए यह व्यावहारिक साबित हो रहा है क्योंकि महंगे सॉफ़्टवेयर पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है।  ग्लोबल साउथ पर जोर  प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ग्लोबल साउथ के देशों को अपना मार्ग खुद तय करना जरूरी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार ग्लोबल साउथ की चिंताओं को उठाया है। G20 अध्यक्षता के दौरान भी ये मुद्दे मुख्य चर्चा में रहे। मोदी ने कहा कि वैश्विक विकास संतुलित तभी हो सकता है जब दुनिया के बड़े हिस्से पीछे न रहें।  READ MORE: Elon Musk ने मोदी सरकार को कोर्ट में दी चुनौती? जानें क्यों  लोकतंत्र और संसदीय शिक्षा  मोदी ने CSPOC सम्मेलन के व्यापक उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य विभिन्न देशों में संसदीय लोकतंत्र की जानकारी और समझ बढ़ाना है। मोदी ने भारत के लोकतंत्र की मजबूती और विविधता को इसकी ताकत बताया। उन्होंने इसे एक बड़े पेड़ की तरह बताया, जिसकी जड़ें गहरी हैं और शाखाएं बहस, संवाद और सामूहिक निर्णय लेने के लिए फैली हुई हैं।  READ MORE: X पर पीएम मोदी का दबदबा, भारत में सबसे ज्यादा पसंद किए गए पोस्ट  मोदी ने कहा कि भारत सिर्फ टेक्नोलॉजी प्रदाता नहीं है, बल्कि प्रशासन, कानून निर्माण और डिजिटल सिस्टम के अनुभव साझा करने वाला साझेदार बनना चाहता है। इस सम्मेलन में यह संदेश भी गया कि भविष्य में टेक्नोलॉजी और लोकतंत्र को एक साथ विकसित करना जरूरी है, खासकर उन देशों के लिए जो अभी अपनी आधारभूत प्रणाली बना रहे हैं। 

Don't Miss