फोल्डेबल फोन की मजबूती: हिंज, स्क्रीन और वाटर रेजिस्टेंस कितने टिकाऊ हैं?

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September 10, 2026

Foldable Phone Durability : क्या फोल्डेबल फोन सच में रोजाना इस्तेमाल के लिए उतने ही मजबूत हैं, जितने सामान्य स्मार्टफोन? आज नया फोन खरीदते समय कैमरा, प्रोसेसर, बैटरी और AI फीचर्स पर खूब ध्यान दिया जाता है, लेकिन फोन की मजबूती अक्सर पीछे छूट जाती है। सोचिए, आपने 40,000 या 80,000 रुपये का फोन खरीदा और कुछ महीनों बाद वह गिरकर टूट गया। स्क्रीन बदलवाने में हजारों रुपये जा सकते हैं। कई बार लोग नया फोन खरीदने तक को मजबूर हो जाते हैं। एक डिस्प्ले ग्लास कंपनी की स्टडी के मुताबिक, भारत में 53% लोगों ने पुराने फोन का ग्लास टूटने के कारण समय से पहले नया स्मार्टफोन खरीदा। ऐसे में आज फोन की ड्यूरेबिलिटी भी खरीदारी का बड़ा पैमाना बन गई है।

फोल्डेबल फोन की मजबूती आखिर तय कैसे होती है?

सिर्फ गोरिल्ला ग्लास लगा होना फोन को पूरी तरह मजबूत नहीं बनाता। इसकी मजबूती कई चीजों पर निर्भर करती है। प्रीमियम फोन में अब टाइटेनियम और एयरोस्पेस ग्रेड एल्यूमिनियम जैसे मटीरियल इस्तेमाल होते हैं। टाइटेनियम डेंट और मुड़ने से बेहतर सुरक्षा देता है। एल्यूमिनियम गिरने के झटके को सोखने और गर्मी बाहर निकालने में मदद करता है। बजट फोन में प्लास्टिक फ्रेम ज्यादा आम है। यह हल्का होता है, लेकिन प्रीमियम मटीरियल जितना मजबूत नहीं माना जाता।

फोन का डिजाइन भी उतना ही जरूरी है। मजबूत यूनिबॉडी, अंदरूनी फ्रेम, शॉक-अब्जॉर्बिंग लेयर और मजबूत कॉर्नर गिरने के बाद नुकसान कम कर सकते हैं। फोल्डेबल फोन में चुनौती और बढ़ जाती है। इसमें स्क्रीन के साथ हिंज भी होता है। इसलिए सामान्य फोन के मुकाबले इसकी बनावट ज्यादा जटिल होती है।

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फोल्डेबल फोन का हिंज कितना टिकाऊ है?

आज के फोल्डेबल फोन में हिंज पहले के मुकाबले काफी बेहतर हो चुका है। Samsung, OnePlus और Google जैसे ब्रांड अपने फोल्डेबल मॉडल में हिंज की टिकाऊपन पर खास ध्यान दे रहे हैं। कुछ मॉडल में 2 लाख से 5 लाख बार तक फोन को खोलने और बंद करने की क्षमता का दावा किया जाता है। अगर कोई व्यक्ति दिन में 100 बार फोन खोले-बंद करे, तो इस आंकड़े के हिसाब से यह कई साल तक चल सकता है। धूल से बचाव के लिए भी हिंज में नई तकनीक इस्तेमाल हो रही है। कुछ कंपनियां ब्रश जैसी संरचना का इस्तेमाल करती हैं। इसका मकसद छोटे कणों को हिंज के अंदर पहुंचने से रोकना है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि फोन पूरी तरह धूल से सुरक्षित है। खासकर बारीक धूल और रेत अभी भी फोल्डेबल फोन के लिए चुनौती हैं।

स्क्रीन अभी भी फोल्डेबल फोन की सबसे कमजोर कड़ी

फोल्डेबल फोन का सबसे संवेदनशील हिस्सा उसकी अंदरूनी स्क्रीन है। इसमें Ultra Thin Glass यानी UTG के साथ प्लास्टिक की सुरक्षात्मक परत होती है। यह स्क्रीन देखने और छूने में सामान्य ग्लास जैसी लग सकती है। लेकिन यह पारंपरिक स्मार्टफोन के कड़े ग्लास जितनी मजबूत नहीं होती। नाखून या किसी नुकीली चीज से ज्यादा दबाव पड़ने पर स्क्रीन पर निशान या खरोंच आ सकती है। यही वजह है कि फोल्डेबल फोन इस्तेमाल करते समय थोड़ी ज्यादा सावधानी जरूरी है। स्क्रीन के बीच में हल्की क्रीज भी दिखाई दे सकती है। समय के साथ यह कुछ ज्यादा नजर आ सकती है। हालांकि सामान्य तौर पर इससे स्क्रीन की कार्यक्षमता पर असर नहीं पड़ता।

पानी से सुरक्षा बेहतर, धूल अभी भी बड़ी चुनौती

शुरुआती फोल्डेबल फोन में पानी से सुरक्षा बड़ी समस्या थी। अब प्रीमियम मॉडल इस मामले में काफी आगे निकल चुके हैं। कई फोल्डेबल फोन में IPX8 रेटिंग मिलती है। इसका मतलब साफ पानी में करीब 1.5 मीटर गहराई तक 30 मिनट रहने जैसी स्थिति में फोन को सुरक्षा मिल सकती है, लेकिन यहां एक जरूरी अंतर है। IPX8 पानी से सुरक्षा बताता है, धूल से नहीं। नए कुछ मॉडल IP48 जैसी रेटिंग के साथ आते हैं। इससे छोटे कणों से कुछ सुरक्षा मिलती है। फिर भी बारीक धूल और रेत हिंज के लिए परेशानी बन सकती है, इसलिए समुद्र किनारे, धूल भरी जगहों या बहुत गंदे वातावरण में फोल्डेबल फोन इस्तेमाल करते समय सावधानी जरूरी है।

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Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।