Rupee vs Dollar : भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 96.43 पर पहुंच गया है। यह दो महीने से ज्यादा समय में रुपये का सबसे कमजोर स्तर है। पिछले हफ्ते भी रुपये में गिरावट आई थी। विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजारों से पैसा निकालने का असर रुपये पर साफ दिखाई दे रहा है। इस गिरावट के बाद रुपया मई में दर्ज किए गए अपने रिकॉर्ड के निचले स्तर 96.96 के और करीब पहुंच गया है। इससे बाजार में उम्मीद बढ़ी है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को संभालने के लिए आगे और कदम उठा सकता है।
भारतीय रुपया 96.43 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंचा, जानें क्यों कमजोर हुआ रुपया, RBI कैसे संभाल रहा है स्थिति।
RBI बेच रहा है डॉलर
रुपये की गिरावट को रोकने के लिए RBI पहले से बाजार में डॉलर बेच रहा है। इससे बाजार में डॉलर की ज्यादा मांग को पूरा करने में मदद मिलती है और रुपये पर दबाव कुछ कम होता है। हालांकि, ट्रेडर्स का मानना है कि रुपये पर गिरावट का दबाव अभी बना रह सकता है। विश्लेषकों को अगले एक साल में भी रुपये के कमजोर होने की आशंका है। RBI के पास विदेशी मुद्रा का बड़ा भंडार है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक डॉलर के प्रवाह को संभालने के लिए करेंसी स्वैप का भी इस्तेमाल कर चुका है। DBS ने कहा कि RBI की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप मजबूत रहा है। हालांकि, केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहेगा। इसका मकसद सही समय पर डॉलर बेचना और रिजर्व पर ज्यादा दबाव से बचना है।
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विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी बड़ी चिंता
रुपये की आगे की चाल काफी हद तक विदेशी निवेश पर निर्भर करेगी। अगर विदेशी निवेशक भारतीय संपत्तियों से पैसा निकालते रहे, तो डॉलर की मांग बढ़ी रह सकती है। RBI गिरावट की रफ्तार को कम कर सकता है, लेकिन अकेले रुपये की दिशा बदलना मुश्किल हो सकता है। अब बाजार की नजर विदेशी बिकवाली और RBI के समर्थन पर है। डॉलर ज्यादा तेजी से बेचने पर भविष्य में RBI के पास रुपये को संभालने के लिए कम रिजर्व बच सकता है।
