KK Menon Web Series: अपराध, सत्ता और अंडरवर्ल्ड पर बनी कहानियों का भारतीय दर्शकों में हमेशा अलग ही क्रेज रहा है। ‘मिर्जापुर’ जैसी सीरीज ने देसी गैंगवार और बहुबल को जिस तरह से दिखाया है, उसने दर्शकों के बीच एक अलग जगह बना ली है। अब उसी तरह का रोमांच देने वाली एक नई वेब सीरीज ‘मुर्शिद’ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ चुकी है। यह कहानी मुंबई के अंडरवर्ल्ड की उस दुनिया को दिखाती है, जहां डर, सत्ता और बदले का खेल चलता है।
मुर्शिद वेब सीरीज एक दमदार गैंगस्टर ड्रामा है जो मुंबई के अंडरवर्ल्ड, रिश्तों और बदले की कहानी दिखाती है, जानें कहां देख सकते हैं इसे।
क्या है ‘मुर्शिद’ की कहानी
श्रवण तिवारी के निर्देशन में बनी ‘मुर्शिद’ एक गैंगस्टर ड्रामा है, जिसमें रिश्तों, वफादारी और मजबूरी की कहानी दिखाई गई है। इसका मुख्य किरदार मुर्शिद पठान है, जो कभी मुंबई के अंडरवर्ल्ड का बड़ा नाम था, लेकिन अब उसने अपराध की दुनिया छोड़ दी है और शांति से जीवन जी रहा है, लेकिन उसकी शांत जिंदगी ज्यादा समय तक नहीं टिकती। उसका पुराना साथी फरीद, जो अब उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका है, सत्ता की लालच में मुर्शिद के छोटे बेटे को अपने जाल में फंसा लेता है। अपने परिवार को बचाने के लिए मुर्शिद को फिर से उसी खतरनाक दुनिया में लौटना पड़ता है जिसे वह छोड़ चुका था।
कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब मुर्शिद का गोद लिया बेटा कुमार प्रताप राणा सामने आता है। वह एक ईमानदार पुलिस अफसर है। अब वह अपने फर्ज और अपने पिता जैसे इंसान के बीच भावनात्मक संघर्ष में फंस जाता है। यही टकराव कहानी को और ज्यादा गहरा और रोमांचक बनाता है।
दमदार स्टारकास्ट और शानदार एक्टिंग
इस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसकी एक्टिंग है। के. के. मेनन ने मुर्शिद पठान के किरदार को बहुत ही मजबूत और भावनात्मक तरीके से निभाया है। उन्होंने एक टूटे हुए पिता और पुराने गैंगस्टर की जंग को बहुत अच्छे से दिखाया है।
जाकिर हुसैन ने फरीद के रोल में क्रूरता और चालाकी को बेहद प्रभावशाली अंदाज में पेश किया है। वहीं, तनुज विरवानी ने एक ईमानदार पुलिस अफसर के रूप में कहानी में संतुलन और नैतिकता का पहलू जोड़ा है, जिससे कहानी और दिलचस्प बनती है।
READ MORE: सोशल मीडिया पर पहचान छुपाना पड़ेगा भारी, नए नियमों से मचेगी हलचल
निर्देशन और तकनीकी पक्ष
निर्देशक श्रवण तिवारी ने मुंबई के अंडरवर्ल्ड को बेहद यथार्थवादी और गहराई के साथ दर्शाया है। 1990 के दशक की मुंबई और आज के आपराधिक जगत के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। सिनेमैटोग्राफी में अंधेरी गलियां, राजनीतिक कमरे और तनाव से भरी दुनिया को बहुत अच्छे तरीके से दिखाया गया है। ‘मिर्जापुर’ में जहां देसी भाषा और कट्टों का असर था। वहीं, ‘मुर्शिद’ में मुंबई की भाषा और पुराने अंडरवर्ल्ड का अलग अंदाज देखने को मिलता है।
READ MORE: OTT पर ‘Tu Yaa Main’ की धमाकेदार वापसी…जानें तारीख
रेटिंग और क्लाइमैक्स
जहां ‘मिर्जापुर’ की IMDb रेटिंग 8.4 है। वहीं, ‘मुर्शिद’ को 7.3 की रेटिंग मिली है। सीरीज का क्लाइमैक्स बेहद रोमांचक है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है। आखिरी एपिसोड्स में सत्ता, पुलिस और गैंगस्टर के बीच का टकराव बहुत ही दिलचस्प और तनावपूर्ण हो जाता है।
