Vibe Coding क्या है और क्यों हो रही है इसकी चर्चा?

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Vibe Coding क्या है और क्यों हो रही है इसकी चर्चा?
April 5, 2025

Vibe Coding गैर-तकनीकी लोगों के लिए एक उपयोगी उपकरण साबित हो सकता है, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं हैं।

Vibe Coding : आजकल टेक्नोलॉजी की दुनिया में Vibe Coding नाम का एक नया ट्रेंड तेजी से पॉपुलर हो रहा है। अगर आपने भी इसका नाम सुना है और सोच रहे हैं कि ये आखिर है क्या? तो आप सही जगह पर हैं। सीधे शब्दों में कहें तो वाइब कोडिंग उन लोगों के लिए कोडिंग को आसान बना रहा है, जिन्हें तकनीकी ज्ञान नहीं है। अगर आपको कोडिंग नहीं आती, फिर भी आप अपनी वेबसाइट, ऐप या कोई और डिजिटल टूल बना सकते हैं वो भी बिना किसी परेशानी के।

Vibe Coding क्या है?

ये एक ऐसा तरीका है, जिसमें आप बिना टेक्निकल कोडिंग सीखे AI टूल्स की मदद से कोड बना सकते हैं। यानी, जहां पहले कोडिंग सीखने में सालों लग जाते थे, अब वही काम मिनटों में हो सकता है। OpenAI के को-फाउंडर आंद्रेज कारपाथी ने वाइब कोडिंग को ऐसे परिभाषित किया है कि “अब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल केवल डेवलपर्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोई भी व्यक्ति अपने आइडियाज को आसानी से हकीकत में बदल सकता है।”

Vibe Coding कैसे काम करता है?

इसमें आपको कोड लिखने की जरूरत नहीं पड़ती। बस टेक्स्ट में अपनी जरूरत बताइए और एआई खुद कोड बना देगा। आप एक सिंपल कैलकुलेटर ऐप बनाना चाहते हैं, लेकिन आपको कोडिंग नहीं आती। इसके लिए आप बस इतना लिखेंगे ‘मुझे एक कैलकुलेटर ऐप चाहिए, जिसमें जोड़ने, घटाने, गुणा और भाग के ऑप्शन हों।‘ अब एआई इस इनपुट को प्रोसेस करेगा और आपको रेडीमेड कोड तैयार करके दे देगा।

Vibe Coding के फायदे

  • कोई भी कर सकता है: टेक्निकल नॉलेज के बिना भी लोग कोडिंग कर सकते हैं।
  • समय की बचत: जहां पहले कोडिंग में हफ्तों लगते थे, अब मिनटों में काम हो सकता है।
  • छोटे प्रोजेक्ट्स के लिए परफेक्ट: वेबसाइट डिजाइन, ऐप डेवलपमेंट या डेटा एनालिसिस जैसे छोटे काम आसानी से हो सकते हैं।
  • क्रिएटिविटी को बढ़ावा: अब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के लिए आपको कोडिंग सीखने की जरूरत नहीं।

Vibe Coding के नुकसान

  • गलतियों की संभावना : एआई द्वारा बनाया गया कोड हमेशा सही नहीं होता, उसमें बग्स हो सकते हैं।
  • सिक्योरिटी रिस्क : मशीन द्वारा लिखा गया कोड पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होता, साइबर अटैक का खतरा रहता है।
  • कस्टमाइजेशन की जरूरत : हर बार एआई का कोड आपकी जरूरतों के हिसाब से परफेक्ट नहीं होता, उसे एडिट करना पड़ता है।
  • ट्रेडिशनल कोडिंग की जगह नहीं ले सकता : बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स के लिए अभी भी एक्सपर्ट डेवलपर्स की जरूरत रहेगी।

Ragini Sinha

5 साल के अनुभव के साथ मैंने मीडिया जगत में कंटेट राइटर, सीनियर कंटेंट राइटर, मीडिया एनालिस्ट और प्रोग्राम प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया है। बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव को मैंने कवर किया है। अपने काम को लेकर मुझे पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। काम को जल्दी सीखने की कला मुझे औरों से अलग बनाती है।

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