Indonesia Grok AI ban: Deepfake, बच्चों की सुरक्षा और Artificial Intelligence की बेलगाम ताक़त इन तीनों के टकराव के बीच इंडोनेशिया ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। विवादों में घिरे AI चैटबॉट Grok को भले ही देश में दोबारा एंट्री मिल गई हो, लेकिन यह वापसी बिना शर्त नहीं है। सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि ज़रा-सी चूक भी Grok को फिर से बैन की ओर धकेल सकती है।
AI तकनीक और डिजिटल सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए इंडोनेशिया ने Grok पर से बैन हटाया…जानिए शर्त तोड़ने पर क्या होगी कार्रवाई।
सरकार को दिया गया भरोसा
Ministry of Communication and Digital Affairs के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने सरकार को एक औपचारिक पत्र सौंपा है। इसमें बताया गया है कि Grok के दुरुपयोग को रोकने के लिए नए तकनीकी सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। जिससे आपत्तिजनक और अवैध कंटेंट के निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
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कड़ी निगरानी का अल्टीमेटम
डिजिटल स्पेस सुपरविजन के महानिदेशक Alexander Sabar ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि Grok की गतिविधियों पर लगातार परीक्षण और निगरानी की जाएगी। अगर भविष्य में यह एआई बच्चों से जुड़े कानूनों का उल्लंघन करता है या गैरकानूनी सामग्री फैलाता है, तो उस पर दोबारा प्रतिबंध लगाने में सरकार कोई नरमी नहीं बरतेगी।
विवाद के क्या थे कारण?
बता दें कि Grok पर आरोप है कि वह यूजर्स के निर्देश पर महिलाओं और बच्चों की यौन रूप से स्पष्ट डीपफेक तस्वीरें तैयार कर रहा था। इसी वजह से इस साल की शुरुआत में इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलीपींस ने एक साथ इस एआई चैटबॉट पर प्रतिबंध लगाया। जिसके बाद से विश्वस्तर पर एआई की भूमिका पर सवाल उठने लगे।
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दक्षिण-पूर्व एशिया का रुख
बाद में फिलीपींस ने सबसे पहले Grok पर से प्रतिबंध हटाया। इसके कुछ ही दिनों बाद मलेशिया ने भी यही बैन हटा लिया। हालांकि इन दोनों देशों ने भी यह साफ किया कि भविष्य में किसी भी तरह की गलती दोहराने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और निगरानी व्यवस्था बनी रहेगी। अब इस सूची में इंडोनेशिया का नाम भी शामिल हो गया है।
विश्वस्तर पर जांच का दबाव
Grok की मुश्किलें केवल एशिया तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य और ब्रिटेन के मीडिया नियामक भी इस एआई सिस्टम की भूमिका की जांच कर रहे हैं। यानी अब, एआई से जुड़े नैतिक, कानूनी और सामाजिक सवाल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बहस का विषय बन चुके हैं।
अब आने वाले समय में यह देखना होगा कि Grok इन सख्त शर्तों का पालन करता है या नहीं, क्योंकि तकनीकी प्रगति के साथ सामाजिक सुरक्षा की परीक्षा अब और कठिन होती जा रही है।
