भारत के लिए Google की AI रणनीति: इन पर रहेगा फोकस

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भारत के लिए Google की AI रणनीति: इन पर रहेगा फोकस
December 16, 2025

Google India AI: भारत में AI की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। इसी बीच Google ने भारत को लेकर अपनी AI से जुड़ी कई अहम योजनाओं और वादों की घोषणा की है। ये ऐलान एक कार्यक्रम के दौरान किए गए हैं, जो India AI Impact Summit 2026 के साथ आयोजित हुआ था। Google का कहना है कि वह भारत के डिजिटल और AI इकोसिस्टम के साथ लंबे समय तक जुड़कर काम करना चाहता है। इसका फोकस सिर्फ टेक्नोलॉजी पर नहीं, बल्कि पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और समाज पर बड़े स्तर पर असर डालने वाले उपयोगों पर है।

Google की नई AI पहल भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल रिकॉर्ड, कृषि सलाह, भारतीय भाषाओं और सोलर एनर्जी को मजबूत करने पर केंद्रित है, कंपनी ने करोड़ों डॉलर की फंडिंग का ऐलान किया है।

हेल्थकेयर में AI को मजबूत करने की योजना

Google की घोषणाओं में सबसे अहम हिस्सा हेल्थकेयर से जुड़ा है। कंपनी ने बताया कि वह 400,000 डॉलर की फंडिंग के जरिए भारत के लिए खास हेल्थ फाउंडेशन AI मॉडल बनाने में सहयोग करेगी। इसके लिए Google का MedGemma प्लेटफॉर्म इस्तेमाल किया जाएगा।

पहले चरण में AIIMS के डॉक्टरों के साथ मिलकर त्वचा रोग और OPD ट्रायजिंग से जुड़े AI मॉडल तैयार करेगी। इन मॉडलों का मकसद यह है कि मरीजों को जल्दी और बेहतर इलाज मिल सके। Google ने कहा है कि इन प्रयासों का आउटपुट भारत की डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में जोड़ा जाएगा, ताकि पूरा हेल्थ सिस्टम इसका फायदा उठा सके। इसके अलावा IISc बेंगलुरु के रिसर्चर्स भी AI आधारित क्लिनिकल समाधान पर काम करेंगे।

मेडिकल रिकॉर्ड्स को आसान और समझने योग्य बनाना

भारत में मेडिकल रिकॉर्ड्स अक्सर बिखरे हुए और जटिल होते हैं। इसे सुधारने के लिए Google, NHA के साथ मिलकर काम कर रहा है। कई बार डॉक्टरों की लिखी रिपोर्ट और नोट्स होती हैं, जिन्हें मरीज आसानी से नहीं समझ पाते। Google इन्हें FHIR स्टैंडर्ड में बदलने में मदद करेगा। इससे मरीज अपने रिकॉर्ड्स को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे, अस्पतालों में कागजी काम कम होगा और सरकार को हेल्थ पॉलिसी बनाने में सही डेटा मिलेगा।

अस्पताल और क्लीनिक ढूंढना होगा आसान

Google ने यह भी बताया कि वह NHA के साथ मिलकर 4 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड हेल्थ फैसिलिटी को Google Maps और Search पर लाने की तैयारी कर रहा है। इसमें अस्पताल, क्लीनिक और डायग्नोस्टिक लैब्स शामिल हैं।

इस कदम से खासकर छोटे शहरों और कस्बों में लोगों को सही इलाज ढूंढने में मदद मिलेगी। हालांकि, इसका असली फायदा तभी होगा जब जानकारी सही और समय-समय पर अपडेट की जाती रहे।

भारत के AI रिसर्च सेंटर्स को सपोर्ट

AI रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए Google.org ने 8 मिलियन डॉलर देने की घोषणा की है। यह फंड भारत सरकार द्वारा बनाए गए 4 AI Centres of Excellence को मिलेगा। ये सेंटर निम्न संस्थानों में हैं।

  • IISc बेंगलुरु
  • IIT कानपुर
  • IIT मद्रास
  • IIT रोपड़

इन सेंटर्स में नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज, शहरी प्रशासन, शिक्षा और कृषि जैसे अहम विषयों पर AI रिसर्च की जा रही है।

भारतीय भाषाओं के लिए खास पहल

भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए Google ने IIT बॉम्बे में Indic Language Technologies Research Hub के लिए 2 मिलियन डॉलर की फंडिंग का ऐलान किया है। यह केंद्र प्रोफेसर पुष्पक भट्टाचार्य की स्मृति में बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि आने वाले समय में AI सिस्टम भारतीय भाषाओं को बेहतर तरीके से समझ सकें और ज्यादा लोगों तक टेक्नोलॉजी पहुंच सके।

स्टार्टअप्स और ओपन AI मॉडल्स को बढ़ावा

Google ने बताया कि भारत के कई स्टार्टअप उसके Gemma ओपन मॉडल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी कड़ी में

  • AI और CoRover.AI को 50,000-50,000 डॉलर की फंडिंग दी जाएगी।
  • IIT बॉम्बे को भी 50,000 डॉलर मिलेंगे, जिससे हेल्थ गवर्नेंस से जुड़े डॉक्यूमेंट्स और भारत-केंद्रित डेटा पर काम होगा।

इसके अलावा, Gemma के सभी 22 मॉडल्स को भारत सरकार के AIKosh प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है, ताकि डेवलपर्स आसानी से इनका उपयोग कर सकें।

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फ्रंटलाइन वर्कर्स, किसान और AI

Google ने बताया कि Khushi Baby ने Open Health Stack पर बने टूल्स की मदद से राजस्थान में 3.5 करोड़ से ज्यादा TB स्क्रीनिंग की हैं। रिसर्च के अनुसार, AI टूल्स से ASHA वर्कर्स हर साल करीब 9.8 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण विजिट्स कर सकती हैं। इससे पब्लिक हेल्थ सिस्टम में लगभग 390 अरब की बचत संभव है।

खेती के क्षेत्र में Google.org ने Wadhwani AI को 2.5 मिलियन डॉलर और Garuda नाम के भारतीय भाषा मॉडल के लिए 2 मिलियन डॉलर देने की घोषणा की है। यह मॉडल AgriVaani ऐप को सपोर्ट करेगा, जिससे किसानों तक सही जानकारी उनकी भाषा में पहुंच सके।

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AI और स्वच्छ ऊर्जा का संतुलन

AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती ऊर्जा जरूरत को देखते हुए Google ने ReNew Energy के साथ मिलकर राजस्थान में 150 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने का ऐलान किया है। यह Google की भारत में चल रही विंड और सोलर परियोजनाओं का ही हिस्सा है।

Ragini Sinha

5 साल के अनुभव के साथ मैंने मीडिया जगत में कंटेट राइटर, सीनियर कंटेंट राइटर, मीडिया एनालिस्ट और प्रोग्राम प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया है। बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव को मैंने कवर किया है। अपने काम को लेकर मुझे पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। काम को जल्दी सीखने की कला मुझे औरों से अलग बनाती है।

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Google और Khan Academy का AI शिक्षा में नया बदलाव

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Khan Academy AI: Google ने हाल ही में Khan Academy के साथ साझेदारी की घोषणा की है। इसका उद्देश्य AI सहायता वाले लर्निंग टूल्स तैयार करना है, जो छात्रों और शिक्षकों दोनों की कक्षा में मदद करेंगे। इस साझेदारी की जानकारी इस साल ब्रिटिश Bett कॉन्फ्रेंस में दी गई है, जिसमें Google ने बताया है कि वह Gemini AI मॉडल्स को Khan Academy के लर्निंग प्लेटफॉर्म में शामिल करेगा।  Khan Academy में Google का Gemini AI शामिल, Writing और Reading Coach छात्रों की पढ़ाई को आसान और प्रभावी बनाएंगे।   शिक्षक की जगह नहीं, मदद के लिए AI  Google और Khan Academy का कहना है कि AI का मकसद शिक्षक की जगह लेना नहीं, बल्कि छात्रों की पढ़ाई में मदद करना है। इस साझेदारी का लक्ष्य खासतौर पर मिडल और हाई स्कूल के छात्रों की पढ़ाई और लेखन में कमियों को पूरा करना है।  छात्रों के सीखने के तरीके के अनुसार टूल्स  Google के अनुसार, प्रभावी AI लर्निंग साइंस पर बेस्ड होना चाहिए। Khan Academy के शिक्षकों का सालों का अनुभव AI टूल्स को छात्रों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार तैयार करने में इस्तेमाल किया गया है। स्कूलों ने खासतौर पर साक्षरता को बड़ी चुनौती बताया है और यह साझेदारी उसी समस्या को हल करने के लिए बनाई गई है।  AI से मार्गदर्शन  Khan Academy ने अपना नया Writing Coach पेश किया है, जो Gemini AI द्वारा संचालित है। यह टूल छात्रों के लिए निबंध नहीं लिखता, बल्कि उन्हें आउटलाइन बनाने, लेखन और संपादन करने की प्रक्रिया में मार्गदर्शन करता है। इसका उद्देश्य छात्रों को सोचने और विचार व्यक्त करने की क्षमता देना है।  शिक्षक इसे पूर्ण इंटरएक्टिव मोड या केवल फीडबैक मोड में इस्तेमाल कर सकते हैं। टूल अमेरिका में कक्षा 7 से 12 के छात्रों के लिए उपलब्ध है और बीटा वर्जन कक्षा 5 और 6 के छात्रों के लिए भी है। यह persuasive writing, expository

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