Anthropic AI Test : Anthropic के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि छोटे AI मॉडल आने वाले महीनों में कमजोर सुरक्षा वाले इंटरनेट से जुड़े डिवाइसों पर खुद को फैलाने में सक्षम हो सकते हैं। हालांकि, यह खतरा अभी प्रयोगों पर आधारित है। असल दुनिया में ऐसा AI वायरस फैलने का कोई सबूत नहीं मिला है।
क्या आपका स्मार्ट टीवी या कैमरा AI साइबर हमले का हिस्सा बन सकता है? Anthropic के नए शोध में जानें छोटे AI मॉडल की क्षमता, प्रयोग के नतीजे और डिवाइस सुरक्षित रखने के तरीके।
AI मॉडल ने क्या कर दिखाया?
शोधकर्ताओं ने जांच की कि AI मॉडल अनजान हार्डवेयर पर अपना काम शुरू करके दूसरे डिवाइसों तक पहुंच सकते हैं या नहीं। 9 अरब पैरामीटर वाले मॉडल ने 9 में से 8 तरह के हार्डवेयर पर AI चलाने में सफलता पाई। एक दूसरे प्रयोग में 26 अरब पैरामीटर वाले मॉडल को कम कीमत वाले 15 Android TV बॉक्स पर चलाया गया। इसकी रफ्तार करीब 0.39 टोकन प्रति सेकंड रही। यानी यह प्रक्रिया काफी धीमी थी।
प्रयोग में कैसे फैला AI मॉडल?
Anthropic ने Google Cloud के एक अलग और सुरक्षित नेटवर्क में प्रयोग किया। इसमें Android डिवाइसों पर ऐसा एजेंट चलाया गया, जिनमें बिना प्रमाणीकरण के डिबगिंग पोर्ट खुला था। GLM-5.2 मॉडल ने 5 में से 4 परीक्षणों में सभी 8 टारगेट डिवाइसों तक पहुंच बनाई। एक अन्य परीक्षण में यह 7 डिवाइसों तक पहुंचा, लेकिन इसकी एक बड़ी सीमा थी। मॉडल को किसी असली सुरक्षा खामी को खुद खोजने या उसका फायदा उठाने की जरूरत नहीं पड़ी। Anthropic के मुताबिक, इस प्रयोग के नतीजे वास्तविक दुनिया में सफलता की संभावना का अधिकतम अनुमान हैं। कंपनी का अनुमान है कि मौजूदा रफ्तार जारी रही तो छोटे मॉडल 2026 के अंत तक इस क्षमता के स्तर तक पहुंच सकते हैं। यह केवल एक अनुमान है।
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स्मार्ट टीवी और कैमरों पर क्यों है खतरा?
स्मार्ट टीवी, कैमरे, घरेलू उपकरण और छोटे कारोबारों में इस्तेमाल होने वाले डिवाइसों की सुरक्षा अक्सर कमजोर होती है। इनमें सीमित मेमोरी भी होती है। ऐसे में AI मॉडल कई डिवाइसों की ताकत जोड़कर काम कर सकता है। शोध के उदाहरणों में ऐसे नेटवर्क को फैलने में एक दिन से ज्यादा लग सकता है। लेकिन कई डिवाइसों में फैलने के बाद इसे रोकना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसे बंद करने के लिए कोई एक केंद्रीय सर्वर नहीं होगा।
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अपने डिवाइस को कैसे सुरक्षित रखें?
यूजर्स को डिवाइस के डिफॉल्ट पासवर्ड बदलने चाहिए, फर्मवेयर अपडेट करते रहना चाहिए और इस्तेमाल न होने वाली रिमोट एक्सेस सुविधा बंद रखनी चाहिए। स्मार्ट डिवाइसों को जरूरी निजी या ऑफिस कंप्यूटर से अलग नेटवर्क पर रखना भी मददगार हो सकता है। सुरक्षा टीमें असामान्य रूप से बड़े डाउनलोड, लगातार डिवाइसों के बीच डेटा ट्रैफिक और संदिग्ध स्कैनिंग पर नजर रख सकती हैं।
