RBI का बड़ा फैसला, डिजिटल रुपया और टोकनाइजेशन पर जोर

RBI का बड़ा फैसला, डिजिटल रुपया और टोकनाइजेशन पर जोर

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October 6, 2026

RBI Crypto Caution : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर साफ किया है कि वह निजी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सतर्क है। वहीं, बैंक ब्लॉकचेन तकनीक, टोकनाइज्ड सिक्योरिटीज और डिजिटल रुपया जैसे इस्तेमाल को आगे बढ़ा रहा है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 3 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में बैंक की नीति पर विस्तार से बात की। मल्होत्रा ने कहा कि RBI का रुख क्रिप्टो और उसके पीछे इस्तेमाल होने वाली तकनीक को लेकर अलग-अलग है। बैंक डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) और टोकनाइजेशन को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन क्रिप्टो एसेट्स के मामले में उसका रुख अभी भी “सावधानी भरा” है।

RBI ने क्रिप्टो और ब्लॉकचेन को लेकर अपना रुख साफ किया, क्रिप्टो पर सख्ती के बीच डिजिटल रुपया, टोकनाइजेशन और CBDC पर तेजी से काम जारी है।

क्रिप्टो पर RBI क्यों है सावधान?

RBI की चिंता का सबसे बड़ा कारण पैसे की एकरूपता यानी ‘singleness of money’ है। इसका मतलब है कि एक ही मुद्रा में मौजूद अलग-अलग तरह के पैसे की कीमत समान होनी चाहिए और उन्हें आसानी से एक-दूसरे में बदला जा सके। मल्होत्रा के मुताबिक, निजी क्रिप्टोकरेंसी और निजी तौर पर जारी डिजिटल करेंसी इस व्यवस्था में परेशानी पैदा कर सकती हैं। इसकी वजह उनकी कीमत, बैकिंग और भुगतान व्यवस्था में अंतर हो सकता है। यह मुद्दा मौद्रिक नीति और पूंजी के सीमा पार आने-जाने से भी जुड़ा है। भारत जैसे उभरते देशों में सरकारें विदेशी पूंजी के प्रवाह पर नियंत्रण रखती हैं। निजी डिजिटल करेंसी इस व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।

RBI गवर्नर ने यह भी कहा कि भारत में घरेलू भुगतान पहले ही तेज और कम लागत वाले हैं। इसलिए घरेलू पेमेंट को बेहतर बनाने के लिए निजी क्रिप्टो की जरूरत का तर्क मजबूत नहीं दिखता। उनके अनुसार असली चुनौती सीमा पार भुगतान की है। यहां CBDC और नियंत्रित भुगतान नेटवर्क के बीच कनेक्शन एक विकल्प बन सकता है।

क्रिप्टो पर पूरी तरह प्रतिबंध अभी नहीं

भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर अभी तक कोई व्यापक प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है। अक्टूबर की शुरुआत तक क्रिप्टो ट्रेडिंग मौजूदा टैक्स, एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और रिपोर्टिंग नियमों के तहत जारी है। जुलाई में सामने आए आंतरिक सरकारी दस्तावेजों के अनुसार RBI की नीति अब भी ‘प्रतिबंध की ओर झुकाव’ वाली बताई गई थी। अधिकारियों ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को क्रिप्टोकरेंसी और निजी स्टेबलकॉइन की होल्डिंग, ट्रेडिंग और दूसरे एक्सपोजर से अलग रखने की सिफारिश की थी। हालांकि, सरकार ने अभी तक पूरे डिजिटल एसेट बाजार के लिए कोई अलग और व्यापक कानून लागू नहीं किया है।

मल्होत्रा ने वित्तीय सिस्टम में सावधानी बरतने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों का अनुभव बताता है कि बैंकिंग संकट तेजी से बढ़ सकता है और उसे ठीक करने में कई साल लग सकते हैं। शुरुआती 2000 के दशक के खराब कर्ज और एनपीए की समस्या को साफ करने में करीब एक दशक लगा था।

टोकनाइजेशन और डिजिटल रुपये पर आगे बढ़ रहा RBI

क्रिप्टो से अलग RBI टोकनाइजेशन को लेकर तेजी से काम कर रहा है। सितंबर में ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल के दौरान मल्होत्रा ने प्रोग्रामेबल CBDC, टोकनाइज्ड सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट और होलसेल डिजिटल रुपये के जरिए सेटल होने वाले कॉरपोरेट बॉन्ड से जुड़े प्रोजेक्ट बताए थे। RBI के मुताबिक, यूनिफाइड मार्केट्स इंटरफेस के जरिए जारी टोकनाइज्ड सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट का इस्तेमाल यह समझने के लिए किया जा रहा है कि डिजिटल सेटलमेंट सिस्टम के साथ वित्तीय बाजार कैसे काम कर सकते हैं।

RBI और SEBI ने कॉरपोरेट बॉन्ड के क्षेत्र में भी कदम आगे बढ़ाया है। 10 सितंबर को SEBI ने टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड के लिए Demat 2.0 पायलट की सफल शुरुआत की। इसमें सिक्योरिटीज के रिकॉर्ड के लिए DLT का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि पैसे का सेटलमेंट केंद्रीय बैंक की मुद्रा में होता है। भारत में डिजिटल रुपये से सेटल किए गए पहले टोकनाइज्ड बॉन्ड सौदों की कुल राशि 1,025 करोड़ थी। इसमें REC ने 500 करोड़, Larsen & Toubro ने 500 करोड़ और IIFL ने 25 करोड़ का लेनदेन किया। इन बॉन्ड की कानूनी स्थिति सामान्य रेगुलेटेड सिक्योरिटीज जैसी ही रहती है। उनके अधिकार, ब्याज और भुगतान की शर्तें नहीं बदलतीं। टोकनाइजेशन केवल यह बदलता है कि मालिकाना हक और सेटलमेंट का रिकॉर्ड कैसे रखा जाता है। यह इन्हें क्रिप्टोकरेंसी नहीं बनाता।

डिजिटल रुपया और सीमा पार भुगतान पर फोकस

RBI डिजिटल रुपये के इस्तेमाल को भी बढ़ा रहा है। अगस्त में सरकार ने चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली के लिए CBDC आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर कार्यक्रम की घोषणा की थी। इसे 14 अगस्त से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत डिजिटल रुपये के जरिए शुरू किया जाना था। सितंबर में मल्होत्रा ने बताया कि प्रोग्रामेबल CBDC के पायलट में सरकारी भुगतान समेत कई इस्तेमाल के मामलों पर काम हो रहा है। RBI के अनुसार रिटेल डिजिटल रुपया भारत की संप्रभु मुद्रा का कानूनी दर्जा रखता है और इसे बैंक डिपॉजिट में बदला जा सकता है।

सीमा पार भुगतान भी RBI के एजेंडे में है। सितंबर में भारत और रूस ने CBDC के जरिए व्यापार भुगतान के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर बातचीत शुरू की। दोनों देशों के केंद्रीय बैंक अपनी-अपनी डिजिटल करेंसी के बीच कनेक्शन की संभावनाएं देख रहे हैं। भारत का UPI नेटवर्क भी विदेशों तक पहुंच रहा है। जुलाई में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार UPI सिंगापुर, फ्रांस, UAE, नेपाल और मॉरीशस जैसे देशों में काम कर रहा था। 2026 में कुछ नए पेमेंट लिंक भी जोड़े गए हैं।

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क्रिप्टो कंपनियों पर बढ़ी कार्रवाई

क्रिप्टो को लेकर सतर्क नीति के बावजूद भारत में सरकार ने इसकी निगरानी और नियमों का पालन कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। 2023 से वर्चुअल डिजिटल एसेट यानी VDA सर्विस प्रोवाइडर्स को Prevention of Money Laundering Act के तहत लाया गया है। भारतीय ग्राहकों को सेवाएं देने वाले प्लेटफॉर्म को Financial Intelligence Unit-India यानी FIU-IND में रिपोर्टिंग एंटिटी के रूप में रजिस्टर करना होता है। कंपनी का भारत में ऑफिस होना जरूरी नहीं है। इन कंपनियों पर रिपोर्टिंग, रिकॉर्ड रखने और दूसरे AML नियम लागू होते हैं। सरकारी नोटिस में यह भी कहा जाता रहा है कि क्रिप्टो एसेट और NFT निवेश उत्पाद के तौर पर रेगुलेटेड नहीं हैं और नुकसान होने पर जरूरी नहीं कि निवेशकों को कोई नियामकीय मदद मिले।

टैक्स कानून में भी वर्चुअल डिजिटल एसेट को जगह मिली हुई है। 1 अप्रैल 2026 से लागू Income Tax Act, 2025 में क्रिप्टोकरेंसी और टोकनाइज्ड एसेट समेत VDA की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। सितंबर में FIU-IND ने 15 वर्चुअल एसेट प्रोवाइडर्स को नोटिस जारी किए। इनमें Weex, Blofin, DigiFinex, WOO X, WhiteBIT और ChangeNow जैसे नाम शामिल हैं। इन पर रजिस्ट्रेशन नियमों का पालन नहीं करने का आरोप था। कार्रवाई में भारतीय यूजर्स के लिए उपलब्ध ऐप और URL हटाने की मांग भी शामिल थी।

ब्लॉकचेन पर रिसर्च में XRP और IOTA का जिक्र

दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के UCL Centre for Blockchain Technologies ने ब्लॉकचेन के व्यापक इस्तेमाल पर एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें XRP और IOTA को Internet of Value (IoV) के विकास को आगे बढ़ाने वाले खास प्रोटोकॉल बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार IoV ऐसी व्यवस्था है जिसमें इंटरनेट के जरिए पैसे और दूसरे डिजिटल एसेट का तुरंत पीयर-टू-पीयर ट्रांसफर हो सकता है। इसमें बिचौलियों की जरूरत कम हो सकती है। रिपोर्ट में स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट, कंसेंसस मैकेनिज्म और क्रिप्टोग्राफी जैसी तकनीकों को भी अहम बताया गया है। इसमें AI और 5G से IoT नेटवर्क और मशीन-टू-मशीन पेमेंट को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई है।

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RBI का संदेश साफ है

RBI का मौजूदा रुख क्रिप्टो को पूरी तरह स्वीकार करने के बजाय चुनिंदा तकनीक अपनाने का है। बैंक और फिनटेक कंपनियां क्रिप्टो सेवाओं को लेकर सख्त नियमों का सामना करती रहेंगी। वहीं, टोकनाइज्ड बॉन्ड, डिपॉजिट और दूसरे रेगुलेटेड डिजिटल एसेट प्रोजेक्ट के लिए माहौल ज्यादा अनुकूल हो सकता है। आने वाले समय में भारत के वित्तीय सिस्टम में ब्लॉकचेन का इस्तेमाल बढ़ सकता है, लेकिन निजी क्रिप्टोकरेंसी पर RBI की सख्ती फिलहाल जारी रहने की संभावना है।

DISCLAIMER: यह खबर उपलब्ध जानकारी और संबंधित आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार की गई है। क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट में निवेश जोखिम भरा हो सकता है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले खुद जानकारी जांचें और विशेषज्ञ की सलाह लें।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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