Zcash PGPZ को मिली बड़ी फंडिंग, क्रिप्टो कानूनों पर लॉबिंग तेज

Zcash PGPZ को मिली बड़ी फंडिंग, क्रिप्टो कानूनों पर लॉबिंग तेज

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October 5, 2026

Zcash Policy Group : Zcash से जुड़े पॉलिसी ग्रुप Pretty Good Policy for Zcash (PGPZ) ने अमेरिकी कांग्रेस में लॉबिंग के लिए आधिकारिक रजिस्ट्रेशन कराया है। ग्रुप को Zcash Community Grants (ZCG) से 750,000 डॉलर की ग्रांट मिली है। हालांकि, इस रकम में से कितनी राशि सीधे लॉबिंग पर खर्च होगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। PGPZ ने 1 अक्टूबर से प्रभावी Lobbying Disclosure Act (LD-1) रजिस्ट्रेशन दाखिल किया है। इसमें ग्रुप ने Digital Asset Market Clarity Act (H.R. 3633) समेत डिजिटल एसेट से जुड़े तीन बिलों पर लॉबिंग करने की बात कही है।

PGPZ की बड़ी तैयारी, 750,000 डॉलर की ग्रांट से अमेरिकी कांग्रेस में Zcash और डिजिटल एसेट कानूनों की पैरवी

PGPZ किन मुद्दों पर करेगा लॉबिंग?

फाइलिंग के अनुसार, PGPZ का काम Zcash ecosystem development, developer protections और financial privacy से जुड़ा है। ग्रुप ने अपने मुख्य मुद्दों में बैंकिंग, फाइनेंस, कंज्यूमर इश्यूज, साइंस एंड टेक्नोलॉजी और टैक्स को शामिल किया है। जिन खास बिलों पर PGPZ काम करेगा, उनमें Digital Asset Market Clarity Act (H.R. 3633), Aligning Digital Assets with Principles of Taxation Act और Digital Asset Tax Certainty Act शामिल हैं। फाइलिंग में दिविज पांड्या को PGPZ का इकलौता लॉबिस्ट बताया गया है। उन्होंने 1 अक्टूबर को इस रजिस्ट्रेशन पर डिजिटल साइन किया था। PGPZ ने वाशिंगटन, D.C. के 18th Street NW का पता भी दर्ज कराया है। LD-1 वह शुरुआती फॉर्म है जिसे अमेरिका में लॉबिंग शुरू करने से पहले दाखिल करना होता है। इसे क्लर्क और सीनेट के सेक्रेटरी के पास जमा किया जाता है। PGPZ ने खुद को ऐसा संगठन बताया है जो अपना लॉबिस्ट खुद नियुक्त करता है।

750,000 डॉलर की ग्रांट से जुड़ी पूरी जानकारी अभी नहीं

LD-1 फाइलिंग में यह नहीं बताया जाता कि लॉबिंग पर कितना पैसा खर्च किया जाएगा। इसमें यह भी नहीं बताया जाता कि किन सरकारी कार्यालयों से संपर्क किया गया या किन खास नीतियों का समर्थन किया जा रहा है। इन जानकारियों के लिए अलग LD-2 तिमाही रिपोर्ट दाखिल करनी होती है। अक्टूबर से दिसंबर की अवधि की पहली रिपोर्ट 20 जनवरी 2027 तक जमा करनी होगी, इसलिए लॉबिंग पर वास्तविक खर्च की तस्वीर बाद में साफ होगी। PGPZ की ग्रांट एप्लीकेशन में कहा गया है कि उसके काम का कुछ हिस्सा गोपनीय रहेगा। संगठन बैठकों की कुल संख्या, चर्चा किए गए मुद्दों और उनके नतीजों की जानकारी कुल आंकड़ों के रूप में देने की योजना बना रहा है।

ग्रांट कैसे मिली और Paul Brigner ने क्या किया?

PGPZ ने 21 अगस्त को Zcash Community Grants (ZCG) में 750,000 डॉलर की मांग वाला आवेदन दिया था। यह ग्रांट 12 महीने के लिए थी। ZCG ने 31 अगस्त की बैठक में इसे मंजूरी दे दी। इस बैठक की कार्यवाही के मुताबिक, PGPZ के फाउंडर और चेयरमैन पॉल ब्रिगनर ने इस प्रस्ताव की चर्चा से खुद को अलग रखा। बाकी चार समिति सदस्यों ने ग्रांट को मंजूरी देने के लिए वोट किया। बैठक के मिनट्स में बताया गया कि समिति के सदस्य Hanh ने पहले यह सवाल उठाया था कि क्या ZCG सरकारी अधिकारियों से सीधे संपर्क करने वाले काम को फंड कर सकता है। बाद में उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि ऐसा करना संभव है। ग्रांट आवेदन में कहा गया था कि ब्रिग्नर की ZCG समिति में भूमिका बनी रहेगी, लेकिन conflict-of-interest policy के तहत जरूरत पड़ने पर वह PGPZ से जुड़े मामलों से खुद को अलग करेंगे।

ग्रांट को लेकर सवाल भी उठे

18 सितंबर को एक फोरम यूजर ने PGPZ की ग्रांट पर सवाल उठाए। इसमें ब्रिगनर की अलग-अलग भूमिकाओं और आवेदन से मंजूरी के बीच कम समय का मुद्दा उठाया गया। इसके जवाब में 21 सितंबर को पंड्या ने कहा कि PGPZ की लॉबिंग सिर्फ Zcash ecosystem के लिए है। उन्होंने कहा कि संगठन किसी और के हित के लिए काम नहीं कर रहा है। पंड्या ने ब्रिगनर की भूमिका को रणनीतिक बताया और अपनी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की जिम्मेदारी से अलग बताया।

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PGPZ के बोर्ड में कौन-कौन है?

PGPZ की वेबसाइट के मुताबिक, ब्रिगनर बोर्ड के चेयरमैन हैं। वह Zcash Open Development Lab (ZODL) में chief policy and regulatory officer और ZCG समिति के सदस्य भी हैं। बोर्ड के दूसरे सदस्यों में इनमें a16z क्रिप्टो की रेगुलेटरी हेड मिशेल कोरवर, ब्लॉकचेन एसोसिएशन के इंडस्ट्री अफेयर्स के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट डैन स्पुलर, डिजिटल करेंसी ग्रुप की पॉलिसी वाइस प्रेसिडेंट जूली स्टिट्ज़ेल, और जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी के एंटोनिन स्कैलिया लॉ स्कूल के एसोसिएट प्रोफेसर जे.डब्ल्यू. वेरेट शामिल हैं।

वेबसाइट के अनुसार, Verret Zcash Foundation के डायरेक्टर भी हैं। हालांकि, PGPZ ने अपनी वेबसाइट पर साफ किया है कि उसका Zcash Foundation से कोई संबंध या समर्थन नहीं है। ग्रांट आवेदन के समय पांड्या, ZODL के adviser थे। ZODL ने PGPZ की घोषणा में कहा था कि PGPZ स्वतंत्र रूप से काम करता है और उसका अपना बजट, गवर्नेंस और बोर्ड है।

750,000 डॉलर कहां खर्च होगा?

PGPZ ने ग्रांट की रकम के इस्तेमाल का पूरा प्लान भी बताया है:

  • 400,000 डॉलर— ऑपरेशनल खर्च, मुआवज़ा और प्रोफेशनल सेवाएँ।
  • 125,000 डॉलर— फाइनेंशियल प्राइवेसी फ़ाउंडेशन के ज़रिए बैक-ऑफ़िस सपोर्ट।
  • 120,000 डॉलर— कानूनी, लॉबिंग, टैक्स और नियमों के पालन से जुड़े कामों के लिए काहिल गॉर्डन एंड रिंडेल लॉ फ़र्म।
  • 25,000 डॉलर— इवेंट्स।
  • 25,000 डॉलर — यात्रा और कांग्रेस से जुड़े दौरे।
  • 20,000 डॉलर— सरकारी मामलों से जुड़ा सॉफ़्टवेयर।
  • 10,000 डॉलर — रिसर्च और कम्युनिकेशन।
  • 25,000 डॉलर— आकस्मिक खर्चों के लिए रिज़र्व।

ग्रुप ने कहा है कि पहले साल वह Zcash ecosystem या ZCG के बाहर से फंडिंग नहीं मांगेगा। ग्रांट का इस्तेमाल campaign contributions या ZEC की market price बढ़ाने के प्रचार के लिए भी नहीं किया जाएगा।

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अब आगे क्या करेगा PGPZ?

30 सितंबर के अपडेट में पांड्या ने बताया कि PGPZ ने federal lobbying registration दाखिल कर दिया है और IRS tax-exempt filing की प्रक्रिया चल रही है। ग्रुप 14 अक्टूबर को वाशिंगटन में एक fly-in और पॉलिसी डिनर भी आयोजित करने वाला है। इसके अलावा, 4 अक्टूबर को PGPZ ने SEC के प्रस्तावित Regulation Crypto Assets नियम पर अपनी प्रतिक्रिया की रूपरेखा जारी की। SEC को कमेंट भेजने की आखिरी तारीख 20 अक्टूबर है, जबकि PGPZ ने अपने समुदाय से 9 अक्टूबर तक सुझाव मांगे हैं। अब PGPZ का अगला बड़ा कदम अमेरिकी नीति और डिजिटल एसेट से जुड़े कानूनों पर काम करना होगा। हालांकि, लॉबिंग पर वास्तव में कितना पैसा खर्च हुआ, इसकी साफ जानकारी पहली LD-2 रिपोर्ट आने के बाद ही मिलेगी।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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