Startup Funding News : पुणे की डीपटेक स्टार्टअप Minimac Systems इसी दिशा में काम कर रही है। कंपनी ने 30 करोड़ की प्री-Series A फंडिंग जुटाई है। इस राउंड की अगुवाई Zerodha की निवेश शाखा Rainmatter ने की है। दूसरे वेंचर कैपिटल निवेशकों ने भी इसमें हिस्सा लिया। कंपनी इस रकम का इस्तेमाल रिसर्च और डेवलपमेंट मजबूत करने में करेगी। खास फोकस छोटे ट्रीटमेंट सिस्टम, फ्लीट ऑटोमेशन और फ्लूइड एनालिटिक्स पर रहेगा।
Minimac Systems Funding से टेक्नोलॉजी और सर्विस का विस्तार
Minimac Systems नई फंडिंग से अपनी Recycling on Wheels (RoW) सर्विस भी बढ़ाएगी। इसके लिए बड़े औद्योगिक क्लस्टर्स में रीजनल हब बनाए जाएंगे। कंपनी अपने कमर्शियल, डिजिटल और ऑपरेशनल सिस्टम को भी मजबूत करेगी। Minimac की शुरुआत 2012 में अंशुमान अग्रवाल और हर्षित अग्रवाल ने की थी। कंपनी का मकसद औद्योगिक लुब्रिकेंट की इस्तेमाल की अवधि बढ़ाना है। इसके लिए वह तेल की निगरानी, ट्रीटमेंट और रीसाइक्लिंग तकनीक इस्तेमाल करती है। इससे कंपनियों की नए तेल पर निर्भरता कम हो सकती है।
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तीन स्तरों पर काम करता है मॉडल
Minimac ने लुब्रिकेंट सर्कुलैरिटी के लिए तीन स्तरों वाला मॉडल बनाया है।
- NanoCircularity: मशीन में इस्तेमाल हो रहे तेल की लाइफ बढ़ाना।
- MicroCircularity: मशीन से निकाले गए तेल को फिर से उपयोग के लायक बनाना।
- MacroCircularity: कलेक्शन, रिवर्स लॉजिस्टिक्स और इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा बेस ऑयल में बदलने का पूरा सिस्टम तैयार करना।
कंपनी की Recycling on Wheels सर्विस मोबाइल ट्रीटमेंट यूनिट के जरिए फैक्ट्री साइट पर ही लुब्रिकेंट को साफ और रीसायकल करती है। Rainmatter के मुताबिक, Minimac ने 2012 से अब तक 2,000 से ज्यादा प्रोजेक्ट पूरे किए हैं और करीब 2,500 मशीनें लगाई हैं। इसके सिस्टम 10 लीटर से 10,000 लीटर प्रति मिनट तक की क्षमता संभाल सकते हैं।
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भारत का बड़ा लुब्रिकेंट बाजार बना अवसर
Rainmatter के अनुसार भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लुब्रिकेंट बाजार है। देश में हर साल 5 मिलियन टन से ज्यादा लुब्रिकेंट और ग्रीस की खपत होती है। भारत अपनी बेस ऑयल जरूरत का 60% से ज्यादा आयात करता है। इससे हर साल 2.7 बिलियन डॉलर से ज्यादा का आयात बिल बनता है। Rainmatter का कहना है कि अगले पांच साल में भारत में लुब्रिकेंट की मांग करीब 4% से 5% सालाना बढ़ सकती है।
Minimac ने 2034 तक 860 गीगाग्राम समतुल्य उत्सर्जन से बचने का लक्ष्य भी रखा है। अभी मिली फंडिंग कंपनी को रीसाइक्लिंग तकनीक बेहतर करने, औद्योगिक ग्राहकों तक RoW सर्विस पहुंचाने और भविष्य में इस्तेमाल किए गए तेल की री-रिफाइनिंग क्षमता विकसित करने में मदद करेगी। Minimac Systems का लक्ष्य पुराने लुब्रिकेंट को ज्यादा समय तक इस्तेमाल कराना और तेल की बर्बादी घटाना है। नई फंडिंग से कंपनी इस मॉडल को भारत के बड़े औद्योगिक बाजार तक ले जाने की तैयारी कर रही है।
