Gold Investment India: क्या आने वाले महीनों में सोना नया इतिहास रचेगा? वैश्विक निवेश फर्म JP Morgan की ताज़ा रिपोर्ट ने सर्राफा बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है। फर्म का दावा है कि अगले छह महीनों में सोने की कीमतों में करीब 40 फीसदी तक उछाल आ सकता है। अगर यह अनुमान सही साबित हुआ तो भारत में सोना 2.13 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।
क्या सोना 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार जा सकता है? JP Morgan की नई भविष्यवाणी ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान खींच लिया है।
सोने की कीमतों को लेकर यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ महीनों से वैश्विक बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ था। पश्चिम एशिया में युद्ध और उससे जुड़े आर्थिक असर ने निवेशकों की रणनीति बदल दी थी। अब युद्ध खत्म होने की घोषणा के बाद बाजार का रुख फिर बदलता दिख रहा है।
सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
JP Morgan की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के अंत से अब तक सोने की कीमतों में 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव और अमेरिका-इजराइल से जुड़ी भू-राजनीतिक परिस्थितियां रहीं। युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हुआ।
निवेशकों को लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रख सकता है। इसी वजह से निवेशकों ने सोने की बजाय बॉन्ड और दूसरी ब्याज देने वाली संपत्तियों में पैसा लगाना शुरू कर दिया। मजबूत डॉलर ने भी सोने की चमक फीकी की। आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर सोने की मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
READ MORE: 16 महीने बाद मिले मोदी-ट्रंप, होगा सबसे बड़ा व्यापार समझौता
JP Morgan ने क्यों जताई 40 फीसदी उछाल की संभावना?
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 के अंत तक वैश्विक बाजार में सोने की औसत कीमत 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं, 2027 के अंत तक यह 6,300 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचने का अनुमान है। यह मौजूदा स्तर से करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है। निवेश फर्म का मानना है कि युद्ध समाप्त होने के बाद निवेशकों का भरोसा फिर से सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ेगा। ऐसे में सोने की मांग मजबूत हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोना ब्याज नहीं देता इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशक दूसरे विकल्प चुनते हैं। लेकिन जैसे ही दरों में नरमी या स्थिरता आती है, सोना फिर आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी बढ़ा रही ताकत
सोने की कीमतों को एक और बड़ा सहारा दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों से मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों से कई देशों के सेंट्रल बैंक लगातार सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। P Morgan का मानना है कि यह ट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है।
इसके अलावा कई अन्य कारक भी सोने के पक्ष में दिख रहे हैं:
- महंगाई का दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है
- डॉलर की क्रय शक्ति पर दबाव बना हुआ है
- अमेरिकी अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है
- भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है
इन वजहों से निवेशक सुरक्षित संपत्ति के तौर पर सोने को प्राथमिकता दे सकते हैं।
READ MORE: US-Iran डील के बाद सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल, जानें अपने शहर का रेट?
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
रिपोर्ट के मुताबिक, सोना अभी दो अहम तकनीकी स्तरों के बीच कारोबार कर रहा है। 200 दिनों का मूविंग एवरेज मजबूत सपोर्ट दे रहा है, जबकि 50 दिनों का मूविंग एवरेज कीमतों में बड़ी गिरावट को रोक रहा है। इसी कारण बाजार विशेषज्ञ फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, लंबी अवधि में सोने की दिशा अभी भी सकारात्मक मानी जा रही है।
अगर वैश्विक हालात सामान्य बने रहते हैं और केंद्रीय बैंकों की खरीद जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में सोना एक बार फिर नए रिकॉर्ड स्तर छू सकता है। फिलहाल, निवेशकों और खरीदारों की नजर JP Morgan के इस बड़े अनुमान पर टिकी हुई है।
