Semiconductor ETF: क्या टेक शेयरों की तेज रैली अब थमने वाली है? भारत के जाने-माने निवेशक और हेलिओस कैपिटल के संस्थापक समीर अरोड़ा के हालिया कदम ने बाजार में यही सवाल खड़ा कर दिया है। अरोड़ा ने खुलासा किया है कि उन्होंने पिछले सप्ताह सेमीकंडक्टर शेयरों से जुड़े ETF यूनिट्स बेच दिए। उनका मानना है कि इन शेयरों में पिछले दो महीनों में आई 60-70% की तेजी जरूरत से ज्यादा हो चुकी है।
समीर अरोड़ा ने सेमीकंडक्टर शेयरों से दूरी बनाकर डिफेंस और क्विक कॉमर्स सेक्टर पर बड़ा दांव लगाया, जानिए बाजार को लेकर उनकी नई रणनीति और निवेशकों के लिए संकेत क्या है।
समीर अरोड़ा ने क्यों बेचे सेमीकंडक्टर शेयर?
सोमवार को दिए गए बयान में समीर अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने बाजार खुलने से पहले ही सेमीकंडक्टर ETF से बाहर निकलने का फैसला कर लिया था। उनके अनुसार Broadcom जैसे बड़े शेयरों में गिरावट और कुछ अन्य संकेतों ने उन्हें सतर्क कर दिया। अरोड़ा का कहना है कि सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में हाल के महीनों में काफी तेज बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में अब जोखिम बढ़ गया है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इन शेयरों में बहुत बड़ी गिरावट जरूरी नहीं है, लेकिन मौजूदा स्तर पर उन्हें मुनाफावसूली सही लगी।
बड़ी टेक कंपनियों को लेकर क्यों सतर्क हैं अरोड़ा?
इन दिनों दुनिया भर में OpenAI, Anthropic और SpaceX जैसी कंपनियों के संभावित IPO को लेकर उत्साह बना हुआ है। लेकिन समीर अरोड़ा इस जोश को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिखते। उनका तर्क है कि कोई भी नई कंपनी बिना किसी दूसरे खिलाड़ी का बाजार हिस्सा छीने इतनी बड़ी नहीं बन सकती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले Apple, Netflix जैसी कंपनियों ने पारंपरिक कंपनियों की जगह ली थी। अब नई AI कंपनियां भी उसी रास्ते पर चल रही हैं। अरोड़ा के मुताबिक, जब कोई कंपनी ट्रिलियन डॉलर वैल्यूएशन तक पहुंचती है तो बाजार के किसी दूसरे हिस्से से वह मूल्य कम होता है। इसलिए निवेशकों को सिर्फ उत्साह के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए।
अब किन सेक्टरों पर है Helios Capital की नजर?
समीर अरोड़ा फिलहाल कुछ खास सेक्टरों को लेकर काफी सकारात्मक हैं। उनका मानना है कि इन क्षेत्रों में लंबी अवधि की ग्रोथ की मजबूत संभावना है। उनके पसंदीदा सेक्टर डिफेंस कंपनियां, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म, डिजिटल बिजनेस मॉडल और नए उपभोक्ता आधारित प्लेटफॉर्म है। अरोड़ा का कहना है कि ये कंपनियां पारंपरिक और असंगठित कारोबारों से तेजी से बाजार हिस्सेदारी हासिल कर रही हैं। यही वजह है कि उनमें भविष्य की ग्रोथ दिखाई देती है।
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पावर और बैंकिंग शेयरों पर बदला नजरिया
कुछ समय पहले तक हेलिओस कैपिटल की पसंद में पावर इक्विपमेंट कंपनियां शामिल थीं। लेकिन अब इन शेयरों में आई तेज तेजी के बाद अरोड़ा की दिलचस्पी कम हो गई है। वहीं बैंकिंग सेक्टर को लेकर भी उनका रुख पहले जितना उत्साहित नहीं दिख रहा। हालांकि उन्होंने कुछ समय पहले HDFC Bank में हिस्सेदारी बढ़ाई थी, लेकिन फिलहाल उनका फोकस उन सेक्टरों पर है जहां संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
काल्पनिक मार्केट एक्सपर्ट अजय मेहरा कहते हैं, जब अनुभवी निवेशक किसी सेक्टर में मुनाफावसूली करते हैं तो यह जरूरी नहीं कि वह सेक्टर खत्म हो गया हो। इसका मतलब सिर्फ इतना होता है कि वे बेहतर अवसरों की तलाश में हैं।
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समीर अरोड़ा का ताजा कदम निवेशकों के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है। जहां AI और टेक शेयरों को लेकर बाजार में उत्साह बना हुआ है, वहीं अनुभवी फंड मैनेजर अब वैल्यूएशन और जोखिम दोनों पर नजर रख रहे हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि डिफेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे सेक्टर उनकी उम्मीदों पर कितना खरे उतरते हैं।
