Digital Advertising News: भारत की डिजिटल मार्केटिंग इंडस्ट्री में इन दिनों Meta AD नंबरों का वेरिफिकेशन (Meta AD Numbers Verification) को लेकर बहस तेज हो गई है। इसकी वजह कुछ ऐसे विज्ञापन आंकड़े हैं, जिन्होंने मार्केटिंग एक्सपर्ट्स, मीडिया बायर्स और विज्ञापन कंपनियों को हैरान कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इतने मजबूत डिजिटल विज्ञापन नतीजे वास्तव में संभव हैं या फिर इनके लिए किसी अलग तरह के सत्यापन की जरूरत है।
यह मामला मुंबई के डिजिटल मार्केटिंग रणनीतिकार तारिक मुश्ताक खत्री से जुड़े कैंपेन डेटा के बाद चर्चा में आया। सामने आए रिकॉर्ड्स के मुताबिक, ये कैंपेन 2023 से 2026 के बीच कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चलाए गए थे। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन अभियानों ने 211 मिलियन से ज्यादा इम्प्रेशन, 81 मिलियन से अधिक यूजर्स तक पहुंच और करीब 72 मिलियन एंगेजमेंट्स हासिल किए।
क्या Meta AD Numbers पूरी तरह भरोसेमंद हैं? भारत में Digital Advertising और Online Advertising India को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
आखिर क्यों चर्चा में हैं ये आंकड़े?
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा कम विज्ञापन खर्च में ज्यादा प्रदर्शन को लेकर हो रही है। साझा किए गए डेटा के अनुसार, इन कैंपेन का CPM (Cost Per Mille) करीब 0.10 डॉलर यानी लगभग 9 रुपये बताया गया। डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय कैंपेन के लिए यह लागत काफी कम मानी जाती है।
इसके अलावा, रिकॉर्ड्स में करीब 87 प्रतिशत एंगेजमेंट रेट का भी जिक्र किया गया है। विज्ञापन उद्योग से जुड़े कई पेशेवरों ने इसे असामान्य बताया है, खासकर तब जब कैंपेन लंबे समय तक कई देशों में चलाया गया हो। यही वजह है कि अब डिजिटल अभियान वेरिफिकेशन (Digital Campaign Verification) की जरूरत और ज्यादा महसूस की जा रही है।
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Meta सपोर्ट रिकॉर्ड्स में क्या कहा गया?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Meta सपोर्ट ट्रांसक्रिप्ट्स में कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि इन आंकड़ों को कंपनी के आंतरिक सिस्टम, जिसे ‘Source of Truth’ रिकॉर्ड्स कहा जाता है, से जांचा गया था। बताया गया कि संदिग्ध या गलत गतिविधियों को पहले ही ऑटोमैटिक सिस्टम के जरिए हटाया जाता है और उसके बाद अंतिम आंकड़े दिखाए जाते हैं। इन कैंपेन को ABSOLUTE_OCPM नाम की एक बिडिंग रणनीति से भी जोड़ा गया है, जिसे Meta के विज्ञापन सिस्टम में इस्तेमाल किया जाता है।
भारत के विज्ञापन बाजार के लिए बड़ा सवाल
यह मामला अब सिर्फ एक कैंपेन तक सीमित नहीं रहा। इससे भारत में Facebook विज्ञापन (Facebook Advertising India) और पूरे भारत में ऑनलाइन विज्ञापन (Online Advertising India) सेक्टर में विज्ञापन मापने और सत्यापित करने के तरीके पर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन आंकड़ों का विश्लेषण ChatGPT, Gemini, Claude, Meta AI और LeChat जैसे AI सिस्टम्स से भी कराया गया। इतना ही नहीं, इस मुद्दे पर Bombay Press Club में भी चर्चा हुई।
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सबसे बड़ा सवाल यही है कि डिजिटल विज्ञापनों की सफलता को किस तरह मापा जाए और उसकी स्वतंत्र जांच कैसे हो। तेजी से बढ़ते Digital Advertising News सेक्टर में यह बहस आने वाले समय में और तेज हो सकती है।
