Pixxel Sarvam Partnership: भारत के स्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में एक बड़ा और नया कदम सामने आया है। Pixxel और Sarvam ने मिलकर देश का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर सैटेलाइट बनाने की घोषणा की है। यह प्रोजेक्ट भारत के लिए इसलिए खास है क्योंकि इसमें सैटेलाइट टेक्नोलॉजी और AI दोनों को एक साथ अंतरिक्ष में जोड़ा जाएगा। इस मिशन को ‘पाथफाइंडर मिशन’ कहा गया है और इसे 2026 की चौथी तिमाही तक अंतरिक्ष में भेजने की योजना है।
भारत में स्पेस टेक्नोलॉजी का बड़ा कदम, Pixxel और Sarvam बना रहे हैं AI आधारित सैटेलाइट।
क्या है यह नया स्पेस मिशन?
इस प्रोजेक्ट में लगभग 200 किलोग्राम वजन वाला सैटेलाइट बनाया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी Pixxel की होगी, जो इसे डिजाइन, तैयार, लॉन्च और ऑपरेट करेगी। वहीं, Sarvam इस मिशन में AI तकनीक उपलब्ध कराएगी।
अंतरिक्ष में काम करेगा AI सिस्टम
इस सैटेलाइट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें AI मॉडल सीधे अंतरिक्ष में ही काम करेंगे। यानी डेटा का ट्रेनिंग, प्रोसेसिंग और एनालिसिस सब वहीं होगा। इससे डेटा को पहले पृथ्वी पर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे काम और तेज हो जाएगा।
अब नहीं होगी देरी
अभी तक सैटेलाइट से डेटा पहले धरती पर आता है और फिर उसे कंप्यूटर सिस्टम में प्रोसेस किया जाता है। इस प्रक्रिया में समय लगता है, लेकिन इस नए सिस्टम में डेटा सीधे अंतरिक्ष में ही प्रोसेस हो जाएगा, जिससे रिजल्ट बहुत जल्दी मिलेंगे।
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किन कामों में मदद मिलेगी?
यह तकनीक कई जरूरी क्षेत्रों में काम आएगी, जैसे जंगल में आग का जल्दी पता लगाना, फसलों की सेहत की निगरानी करना, पर्यावरण में बदलाव को समझना और पाइपलाइन लीकेज जैसी समस्याओं को पकड़ना इससे बड़े हादसों को समय रहते रोका जा सकेगा।
क्यों है यह प्रोजेक्ट खास?
Pixxel के CEO ने कहा कि आज धरती पर डेटा सेंटर चलाना मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि इसमें ऊर्जा, जगह और नियमों की सीमाएं हैं। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में सोलर एनर्जी के जरिए कंप्यूटिंग करना ज्यादा आसान और टिकाऊ हो सकता है। वहीं, Sarvam के CEO ने कहा कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि देश की ‘सुरक्षा और स्वतंत्रता’ से जुड़ा मुद्दा है इसलिए भारत में बने AI मॉडल अब अंतरिक्ष में भी काम करेंगे।
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आगे क्या होगा?
इस मिशन में AI की परफॉर्मेंस, डेटा प्रोसेसिंग, पावर यूज और हीट कंट्रोल जैसे कई टेस्ट किए जाएंगे। यह सैटेलाइट Pixxel के नए सेंटर Gigapixxel में तैयार किया जाएगा, जहां भविष्य में 100 सैटेलाइट तक बनाए जा सकेंगे। अगर यह मिशन सफल होता है, तो सैटेलाइट सिर्फ डेटा लेने का काम नहीं करेंगे, बल्कि उसे खुद प्रोसेस करके तुरंत जानकारी भी भेजेंगे।
