PrimeInvestor funding: चेन्नई स्थित वेल्थटेक प्लेटफॉर्म PrimeInvestor अब सिर्फ सलाह देने तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी ने निवेशकों के लिए सीधे पोर्टफोलियो मैनेजमेंट की जिम्मेदारी लेने का फैसला किया है और इसी दिशा में उसे Zerodha की निवेश शाखा Rainmatter से 19.5 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है।
PrimeInvestor को रेनमैटर से 19.5 करोड़ की फंडिंग, पीएमएस बिजनेस को विस्तार देने की तैयारी। जानें कंपनी का क्या है इरादा यहां विस्तार से।
फंडिंग के पीछे क्या है प्लानिंग
इस निवेश का मुख्य उद्देश्य प्राइमइन्वेस्टर के नए पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस कारोबार को तेजी से बढ़ाना है। कंपनी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को भी विस्तार देना चाहती है, ताकि निवेशकों को एक ही जगह पर ज्यादा विकल्प मिल सकें। प्राइमइन्वेस्टर के संस्थापकों का मानना है कि निवेश सलाह और उसके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर होता है। इसी गैप के कारण निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है। अब कंपनी इस दूरी को खत्म कर सीधे निवेश प्रबंधन के जरिए बेहतर रिटर्न देने पर फोकस कर रही है।
फीस मॉडल में पारदर्शिता
जहां अधिकांश वेल्थ मैनेजमेंट कंपनियां कमीशन आधारित मॉडल पर काम करती हैं, वहीं प्राइमइन्वेस्टर एक फिक्स्ड फीस मॉडल अपनाता है। यह फीस Assets Under Management के 0.6 प्रतिशत से 1.2 प्रतिशत के बीच रहती है। जो निवेश योजना की हालातों पर निर्भर करती है। 2019 में शुरू हुई इस कंपनी के पीछे एक से बढ़कर एक श्रीकांत मीनाक्षी, विद्या बाला, आरती कृष्णन और भावना आचार्य शामिल हैं। खास बात यह है कि मीनाक्षी पहले FundsIndia के सह-संस्थापक रह चुके हैं और उन्हें रिटेल निवेश बाजार का गहरा अनुभव है।
READ MORE- मेडिसिन डिलीवरी में ‘रॉकेट स्पीड’, Plazza जुटाने जा रहा 15 मिलियन डॉलर
बड़े लक्ष्य, लंबी योजना
PrimeInvestor ने अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का AUM और 15,000 ग्राहकों का लक्ष्य तय किया है। जनवरी में पीएमएस लॉन्च करने के बाद कंपनी ने करीब 100 ग्राहकों को जोड़ा है और 65-70 करोड़ रुपये का एयूएम हासिल किया है। उम्मीद है कि आने वाले समय में कंपनी के मौजूदा रिसर्च सब्सक्राइबर्स का एक बड़ा हिस्सा इस नई सेवा की ओर शिफ्ट हो सकता है।
READ MORE- 34M की ताकत से Rivan बनाएगा भविष्य की गैस, बिना प्रदूषण के
निवेशकों के लिए नया विकल्प
भारत में PMS इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और यह मुख्यतः हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स, HNIs को टारगेट करती है, जिनका न्यूनतम निवेश 50 लाख रुपये होता है। ऐसे में प्राइमइन्वेस्टर का यह कदम निवेशकों के लिए एक नया और संगठित विकल्प पेश करता है। कंपनी ने शुरुआती चरण में ऐसे निवेशक को चुना है, जो उसके काम में ज्यादा दखल न दे। प्राइमइन्वेस्टर का मानना है कि फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे सेक्टर में स्वतंत्रता बेहद जरूरी होती है, ताकि प्रोडक्ट और प्लानिंग को अपने हिसाब से विकसित किया जा सके। भारत में वेल्थटेक और PMS सेक्टर में तेजी से बदलाव आ रहा है।
आने वाले समय में निवेश सलाह और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का यह संयुक्त मॉडल निवेशकों के लिए एक नया परंपरा बन सकता है।
