Iran US peace talks: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की कोशिशें एक बार फिर अनिश्चितता में घिर गई हैं। इस बार मुद्दा केवल मतभेद नहीं, बल्कि जमीनी हालात और रणनीतिक दबाव हैं, जिनकी वजह से इस्लामाबाद में प्रस्तावित दूसरे दौर की बातचीत आगे बढ़ती नहीं दिख रही। पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir ने सीधे Donald Trump से संपर्क कर इस गतिरोध की एक बड़ी वजह बताई है। उन्होंने अमेरिकी पोर्ट ब्लॉकेड को वार्ता के रास्ते में बाधा बताया। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने इस चिंता को गंभीरता से लेते हुए इस पर विचार करने की बात कही, लेकिन तत्काल कोई ठोस संकेत नहीं दिया।
अमेरिका-ईरान वार्ता पर संकट गहराया, पाकिस्तान की भूमिका और अमेरिकी प्रतिबंध बने बड़ी बाधा। जानें पूरी रिपोर्ट।
भरोसे की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा
इस घटनाक्रम से साफ है कि बातचीत की टेबल पर पहुंचने से पहले ही दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी गहरी हो चुकी है। ईरान ने पहले ही साफ कर दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में वह इस्लामाबाद में होने वाली अगली बैठक में शामिल नहीं होगा, जिससे कूटनीतिक प्रयासों को झटका लगा है। मुनीर का यह हस्तक्षेप उनके हालिया तेहरान दौरे के बाद सामने आया, जहां उन्होंने ईरानी नेतृत्व से मुलाकात कर तनाव कम करने की कोशिश की थी। इस यात्रा को पाकिस्तान ने क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयास के तौर पर पेश किया, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में ठोस सुधार नहीं दिखा।
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पहली बातचीत भी रही बेनतीजा
इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर ग़ालिबफ़ इस्लामाबाद पहुंचे थे। जहां अमेरिका के साथ दशकों बाद उच्चस्तरीय बातचीत हुई। हालांकि, यह दौर भी बिना किसी निर्णायक नतीजे के खत्म हो गया, जिससे दोनों पक्षों के बीच दूरी और बढ़ गई। इसके बाद तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका ने एक ईरानी झंडे वाले जहाज को जब्त कर लिया। जिस पर आरोप था कि वह प्रतिबंधों को दरकिनार कर रहा था। ईरान ने इसे उकसावे की कार्रवाई बताया और सैन्य जवाब की चेतावनी दी। इस कदम ने वार्ता के माहौल को और अधिक खराब कर दिया।
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ईरान का अमेरिका पर दोहरे रवैये का आरोप
ईरान के शीर्ष नेताओं ने भी अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा अरेफ़ ने आरोप लगाया कि वॉशिंगटन एक ओर बातचीत की बात करता है, जबकि दूसरी ओर दबाव बढ़ाने वाली नीतियां अपनाता है, जिससे स्थिति और जटिल हो रही है। वहीं, अमेरिका की ओर से भी कड़ा रुख सामने आया है। Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी कि यदि ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव नहीं माना, तो उसके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। इस बयान ने कूटनीतिक प्रक्रिया पर और अनिश्चितता के बादल ला दिए हैं।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और रणनीतिक जलमार्गों पर नियंत्रण पर सहमति बनना अभी दूर की बात लगती है। ऐसे में इस्लामाबाद वार्ता फिलहाल एक और अधूरी कोशिश बनती नजर आ रही है।
