Adam Singolda Ai: आज के समय में AI सिर्फ रिचर्स ऑफिस वर्क, मीटिंग के लिए नहीं रह गया है। अब इसका इस्तेमाल बच्चों के लिए सीखने के लिए टूल्स के रूप में किया जाने लगा है। Taboola के CEO Adam Singolda ने तो इसे एक डिजिटल पार्टनर की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। सिंगोल्डा कहते हैं कि वे अपने दिन की शुरुआत Claude का इस्तेमाल करके बनाए गए AI एजेंट्स के साथ करते हैं। ये रिसर्च को ऑटोमेट, मीटिंग्स की तैयारी कर देते हैं। वे इनका इस्तेमाल अपने बच्चों के लिए सीखने के टूल्स बनाने में भी करते हैं।
क्या AI आपकी जिंदगी बदल सकता है? Taboola CEO के अनुभव से जानें कैसे AI एजेंट्स बना रहे हैं काम को तेज और आसान।
सुबह की शुरूआत एआई से
सिंगोल्डा ने बताया कि वे खास तौर पर Anthropic के Claude के साथ समय बिताने के लिए जल्दी उठते हैं। वे इसका इस्तेमाल ऐसे AI एजेंट्स बनाने के लिए करते हैं। जो बैकग्राउंड में लगातार काम करते रहते हैं। वे कहते हैं कि ये एजेंट्स जानकारी का विश्लेषण करते हैं। उन्हें दिन भर के कामों के लिए तैयार करते हैं और उनकी प्रोडक्टिविटी को इंसानी क्षमताओं की सामान्य सीमा से भी आगे बढ़ा देते हैं। एक साल पहले के मुकाबले, उनके मौजूदा काम करने के तरीके और पिछले तरीके के बीच प्रोडक्टिविटी का अंतर बहुत ज़्यादा है।
खुद टूल्स बना सकते हैं बच्चे
उन्होंने अपनी 10 साल की बेटी के साथ मिलकर, उन्होंने एक ऐसा गेम बनाया है जो गणित, हिब्रू भाषा, और निवेश, परोपकार और समाज में योगदान जैसे विषयों को सिखाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
उन्होंने इस प्रक्रिया को रचनात्मक और सशक्त बनाने वाला बताया। उनका सुझाव है कि AI टूल्स की मदद से माता-पिता और बच्चे पारंपरिक शिक्षा प्रणालियों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, खुद ही सीखने के टूल्स बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह समझना मुश्किल लगता है कि लोग TikTok जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर अपना समय क्यों बर्बाद करते हैं, जबकि वे उसी समय का इस्तेमाल सॉफ़्टवेयर बनाने या AI के साथ प्रयोग करने में कर सकते हैं।
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पारंपरिक शिक्षा के तरीकों को मिल सकती है टक्कर
पारंपरिक तरीके से काम करने के मुकाबले रचनात्मकता, लगन, डेटा और वितरण ज़्यादा मायने रखते हैं। उनका मानना है कि पारंपरिक तरीके से काम करने की प्रक्रिया अब तेज़ी ऑटोमेट हो रही है। उन्होंने पारंपरिक स्कूली शिक्षा को लेकर भी चिंता जताई, और कहा कि छात्र रिमोट क्लास में बिना किसी सार्थक सीख के घंटों बिता सकते हैं, जबकि शक्तिशाली AI टूल्स का सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। अगर सही से इसका उपयोग किया गया तो वर्तमान शिक्षा के तरीकों को टक्कर दे सकते हैं। कुछ लोगों के लिए, यह सीखने का एक मंच और एक क्रिएटिव पार्टनर बनता जा रहा है।
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इनका कहना है कि सोशल मीडिया पर समय बर्बाद करने के बजाए शिक्षा ग्रहण करने के लिए खुद से टूल्स तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि अगर समय के साथ स्किल्स नहीं बदली तो जॉब जाना तय है। इसलिए एआई तकनीक के साथ युवाओं अपनी स्किल्स बढ़ानी होगी। जिससे कि आनेवाले समय में उनका जॉब सिक्योर हो सके।
