Iran Vs Israel-America War: जैसे-जैसे अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है, हवाई युद्ध में सस्ते ड्रोनों का महत्वपूर्ण प्रभाव और भी स्पष्ट होता जा रहा है। ईरान हजारों ‘Shahed-136‘ ड्रोन तैनात कर रहा है। ये ड्रोन करीब 20,000 डॉलर प्रति यूनिट की कीमत में हैं और महंगे और महत्वपूर्ण लक्ष्यों को निशाना बना रहे हैं।
ईरान और यूएस-इजराइल युद्ध में सस्ते ड्रोन का बढ़ता रोल, Shahed-136 ड्रोन से हाई वैल्यू टारगेट्स पर हमले और आधुनिक युद्ध की नई रणनीति।
ड्रोन बनाम पुराने हथियार
Google के पूर्व CEO एरिक श्मिट ने पहले ही कहा था कि अमेरिकी सेना पुराने हथियारों जैसे टैंक और एयरक्राफ्ट कैरियर्स में निवेश कर रही है। उनके अनुसार, भविष्य का युद्ध सस्ते, बड़े पैमाने पर बनाए गए ड्रोन से होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका अपने स्टॉक में पड़े हजारों टैंक दे और ड्रोन खरीदे। यूक्रेन-रूस युद्ध में देखा गया कि 5,000 डॉलर का ड्रोन 5 मिलियन डॉलर के टैंक को नष्ट कर सकता है।
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ड्रोन युद्ध की खासियत
- सस्ता और असरदार : सस्ते ड्रोन के लिए विरोधी को महंगे हथियार खर्च करने पड़ते हैं।
- एयर डिफेंस को मात : ड्रोन झुंड में उड़ते हैं, जिससे उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है।
- महत्वपूर्ण लक्ष्य पर हमला : ड्रोन हवाई अड्डे, डेटा सेंटर और अन्य बुनियादी ढांचे को जल्दी निशाना बनाते हैं।
ईरान की रणनीति
ईरान ने मिसाइल और ड्रोन का मिश्रित उपयोग करके अमेरिकी बेस और मध्य-पूर्व के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला किया है। इसमें बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और Shahed-136 ड्रोन शामिल हैं।
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Amazon डेटा सेंटर पर असर
रिपोर्ट्स के अनुसार, Amazon के डेटा सेंटर को UAE और बहरीन में ड्रोन हमलों से नुकसान हुआ है। यह दिखाता है कि अब युद्ध महंगे हथियारों पर निर्भर नहीं होगा। छोटे, सस्ते और तेज ड्रोन की तकनीक ही भविष्य की लड़ाई में निर्णायक होगी।
