Google ने AI की मदद से फ्लैश फ्लड का अनुमान लगाने का नया तरीका किया विकसित

अब AI से बाढ़ का अलर्ट! जानिए Google ने कैसे खोजा नया तरीका

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March 13, 2026

Google AI flash flood prediction: विश्वभर में प्रत्येक साल अचानक बाढ़ आ जाने से हजारों लोगों की जान चली जाती है। ऐसे समय में ससमय अनुमान लगा पाना काफी कठिन होता है। क्योंकि यह बहुत कम समय में और छोटे इलाकों में होती हैं। ऐसी ही आपदाओं से निपटने के लिए Google ने एक नया तरीका अपनाया है, जिसमें पुरानी खबरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है। तो आइए जानते हैं पुरानी खबरों के आधार पर कैसे तैयार किया गया है यह तरीका और कैसे करती है काम।

Google ने Gemini AI की मदद से शोध कर फ्लैश फ्लड का अनुमान लगाने वाला नया सिस्टम किया तैयार…जानिए कैसे करेगा काम।

50 लाख खबरों से जुटाया बाढ़ का डेटा

बताया जा रहा है कि फ्लैश फ्लड से संबंधित पर्याप्त वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध नहीं होने के कारण शोधकर्ताओं को नई तरकीब निकालनी पड़ी। वैज्ञानिकों ने कंपनी के Gemini AI की भाषा मॉडल LLM की मदद से विश्वभर की लगभग 50 लाख समाचार रिपोर्टों का विश्लेषण किया। इन रिपोर्टों से करीब 26 लाख बाढ़ की घटनाओं की चुनकर उसका खास डेटासेट तैयार किया।

‘Groundsource’ डेटासेट से मिलेगी बेहतर जानकारी

वैज्ञानिकों ने इस डेटासेट को Groundsource नाम है। इसमें विभन्न देश के उन स्थानों की घटनाओं को एकत्रित किया। बाढ़ की घटनाओं की समय और स्थान के आधार पर दर्ज किया गया है। इस तरह का डेटा फ्लैश फ्लड जैसे घटनाओं को समझने और उनके पैटर्न का अध्ययन करने में काफी मदद मिली।

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AI मॉडल से पता चलेगा कहां है बाढ़ का खतरा

इन शोधकर्ताओं ने डेटासेट के आधार पर एक विशेष मशीन लर्निंग मॉडल तैयार किया है। जो मौसम के वैश्विक पूर्वानुमान को पढ़कर किसी क्षेत्र में आनेवाले अचानक बाढ़ की संभावना का अनुमान लगा सकता है। यह मॉडल LSTM न्यूरल नेटवर्क तकनीक पर आधारित है।

Flood Hub पर दिखेगा 150 देशों का जोखिम

Google का यह नया सिस्टम अब कंपनी के Flood Hub प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है। इसके माध्यम से करीब 150 देशों के शहरी क्षेत्रों में संभावित फ्लैश फ्लड का खतरा दिखाया जा रहा है। इसे दुनिया भर की आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ भी साझा की जा रही है ताकि समय रहते राहत कार्य शुरू किए जा सकें।

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कुछ सीमाएं लेकिन मददगार साबित हो सकता है

हालांकि इस मॉडल की कुछ सीमाएं भी हैं। यह अभी लगभग 20 वर्ग किलोमीटर के बड़े क्षेत्र में ही खतरे का अनुमान देता है। यह स्थानीय रडार डेटा का उपयोग नहीं करता। इसलिए इसकी सटीकता कुछ देशों के सरकारी मौसम अलर्ट सिस्टम से कम हो सकती है। मकसद उन देशों की मदद करना है जहां मौसम से जुड़े आधुनिक सेंसर या विस्तृत डेटा उपलब्ध नहीं हैं।

अगर यह शोध अपने प्रयोग में सफल रहा तो कई लोगों की जान बचा सकती है। आर्थिक क्षति से उबाड़ सकती है और आपदा प्रबंध विभाग के कार्यों को आसान कर सकती है।

Rahul Ray

मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव। हिन्द पोस्ट हिन्दी मैगज़ीन, ईटीवी भारत और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य करते हुए प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाई है। दिल्ली और बिहार के विभिन्न जिलों में न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड स्टोरीज़, कंटेंट प्लानिंग, कॉपी एडिटिंग एवं कंटेंट एडिटिंग से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभालने का अनुभव है। मैंने भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार से डिग्री प्राप्त की है। पाठक केंद्रित कंटेंट तैयार करना मेरी कार्यशैली में शामिल रही है।

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