AI-कंटेंट-पर-सख्ती

AI कंटेंट पर सख्ती, X लाएगा ‘Made with AI’ टैग फीचर

6 mins read
133 views
February 25, 2026

X AI labeling feature: भारत के 2026 आईटी नियम लागू होने के बाद सोशल मीडिया कंपनियों पर एआई-जनरेटेड कंटेंट की पहचान साफ करने का दबाव बढ़ गया है। इसी बीच X कथित तौर पर ‘Made with AI’ लेबल तैयार कर रहा है। यह कदम एक फीचर अपडेट नहीं, बल्कि नियामकीय सख्ती के दौर में पारदर्शिता दिखाने की कोशिशें माना जा रहा है।

डीपफेक और एआई-जनरेटेड पोस्ट पर लगाम लगाने के लिए X ला सकता है नया AI लेबल फीचर… जानिए क्या है पूरा मामला।

नया लेबल कैसे बदल सकता है पोस्ट का तरीका?

रिपोर्ट्स के मुताबिक पोस्ट पब्लिश करते समय यूजर्स को एक टॉगल विकल्प मिल सकता है। जिसे चुनने के बाद यह जान सकेंगे की कंटेंट एआई से बनाया गया है, एडिट किया गया है। या फिर इमेज, वीडियो, ऑडियो सिंथेटिक है। इस विकल्प को ऑन करने के बाद पोस्ट पर साफ तौर पर Made with AI टैग दिखाई देगा। हालांकि कंपनी ने अभी तक इसे आधिकारिक रूप से लॉन्च नहीं किया है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि लेबल अनिवार्य होगा या स्वैच्छिक।

2026 के आईटी नियमों का बढ़ता असर

भारत सरकार के नए आईटी इंटरमिडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड अमेंडमेंट रूल्स, 2026 के तहत प्लेटफॉर्म्स को एआई-जनरेटेड या सिंथेटिक कंटेंट की स्पष्ट पहचान करनी होगी। मेटा डेटा में स्थायी लेबल, अवैध डीपफेक को तीन घंटे के भीतर हटाना और नियम न मानने पर सेफ हार्बर सुरक्षा खोने जैसी शर्तों ने कंपनियों को ज्यादा सतर्क कर दिया है।

READ MORE-  AGI की दहलीज पर Amazon को झटका, टॉप AI लीडर David Luan ने छोड़ी कमान

सेफ हार्बर पर खतरा क्यों अहम है?

अगर कोई प्लेटफॉर्म नियमों का पालन नहीं करता, तो उसे यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। यानी कानूनी जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में एआई लेबलिंग सिस्टम सिर्फ भरोसे का सवाल नहीं, बल्कि कानूनी सुरक्षा का भी मुद्दा बन गया है।

READ MORE-  AI Impact: AMD-Meta की 60 बिलियन डॉलर डील

ग्लोबल ट्रेंड में पीछे नहीं रहना चाहती कंपनियां

एआई डिस्क्लोजर की परंपरा अब विश्वस्तर पर भी तेज हो रही है। YouTube और TikTok ने भी सिंथेटिक मीडिया को लेकर गाइडलाइंस बनाई हैं। Meta पहले ही फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एआई लेबल लागू कर चुका है। ऐसे माहौल में X का अपना लेबलिंग सिस्टम नियामकीय सख्ती को देखते हुए तैयार की जा रही है।

यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?

अगर Made with AI लेबल लागू होता है, तो यूजर्स के लिए यह समझना आसान होगा कि वे जो कंटेंट देख रहे हैं, वह इंसान द्वारा बनाया गया है या एआई की मदद से तैयार किया गया है। डीपफेक और फर्जी सूचना के दौर में यह प्रयास महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

Previous Story

Free AI दौर खत्म, भारत में अब असली कमाई की चुनौती शुरू

बैंगलोर-में-BESCOM
Next Story

बैंगलोर में BESCOM लगाएगा 30 करोड़ का साइबर सुरक्षा सेंटर

Latest from Artificial Intelligence