X AI labeling feature: भारत के 2026 आईटी नियम लागू होने के बाद सोशल मीडिया कंपनियों पर एआई-जनरेटेड कंटेंट की पहचान साफ करने का दबाव बढ़ गया है। इसी बीच X कथित तौर पर ‘Made with AI’ लेबल तैयार कर रहा है। यह कदम एक फीचर अपडेट नहीं, बल्कि नियामकीय सख्ती के दौर में पारदर्शिता दिखाने की कोशिशें माना जा रहा है।
डीपफेक और एआई-जनरेटेड पोस्ट पर लगाम लगाने के लिए X ला सकता है नया AI लेबल फीचर… जानिए क्या है पूरा मामला।
नया लेबल कैसे बदल सकता है पोस्ट का तरीका?
रिपोर्ट्स के मुताबिक पोस्ट पब्लिश करते समय यूजर्स को एक टॉगल विकल्प मिल सकता है। जिसे चुनने के बाद यह जान सकेंगे की कंटेंट एआई से बनाया गया है, एडिट किया गया है। या फिर इमेज, वीडियो, ऑडियो सिंथेटिक है। इस विकल्प को ऑन करने के बाद पोस्ट पर साफ तौर पर Made with AI टैग दिखाई देगा। हालांकि कंपनी ने अभी तक इसे आधिकारिक रूप से लॉन्च नहीं किया है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि लेबल अनिवार्य होगा या स्वैच्छिक।
2026 के आईटी नियमों का बढ़ता असर
भारत सरकार के नए आईटी इंटरमिडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड अमेंडमेंट रूल्स, 2026 के तहत प्लेटफॉर्म्स को एआई-जनरेटेड या सिंथेटिक कंटेंट की स्पष्ट पहचान करनी होगी। मेटा डेटा में स्थायी लेबल, अवैध डीपफेक को तीन घंटे के भीतर हटाना और नियम न मानने पर सेफ हार्बर सुरक्षा खोने जैसी शर्तों ने कंपनियों को ज्यादा सतर्क कर दिया है।
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सेफ हार्बर पर खतरा क्यों अहम है?
अगर कोई प्लेटफॉर्म नियमों का पालन नहीं करता, तो उसे यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। यानी कानूनी जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में एआई लेबलिंग सिस्टम सिर्फ भरोसे का सवाल नहीं, बल्कि कानूनी सुरक्षा का भी मुद्दा बन गया है।
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ग्लोबल ट्रेंड में पीछे नहीं रहना चाहती कंपनियां
एआई डिस्क्लोजर की परंपरा अब विश्वस्तर पर भी तेज हो रही है। YouTube और TikTok ने भी सिंथेटिक मीडिया को लेकर गाइडलाइंस बनाई हैं। Meta पहले ही फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एआई लेबल लागू कर चुका है। ऐसे माहौल में X का अपना लेबलिंग सिस्टम नियामकीय सख्ती को देखते हुए तैयार की जा रही है।
यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?
अगर Made with AI लेबल लागू होता है, तो यूजर्स के लिए यह समझना आसान होगा कि वे जो कंटेंट देख रहे हैं, वह इंसान द्वारा बनाया गया है या एआई की मदद से तैयार किया गया है। डीपफेक और फर्जी सूचना के दौर में यह प्रयास महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
